(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
30 दिनों के अन्दर अगर सरकार ने यह शर्त नहीं हटाई तो हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे जनहित याचिका को मुम्बई जेडीएस अध्यक्ष ने दी चेतावनी
जब केन्द्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को मुफ़्त राशन दे रही है तो राज्य सरकार क्यों लगा रही यह ग़रीब विरोधी शर्त कहा जेडीएस नेता ने
महाराष्ट्र सरकार द्वारा राशन कार्ड के लिए ५९,००० रुपये की शर्त जरूरी किए जाने से जनता दल सेक्यूलर ने तीखा विरोध जताया है।
मुंबई जनता दल (सेक्युलर) अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बाजपेई ने चेतावनी दी है कि अगर ३० दिनों में इस निर्णय को सरकार ने वापस नही लिया तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
मुम्बई अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए निर्धारित ५९,००० रुपये की वार्षिक आय सीमा अत्यंत असंवेदनशील है। इस शर्त को बदलकर 250000 रुपये करने की मांग को लेकर मुंबई जनता दल (सेक्युलर) ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है।
बाजपेई ने आंकड़ों के साथ बताया कि महाराष्ट्र देश का एक अग्रणी आर्थिक राज्य होने के बावजूद यहाँ के शहरी गरीबों के लिए अत्यंत कठिन शर्त लागू है। इसके विपरीत अन्य राज्यों में स्थिति इस प्रकार है:
दिल्ली: वार्षिक आय सीमा 250000 रुपए ,उत्तर प्रदेश में वार्षिक आय सीमा 200000,
गुजरात में शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा 150000 है।
जबकि इसकी तुलना में महाराष्ट्र में हास्यास्पद ढंग से केवल 59000 रुपये की सीमा रखकर करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा के अधिकार से जानबूझकर वंचित किया जा रहा है।
जेडीएस नेता ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी कानून से ही सरकार का विरोधाभास स्पष्ट हो जाता है।
सरकारी नियमों के अनुसार, मुंबई और अन्य महानगर पालिका क्षेत्रों (जोन-1) में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी लगभग 13921 रुपये प्रति माह है यानी कानूनन न्यूनतम मजदूरी पाने वाले परिवार की वार्षिक आय भी डेढ़ से पौने दो लाख रुपये होती है। यदि परिवार में दूसरा कमाने वाला सदस्य हो, तो यह आय ढाई लाख तक पहुँच जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि सरकार के अपने ही न्यूनतम मजदूरी कानून के तहत काम करने वाले श्रमिक को आपूर्ति विभाग राशन के लिए ‘अमीर’ घोषित कर रहा है। यह कानूनी और नैतिक विरोधाभास है।
बाजपेई ने प्रदेश सरकार पर सवाल खड़ा किया कि जब केंद्र सरकार का फंड मिल रहा है तो फिर राज्य सरकार उदासीनता क्यों दिखा रही है।
उन्होंने साफ़ किया कि’प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PMGKAY) और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त अनाज का पूरा वित्तीय बोझ केंद्र सरकार उठाती है। इससे राज्य सरकार के खजाने पर कोई बोझ नहीं पड़ता है,इसके बावजूद, केवल पात्रता मानदंडों में बदलाव न होने के कारण मुंबई के ऑटो रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, सुरक्षा गार्ड और निर्माण मजदूर राशन से वंचित हो रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में महंगाई और मकानों के किराए को देखते हुए इस शर्त में तुरंत ढील दी जानी चाहिए।
मुंबई जनता दल (सेक्युलर) अध्यक्ष ने चेताया कि 30 दिनों अन्दर ढाई लाख रुपये की नई सीमा लागू नहीं की जाती है तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीने और खाद्य सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए माननीय उच्च न्यायालय में ‘मैंडेमस रिट’ के तहत जनहित याचिका दायर की जाएगी।




