2 बार दण्डित -3 एजेंसियों से जाँच फ़िर भी “डॉ. निगम की कुर्सी सलामत!
(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
G.R. Medical के पूर्व अधिष्ठाता पर लोकायुक्त, EOW, CBI में जांच लंबित, 9.5 करोड़ अग्रिम भुगतान, दोगुनी रेट पर टेंडर का है आरोप
G.R. Medical College के पूर्व अधिष्ठाता और वर्तमान रेडियोथैरिपी विभागाध्यक्ष डॉ. अक्षय कुमार निगम के कार्यकाल की जांच अब लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ EOW और CBI तक पहुंच गई है। उन पर मेडिकल कॉलेज का का डीन रहते हुए करीब 10 करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता के आरोप हैं।
डॉ निगम पर लगे।
आरोपों के मुताबिक, डॉ. निगम ने अधिष्ठाता रहते हुए विभिन्न फर्मों को लगभग 9.5 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान कर दिया। सभी खरीद GeM पोर्टल पर बाजार दर से दोगुनी कीमत पर की गईं। इसके अलावा शासन के निर्देशों की गलत व्याख्या कर बिना स्वीकृति के 3 करोड़ रुपए तक का रिनोवेशन भी करा दिया गया।
इसी प्रकार अन्य प्रकरणो में।
केंद्र सरकार से मिली 1.40 करोड़ की स्किल लैब में पूरे उपकरण नहीं पाए गए और 7 लाख रुपए ब्याज भी नियम विरुद्ध खर्च हुआ। 1000 बिस्तर अस्पताल के लिए स्वीकृत 484 आउटसोर्स पदों पर भी बिना सक्षम स्वीकृति के भर्ती कर शासन को राजस्व की हानि पहुंचाई गई।
मार्च 2024 में तत्कालीन संभागायुक्त ने भी शासन को पत्र लिखकर कार्यकारिणी आदेशों की अवहेलना और स्वशासी निधि के अनियमित भुगतान का उल्लेख किया था।
वर्तमान में तीन-तीन एजेंसियों से जांच झेल रहे डॉ. निगम का रेडियोथैरिपी विभाग के HOD पद पर बने रहना अब चर्चा का विषय बन गया है। शासन अब क्या कार्रवाई करता है, यह देखना बाकी है।
-G.R. Medical घोटाला: CBI जांच के बीच भी प्रोफेसर बने डॉ. निगम-
-9.5 करोड़ अग्रिम, 3 करोड़ फर्जी रिनोवेशन, स्किल लैब में 1.4 करोड़ का खेल-
डॉ. अक्षय निगम पर लगे आरोपों की फेहरिस्त लंबी है। लोकायुक्त से लेकर CBI तक उनके खिलाफ फाइलें खुली हैं। पर विभाग और सरकार कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है ये बात समझ से परे है?
-डॉ अक्षय निगम पर मुख्य आरोप-
-9.5 करोड़- फर्मों को बिना शर्त अग्रिम भुगतान –
-2X रेट- GeM पर दोगुनी दर से टेंडर ,बिना मंजूरी रिनोवेशन
-1.40 करोड़- स्किल लैब में उपकरण गायब
अक्षय निगम को आयुष्मान राशि के घोटाले 2017 में लोकायुक्त ने दोषी मानकर वेतन वृद्धि रोकी थी इसके आलावा अक्षय निगम को कोर्ट ने मारपीट के केस में जुर्माना लगाया।
सवाल ये है कि इतना सब होने के बाद भी वे विभागाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर कैसे बने हुए हैं?




