लेखक: मनोज श्रीवास्तव
टिन्नू यादव के भाई का कहना है कि ट्रस्ट का अध्यक्ष टिन्नू यादव था क्या? जितनी भी गड़बड़ी है सबका आरोपी टिन्नू को बना दिया जा रहा है। बड़े लोगों को बचाने के लिये छोटे लोगों को फंसाया जा रहा है।
एक अन्य चैनल भारत समाचार के रिपोर्टर संदीप खेर जब टिन्नू यादव के घर गये तो उसके परिवार के लोग मीडियाकर्मी से जो व्यवहार किये उसको देख अंदाजा लग जाता है कि यह परिवार अब सवाल करने वालों को भी सबक सिखाने के मूड में है।उनके गाली देने व हाथ चलाने के बाद भी पत्रकारिता को समर्पित संदीप खेर निर्भीकता से उसके पीछे दौड़े। अब अयोध्या में ऐसी भी चर्चा हो रही है कि मामले की पहली बार जानकारी मिलने के बाद चंपत राय ने टिन्नू को फटकार लगाई थी, उसके बाद वह सपा नेताओं के संपर्क में चला गया। टिन्नू किस-किस के संपर्क में था इसकी भी गहन जांच हो रही है। टिन्नू को जानने वाले अयोध्या के लोगों का कहना है कि हर नये व्यक्ति पर प्रभाव बनाने के लिये टिन्नू चंपत राय का कृपापात्र होने की दो-चार कहानी सुनाता था। चंपत राय के कठोर जीवन शैली में टिन्नू की हठधर्मिता कैसे प्रभावी हुई यह बताते-बताये टिन्नू अक्सर कहता था कि वह लखनऊ में जहां रुकते थे वहां छोड़ कर मैं घोषित स्थान पर चला आता था।बड़े-बड़े लोग बड़ा-बड़ा दान देते हैं लेकिन चंपत राय उसको केवल वस्तु मान कर यथोचित स्थान पर रखवा देते थे।
यह खबर भी बहुत तेजी से वायरल हो रही है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने लंबी चुप्पी तोड़ते हुए पुलिस पूछताछ में खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा- “मेरी चढ़ावा चोरी में कोई भूमिका नहीं है।”
उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी मिली
तुरंत सक्रिय होकर संदिग्धों को पकड़वाया और एफआईआर भी दर्ज कराई। चंपत राय ने स्वीकार किया कि चढ़ावे में कोई हेरफेर न हो, इसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी थी। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि टिन्नू यादव बहुत पुराने समय से ट्रस्ट से जुड़ा हुआ था। उससे ऐसा धोखा की उम्मीद कभी नहीं थी।
चंपत राय ने खुलासा किया कि टिन्नू ने धोखा देकर एक सपा नेता को इस मामले की सूचना दी, जिसके बाद पूरा मामला तूल पकड़ गया। उन्होंने बताया कि चोरी का पता चलते ही वे एफआईआर दर्ज कराने गए थे, लेकिन बाद में कुछ वजह से दर्ज नहीं कराई गई। जब पुलिस ने पूछा कि रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों को काम कैसे दिया गया, तो चंपत राय ने जवाब दिया “जरूरतमंद लोगों को काम दिया गया। इसमें सिर्फ मैं अकेला नहीं, ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भी भूमिका रही।”अपने करीबियों से बातचीत में चंपत राय ने अपना दर्द व्यक्त किया “अयोध्या में मेरी सेवा पूरी हो गई है। मैं कलंक लेकर यहां से नहीं जाऊंगा।मेरे भरोसे के साथ विश्वासघात हुआ है।” यह बयान राम मंदिर के भक्तों के मन में उठे सवालों का जवाब है। चंपत राय अभी भी राम मंदिर परिसर के तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास में हैं और एसआइटी जांच का सामना कर रहे हैं।

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं)




