★मुकेश शर्मा★ ★ग्वालियर(मध्यप्रदेश)★ {मामला शमसान घाट और नाले पर जबरन रास्ता बनाने का,ग्वालियर हाईकोर्ट में दाख़िल जनहित याचिका पर नोटिस के बाद अब 4 जनवरी को होगी सुनवाई} (उच्चन्यायालय ने मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव समेत कलेक्टर भिंड,भिंड ज़िले के अमायन थाना प्रभारी को भी ज... Read more
राष्ट्रीय
लेखक-अरविंद जयतिलक भारतीय संविधान के चरित्र व स्वरुप पर गौर करें तो वह एक मृदु संविधान की सभी विशेषताओं से लैस है। मृदु लक्षणों की वजह से ही उसका प्रतिनिधित्यात्मक चरित्र लोकतंत्र का हिमायती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व निष्पक्ष चुनाव उसकी शीर्ष प्राथमिकता में है। म... Read more
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(मुकेश सेठ)(मुम्बई) राज्यसभा के चुनावी रण में जीत की गोटी फिट करने के लिए देवेन्द्र फडणवीस ने कोर कमेटी की बैठक में लगाए हिसाब किताब आदित्य ठाकरे के द्वारा दो सीट पर दावा किए जाने पर बीजेपी नेता आशीष शेलार ने कहा ख्याली पुलाव महायुति बनाम महाविकास आघाड़ी के दांवपेंच के... Read more
- गोरखपुर में शोहदों ने योगी के दावे की हवा निकाली, एम्स की डॉ, नार्थईस्ट की बेटी से की सरेराह छेड़खानी!
- खबर का असर:नोएडा सेक्टर 11 स्थित मेट्रो हॉस्पिटल को नोएडा प्राधिकरण ने भेजा धारा 10 का नोटिस
- गाजियाबाद नगर निगमक्षेत्र मेंइंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से जनसुविधाओं की गाड़ियों की होगी सतत् निगरानी
- जनता ने सरकार को नकार दिया है बस “वोट” का “वेट” कर रही है:अखिलेश यादव
- सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों की उचित मंच देने के लिए कर रही कार्य: गिरीश चंद्र यादव
- लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मिले मजबूती: अशोक कुमार कोठारी
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव ♂÷मार्क्सवादी कम्युनिस्टों की फितरत है कि कोई भी नेक काम, पार्टी हित में ही क्यों न हो, तब भी उस पर कालिख पोत ही देते हैं। कारनामा हो, कारगुजारी, हो उसे काला करार देंग... Read more
लेखक~ओमप्रकाश तिवारी ♂÷केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संदेश साफ है कि इस बार मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को परास्त करना है। सोमवार को एक दिन की मुंबई यात्रा के... Read more
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव ♂÷यह वृत्तांत है एक सोशलिस्ट सूरमां का जो था तो निखलिस गांधीवादी, पर गुरिल्ला युद्ध में उसे महारत थी। संदर्भ है रामवृक्ष बेनीपुरी का। आज उनकी पछपनवीं (6 सितम्बर 2022)... Read more
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव ♂÷दुबई में कल (4 सितम्बर 2022) रात जो था, वह खेल नहीं, उसका स्वांग था। दर्शक मंत्रमुग्ध थे, पुतलीनुमा। डोर थी ऐय्यारों के हाथ! तिलस्म का नजारा रहा। याद आ गए देवकीनन्दन... Read more







































