नाइजीरिया में इस्लामिक फुलानी मिलिशिया के आतंकियों ने 100 से अधिक ईसाइयों को मारा

लेखक: श्रवण चौरसिया

आतंकियों ने बेडरूम में बंद कर कई ईसाइयों को फूंका,खेती-किसानी करने वाले घर छोड़ने को हुए मजबूर

नाइजीरिया के सेंट्रल बेन्यू स्टेट में इस्लामिक फुलानी मिलिशिया ने ईसाई समुदाय के 100 से ज्यादा लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं। वहीं, दर्जन भर अब भी लापता हैं। यहाँ मुस्लिम और ईसाई के बीच जमीन को लेकर विवाद चलता आ रहा है। इसके चलते कई परिवार घर छोड़ने को मजबूर हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, येलेवाटा गाँव में हमला बीते 13 जून को देर रात से शुरू होकर अगली सुबह तक चला। काफी परिवारों को उन्ही के घर से बेडरूम में बंद कर जिंदा जला दिया गया। वहीं, हमले में घायल लोगों को ठीक से चिकित्सा सहायता भी नहीं मिल पा रही है।

दरअसल, बेन्यू राज्य के उत्तर क्षेत्र में मुस्लिम और दक्षिण क्षेत्र में इसाई बहुल लोग रहते हैं। यहाँ मुस्लिम बहुल चरवाहों और इसाई बहुल किसानों के बीच जमीन को लेकर अक्सर विवाद रहता है। जब यह विवाद मज़हब , रिलीजन पर आ जाता है, तो नरसंहार तक बात पहुँच जाती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाके में गोलीबारी और हत्याएँ की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इनमें अधिकतर पीड़ित ईसाई किसान हैं, जिसके कारण देश की खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा है। पिछले महीने संदिग्ध चरवाहों ने बेखौफ 42 लोगों की हत्या कर दी थी। साल 2019 से अब तक इन हिंसा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि अभी भी कई लोग लापता हैं। दर्जनों घायल हैं,कई परिवारों को उनके कमरों में बंद कर जिंदा जला दिया गया है।

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नाइजीरिया के मिडिल बेल्ट में स्थित बेन्यू राज्य का उत्तर क्षेत्र मुस्लिम बहुल और दक्षिण क्षेत्र ईसाई बहुल इलाके में बंटा हुआ है। इस क्षेत्र में चरवाहों और किसानों के बीच जमीन के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से संघर्ष चल रहा है।जमीन-पानी के लिए मुस्लिम-ईसाई लोगों में लड़ाई बेन्यू नाइजीरिया के मध्य बेल्ट में है, जिसके
उत्तर में बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी है और दक्षिण में ज्यादातर ईसाई रहते हैं। दोनों समुदायों के बीच
अक्सर जमीन और पानी के लिए लड़ाई होती है।

जातीय और धार्मिक बंटवारे के कारण ये झगड़े और भी बदतर हो जाते हैं। खासकर जमीन को लेकर मुस्लिम और ईसाई चरवाहों और किसानों के बीच कॉम्पिटिशन है।

चरवाहों को अपने मवेशियों के चरने लिए और किसानों को खेती के लिए जमीन की जरूरत होती है। किसान चरवाहों पर आरोप लगाते हैं कि वे मवेशियों को उनके खेतों में चराते हैं और फसल नष्ट कर देते हैं।

चरवाहों का तर्क होता है कि ये जमीन चरागाह के रास्ते हैं, जिन्हें देश की आजादी के पांच साल बाद 1965 में पहली बार कानून बनने के बाद अधिकार मिला था।

मई में चरवाहों ने 42 लोगों की गोली मारकर हत्या की पिछले महीने, नाइजीरिया के बेन्यू के ग्वेर वेस्ट जिले में हुए एक के बाद एक कई हमलों में संदिग्ध चरवाहों ने कम से कम 42 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अप्रैल में बेन्यू के पड़ोसी राज्य पठार में कम से कम 40 लोग मारे गए थे।

शोध फर्म एसबीएम इंटेलिजेंस के अनुसार, 2019 से अब तक बेन्यू में झड़पों ने 500 से अधिक लोगों की जान गई है और 22 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

नाइजीरिया में दो सालों में 10 हजार से ज्यादा लोग मारे गए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 29 मई 2025 को अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि पिछले दो सालों में सेंट्रल और नॉर्थ नाइजीरिया में बंदूकधारियों के हमलों में कम से कम 10,217 लोग मारे गए हैं।

एमनेस्टी ने राष्ट्रपति बोला अहमद टिनूबू को इसका दोषी ठहराया और कहा कि उनके पदभार संभालने के बाद हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। बेन्यू में सबसे अधिक 6,896 लोगों की मौत हुई, जबकि प्लैटो में 2,630 लोग मारे गए।

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(लेखक आतंकवाद पर गहरी जानकारी रखते हैं और यह उनके निजी विचार हैं)

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