【कमलापतिजी को तक राजीव ने नहीं बख्शा था !】
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव ♂÷पुरानी कहावत है ‘इतिहास स्वयं को दुहराता है’।नये दौर में भी, पुरानी घटना की भांति ही। यह परिप्रेक्ष्य संपादकाचार्य पं. कमलापति त्रिपाठी (आज उनकी 105 वीं जयंती)…
Sach ka saath
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव ♂÷पुरानी कहावत है ‘इतिहास स्वयं को दुहराता है’।नये दौर में भी, पुरानी घटना की भांति ही। यह परिप्रेक्ष्य संपादकाचार्य पं. कमलापति त्रिपाठी (आज उनकी 105 वीं जयंती)…