(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
उत्तर प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के कर्मचारियों अधिकारियों को अंतर प्राधिकरण स्थानांतरित करने की नीति क्या पुरानी होने के साथ धुंधली भी होती जा रही है? प्रतिवर्ष 30 जून तक होने वाले तबादलों को लेकर यहां से लखनऊ तक खूब हो हल्ला मचने के बाद मालूम होता है कि तबादला एक्सप्रेस आकर चली भी गई और टिकट लेकर बैठे यात्री बुलावे और धकियाने के बावजूद अपने स्थान से हिले भी नहीं हैं जबकि तबादला आदेश में निर्धारित समयावधि में नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी स्पष्ट लिखी होती है।
मालूम हुआ कि गत 19 मई को नोएडा से यूपीसीडा स्थानांतरित किए गए उप निदेशक उद्यान राजेन्द्र सिंह ने अभी तक नोएडा का दामन नहीं छोड़ा है। नोएडा ऐसी जगह है भी नहीं जिसे छोड़ा जाए परन्तु शासन के निर्देश का पालन तो करना ही होता है। बताया गया है कि उक्त उप निदेशक ने शासन के तबादला आदेश को न्यायालय में चुनौती दी। उन्होंने न्यायालय को बताया कि यूपीसीडा में उप निदेशक उद्यान का पद ही नहीं होता है। न्यायालय ने यह तर्क स्वीकार करते हुए उनके तबादला आदेश को निरस्त कर दिया तो शासन ने 4 जून को उनका तबादला बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा)में कर दिया।उप निदेशक उद्यान राजेन्द्र सिंह वहां भी नहीं गये। बताया गया है कि राजेंद्र सिंह ने बीडा में कोई काम न होने का दावा करते हुए वहां भी जाने से इंकार कर दिया है। हालांकि लगभग 27 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण कर बीडा अपने क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य करा रहा है।यह उप निदेशक अपनी मर्जी से नोएडा प्राधिकरण में ही डटा हुआ है और अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है जबकि नोएडा प्राधिकरण इसे मई में ही कार्यमुक्त कर चुका है। उल्लेखनीय है कि 2018 में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लागू की गई अंतर प्राधिकरण तबादला नीति समय बीतने के साथ और अधिक प्रभावी तथा उपयोगी होने के स्थान पर धुंधली और तबादला उद्योग में बदल गई है। इस वर्ष जून की अंतिम तिथि को नोएडा ग्रेटर नोएडा और यीडा में किए गए 17 तबादले कुछ घंटे के अंतराल में निरस्त कर दिए गए। चर्चा ए आम है कि वर्तमान सरकार के आखिरी वर्ष में इन तबादलों को निरस्त कर संबंधित मंत्री ने भारी पुण्य प्राप्त किया।





