★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{सिजोफ्रेनिया से ग्रसित मरीज़ मित्रों,परिवार से ख़ुद को रखना चाहता है अलग-थलग}
[किसी चीज़ पर फ़ोकस न कर पाना,नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन,कन्फ्यूजन, सोचने की क्षमता में कमी होते हैं इसके प्रमुख लक्षण]
♂÷सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है,इस बीमारी की चपेट में पुरुष और महिलाएं किसी भी उम्र में आ सकती हैं, कई लोग इस बीमारी को स्प्लिट पर्सनैलिटी समझते हैं जबकि यह एक दूसरे तरह का डिसऑर्डर है और शिजोफ्रेनिया के मरीजों में कई बार आत्महत्या तक करने की भी इच्छा उत्पन्न हो जाती है।
उक्त गम्भीर मानसिक बीमारी के बाबत बताते हुए प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. एमएन त्रिपाठी ने आगे जानकारी दी कि, अगर समय रहते उनको मनोचिकित्सक के पास ले जाया जाए और इलाज कराया जाए तो वह संपूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपना जीवन सामान्य रूप से जी सकते हैं।
डॉक्टर ने आगे कहा कि सिजोफ्रेनिया के मरीज कुछ भी सामान्य तरीके से नहीं कर पाते, उनको अपने दिनचर्या के कार्यों को भी संपन्न करने में दिक्कतें महसूस होते हैं। वह अपना सामान्य जीवन नहीं जी पाते हैं,वह परिवार व समाज के लिए भी एक तरह से परेशानी का सबब बनते चले जाते हैं।
बीएचयू के पूर्व मनोचिकित्सक डॉक्टर त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इस बीमारी के लक्षण किशोरावस्था और 20 साल की उम्र में दिखाई देने लगते हैं जिनमें प्रमुख रूप से ऐसे लोग मित्रों परिवार से ख़ुद को अलग कर लेना, किसी चीज पर फोकस न कर पाना,नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई लिखाई में समस्या,भ्रम में रहना,हेलुसिनेसन, सोचने में विकार ,प्रेरणा की कमी, अपनी भावनाओं को जाहिर न कर पाना, समाज से कटकर रहना, इस मानसिक बीमारी के प्रमुख लक्षण है।
मनोचिकित्सक ने आगे बताया कि सिजोफ्रेनिया का इतिहास रखने वाले परिवार में इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा ज्यादा रहता है,कुछ अध्ययनों के अनुसार वायरल संक्रमण के कारण बच्चों में एक प्रकार का पागलपन के विकास होने की संभावना ज्यादा रहती है तो वहीं प्राथमिक जीवन में गंभीर तनाव के कारण एक प्रकार के पागलपन के विकार होने का खतरा बना रहता है।
जबकि कई बार नशीले पदार्थों का सेवन करने की भी वजह से इंसान को सिजोफ्रेनिया हो सकता है।
डॉक्टर एम एन त्रिपाठी ने सिजोफ्रेनिया के इलाज के बाबत बताया कि मरीज के बीमारी के तथ्यों, गंभीरता और लक्षणों के आधार पर सिजोफ्रेनिया चिकित्सा के उपायों में अंतर हो सकता है, मरीजों की आम तौर पर एंटीसाइकॉटिक दवाई दी जाती हैं तो कुछ मरीजों की खास थेरेपी और काउंसिलिंग की जाती है ताकि मरीज तनाव से बाहर आ सके, तो वहीं कुछ गंभीर मामलों में सिजोफ्रेनिया से ग्रस्त मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके भी चिकित्सा करनी पड़ती है कि जिससे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो सके।
डॉ. एमएन त्रिपाठी ने लोगों से अपील की है कि स्वस्थ व सफ़ल जीवन के लिए जिस तरह से स्वस्थ शरीर होना जरुरी है तो वहीँ खुशहाल जिंदगी के लिए मानसिक स्वास्थ्य उससे भी बेहद जरूरी होता है।अतः लोगों को असामान्य व अनियमित व्यवहार प्रदर्शित करने वालों को हल्के ढंग से न लेकर तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाकर परामर्श व चिकित्सा करानी चाहिए,जिससे वह लोग भी सामान्य व सफ़ल जीवन यापन कर सके।






















