【डॉ.मनमोहन-देवगौड़ा समेत कई दिग्गजों को याद आएगे वो बीते दिन सदन के】

【डॉ.मनमोहन-देवगौड़ा समेत कई दिग्गजों को याद आएगे वो बीते दिन सदन के】

★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{इस बार संसद में नहीं होगा कोई पूर्व प्रधानमंत्री, आठ दिग्गज नेता भी सदन से रहेंगे बाहर}
[डॉ. मनमोहन लगातार 28 साल रहे राज्यसभा सदस्य तो आडवाणी चार बार उच्चसदन तो आठ बार लोकसभा चुनाव जीत पहुँचते रहे है सदन में]

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♂÷संसद का सत्र सोमवार से शुरू हो गया है, लेकिन दशकों से संसद और भारतीय राजनीति के फ़लक़ पर छाए रहने वाले आठ चेहरे इस बार नजर नहीं आएंगे। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, एच. डी. देवगौड़ा तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ज्योतिरादित्य सिंधिया, शत्रुघ्न सिन्हा,यशवंत सिन्हा, तारिक अनवर, शरद यादव,आदि शामिल हैं। यही नहीं, इस बार संसद में कोई पूर्व प्रधानमंत्री भी नहीं होगा।

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पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह करीब 28 साल का राज्यसभा का कार्यकाल पूरा करने के बाद अब इस सत्र में नजर नहीं आएंगे। हो सकता है कि कांग्रेस भविष्य में उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजे लेकिन इस सत्र में उनकी अनुपस्थिति सबको महसूस अवश्य होगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सबसे पुराने संसद सदस्य रहे हैं जो 1970 से लेकर 2019 तक संसद में रहे, पहले चार बार राज्यसभा सदस्य के रूप में और फिर उन्होंने आठ बार लोकसभा चुनाव जीते लेकिन वयोवद्ध नेता ने इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था।इसी प्रकार भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व केन्द्रीय मन्त्री मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, उमा भारती ने भी चुनाव नहीं लड़ा ऐसे में स्वतः सदन में नही दिखेंगे।
भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी लंबे समय बाद अब संसद के गलियारों में नहीं दिखेंगी। लोकसभाध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतरी थी,वह आठ बार लोकसभा सांसद रही हैं।
इसी प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री और जद एस नेता एच. डी. देवगौड़ा भी करीब बीस साल के बाद संसद में नजर नहीं आएंगे वे इस बार तुमकुर से चुनाव हार गए है, हो सकता है कि उनकी पार्टी बाद में उन्हें राज्यसभा भेजे लेकिन अभी वह संसद में नहीं दिखेंगे। इसी प्रकार मल्लिकार्जुन खड़गे जिन्हें कांग्रेस ने पिछली बार लोकसभा में अपना नेता बनाया हुआ था और अनुभवी नेता थे, इस बार चुनाव हार गए वे भी संसद में नजर नहीं आएंगे।

Mukesh Seth

Chief Editor

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