(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
विधि मंत्रालय ने मुख्य सचिव को जांच के लिए लिखा पत्र
1857 की क्रांति से जुड़े श्री बैजनाथ धाम मंदिर की 72 बीघा जमीन की नीलामी अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है।
शिकायतकर्ता नरेंद्र प्रताप सिंह, ग्वालियर की शिकायत पर भारत सरकार, विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधान विभाग ने 22 जून 2026 को पत्र जारी किया।
फाइल नं: 27(10)/2025-Leg-IIIवाले पत्र में मंदिर की जमीन की अवैध और अनधिकृत नीलामी’ और ‘आय के दुरुपयोग’ का जिक्र है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला राज्य से जुड़ा है। इसलिए पूरा प्रतिनिधित्व जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन को भेज दिया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि मंदिर संचालक श्री बैजनाथ धाम ट्रस्ट 1996 के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष दिवंगत हो चुके हैं। बावजूद इसके 2026 की नीलामी इन्हीं के नाम से की गई।
RTI के जवाब में SDM लहार ने बताया कि उनके कार्यालय में “श्री बैजनाथ धाम ट्रस्ट की न्यास विलेख/डीड उपलब्ध नहीं है”। इसी आधार पर नीलामी की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय मान्यता है कि रानी लक्ष्मीबाई यहां सन 1857 में रुकी थीं। ग्राम बारहैट के अतिबल सिंह कछवाह मंदिर की रक्षा में शहीद हुए थे।
शिकायत कलेक्टर भिंड, आयुक्त चंबल, धर्मस्व मंत्री, मुख्यमंत्री, CAG, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक भेजी जा चुकी है। दावा है कि उपराष्ट्रपति सचिवालय ने भी कलेक्टर को पत्र लिखा था।
फिलहाल जिला प्रशासन और धर्मस्व विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। केंद्र के पत्र के बाद अब राज्य सरकार से कार्रवाई की उम्मीद है।
कुल मिलाकर जिस तरह से साजिश के तहत अवैध तरीके से नीलामी की गई है अब केंद्र सरकार के द्वारा सख्त रवैया अपनाए जाने से इस प्रकरण में शामिल जिम्मेदारों को जेल के सीखचों में पहुंचना निश्चित जान पड़ता है।




