लेखक- सुभाषचन्द्र
तरुण तेजपाल “तहलका पत्रिका” का संस्थापक एडिटर हुआ करते थे इस व्यक्ति ने भाजपा के एक ईमानदार नेता के रूप में विख्यात पहले दलित अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को फर्जी स्टिंग ऑपरेशन में फंसाकर उनका राजनीतिक भविष्य समाप्त करने के साथ ही भाजपा की लोकप्रियता को भी उस दौरान कमतर कर दिया था, मालूम हो कि तरूण तेजपाल कांग्रेस का चहेता था और कपिल सिब्बल का बेहद नज़दीकी माना जाता था।
ये स्टिंग ऑपरेशन उसने 23 दिसंबर 2000 से लेकर 7 जनवरी, 2001 तक किए और 13 मार्च, 2001 को जारी किए थे – शायद इसलिए कि मई, 2021 में चुनाव होने थे।
तरुण तेजपाल ने भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण पर कलंक लगाया और आज उस पर बंगारू लक्ष्मण से भी कहीं बड़ा कलंक लग गया कहीं तो हिसाब पूरा करते हैं कर्म।
काल चक्र को देखिए वर्ष 2000 से 13 साल बाद 2013 में तरुण तेजपाल ने कांड किया और आज 13 साल बाद ही उसे सजा हुई है।
वर्ष 2013 के दौरान गोवा में तरुण तेजपाल की अपनी ही एक साथी ने उस पर लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया केस 8 साल चला जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 8 हफ्ते में फैसला होना चाहिए।
21 मई, 2021 को गोवा की सेशन जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को आरोपमुक्त कर दिया – मैंने अपने 28 अप्रैल, 2021 में लिखा था कि शायद उसे बचा लिया जाएगा ऐसा लिखने का कारण था कि जज क्षमा जोशी द्वारा निर्णय सुनाने की तिथियों को बार बार बदलना। केस की सुनवाई 8 मार्च 2021 को पूरी हो गई और फैसला सुनाने की तारीख 27 अप्रैल तय की जज साहिबान ने लेकिन बिना किसी कारण उसे आगे बढ़ा कर 12 मई कर दिया और उस दिन भी फैसला सुनाए बिना तिथि 19 मई कर दी। अब 19 मई को कह दिया गया कि कोर्ट में बिजली की समस्या है और तब 21 मई को तेजपाल को बरी कर दिया गया।
मेरी शंका निराधार नहीं थी बार बार फैसले की तारीख बदलना फैसले के लिए सौदेबाजी की तरफ इशारा करता है।
गोवा सरकार तब ही बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में अपील में चली गई और आज 5 साल बाद हाई कोर्ट की गोवा पीठ के Justices Dr. Neela Gokhale और Amit Jamsandekar ने ट्रायल कोर्ट के तेजपाल को बरी करने के आदेश को पलट दिया और उसे IPC के section 376 और 354A में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई लेकिन तेजपाल को 4 सप्ताह में अपील करने / जेल में सरेंडर करने का समय दे दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो जरूर और मुझे पूरा भरोसा है सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगा देगा और उसे जमानत पर भी रखेगा लेकिन अपील पर सुनवाई कब होगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
तरुण तेजपाल 13 साल से बाहर है और अब सजायाफ्ता होने के बाद भी बाहर ही रहेगा।
तरुण तेजपाल ने तो अपनी वयस्क महिला साथी के साथ दुष्कर्म किया था, कुछेक मामलों में देखा गया है कि सुप्रीम कोर्ट तो 4 – 5 साल की बच्चियों से बलात्कार करने वालों पर भी नरम रुख अपना लेता है।
तरुण तेजपाल ने अपराध के अगले दिन ईमेल लिख कर पीड़िता से अपने कुकृत्य को स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी थी।बड़े आश्चर्य की बात है इतने बड़े सबूत को भी सेशन जज क्षमा जोशी ने नज़रअंदाज कर दिया।
फैसले की तारीख बदलना MJ Akbar भी भुगत चुके हैं इस सन्दर्भ में आगे लिखूंगा।

(उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और यह उनके निजी विचार हैं)




