(मुकेश सेठ)(मुंबई) √ ५ अगस्त १९९४ में देश में रिलीज हुई “हम आपके हैं कौन” को देखने के लिए दर्शकों को ब्लैक में ५०० रुपये तक के टिकट को भी खरीदना पड़ा था √ यूपी जौनपुर के गाँव में बनी “नदिया के पार” फिल्म को अमीर शहरी परिवेश में सूरज बड़जात्या ने सलमान खान और […] Read more
(मुकेश सेठ)(मुंबई) √ ४६ करोड़ ३६ लाख रुपए ग्रैनो प्राधिकरण से कर्मचारियों को भुगतान करवाने व उन्हें कार्य पर बहाली की मांग पर सीटू का श्रम कार्यालय पर प्रदर्शन अन्याय के खिलाफ 20 वर्ष से अधिक लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़कर और कोर्ट से जीत जाने के बाद भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत […] Read more
लेखक -सुभाषचंद्र √ मुकदमों में देरी के लिए कहीं तो तय होनी चाहिये जिम्मेदारी! कल मैंने दिल्ली हाई कोर्ट में नेशनल हेराल्ड के 3 साल से लटके केस के बारे में विस्तार से बताया था। दूसरा भी दिल्ली हाई कोर्ट में ही लटकता भटकता केस है, 2G स्पेक्ट्रम का, जिसमें सभी आरोपियों को बरी किये […] Read more
लेखक -ओम लवानिया “प्रतिभावान पुत्र, पिता की असफलताओं की सीढ़ियाँ चढ़कर सफलता को अपने समक्ष झुकाने की क्षमता रखता” नेटफ्लिक्स की डॉक्युमेंट्री मॉर्डन मास्टर्स में लेखक केवी विजेयंद्र कहते थे कि ऐसे दिन भी थे जब शाम को पता नहीं था सुबह क्या खाएँगे, क्योंकि इनकी शुरुआत घोस्ट राइटर के तौर पर हुई थी। केवी […] Read more
लेखक -सुभाषचंद्र अदालत में चल रहे मुकदमों में देरी के लिए कहीं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, किसी चीफ जस्टिस ने आजतक कोई कठोर और त्वरित कदम क्यों नही उठाया है यह प्रश्न न्यायप्रिय देश वासियों को प्रतिदिन मथ रहा है! यह लेख हमेशा की तरह बड़ी जिम्मेदारी से लिख रहा हू,अनेक मामलों में अदालतें […] Read more