♂÷कहते है जब ग्रहदशा खराब हो जाते है तब सर पर राहु-केतु-शनि सवार हो जाते है तब राजा भी रंक बनते चले जाते है।
ऐसे ही सफ़र पर निकल पड़े है कभी “नभ नरेश “रहे जेट एयरवेज़ चैयरमैन नरेश गोयल।कई महीने से अपने हजारों कर्मियों को पगार न दे पाने वाले गोयल ने पिछले दिनों जेट एयरवेज के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है तो वही जेट के विमान हैंगर में खड़े हो गए है।
जेट एयरवेज़ विमान के थमे पहियो से बढ़ी मुश्किलें♀
उड़ाने रद्द होने से पहले तो छुट्टियों के दौरान सपरिवार पूर्व में ही जेट एयरवेज़ में सीट बुक करवाने वालो को भारी फ़जीहत झेलनी पड़ रही है तो वही दूसरी तरफ शादी-विवाह व लोकसभा इलेक्शन में भी यात्रियों को यहाँ वहाँ जाने में महंगी टिकट के साथ मुश्किलें भी झेलनी पड़ रही है।
एयर पोर्ट पर इन दौरान यात्रियों के भारी जनदबाव को संभालना एयरपोर्ट कर्मियों व सुरक्षाकर्मियों के लिए खासा मशक्कत भरा साबित हो रहा है,खासकर मुम्बई से यूपी-बिहार की रूट पर।
मोदी की ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी पड़ गयी भारी♀
ब्लैकमनी के विरुद्ध ज़ीरो टॉलरेंस अपनाने की नीति की घोषणा पर बहुमत पाने में सफ़ल रहे मोदी सरकार की नरेश गोयल जेट एयरवेज की बोली प्रक्रिया से पीछे हट गए हैं व एतिहाद और टीपीजी आदि ने गोयल के बोली प्रक्रिया में हिस्सा लेने का तगड़ा विरोध किया था।वित्तीय संकट में फंसी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज की मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं।कंपनी के फाउंडर नरेश गोयल ने कभी कुछेक दशक पूर्व 3 सौ रुपये की मामूली ट्रैवेल एजेंट की नौकरी करते हुए भी ग़ैर मामूली ख़्वाब देखे थे।बीते दिनों जेट एयरवेज की बोली में खुद नरेश गोयल भी शामिल हो रहे थे किन्तु बोली लगाने की प्रक्रिया में शामिल अन्य एयर लाइन्स कम्पनियों के तीखे तेवर देख गोयल को यूटूर्न लेना पड़ा।
अब जेट एयरवेज की बोली से नरेश गोयल ने हाथ खींच लिए हैं।एतिहाद और टीपीजी आदि निवेशकों ने कहा था कि अगर गोयल बोली का हिस्सा होंगे तो वो प्रक्रिया में भाग नहीं लेगें।
बीच-बीच मे अफवाहें भी गर्म हो जाती रही कि जेट एयरवेज में मुंबई अंडरवर्ल्ड व कुछेक कथित राजनैतिक हस्तियों की इसमें पीछे से निवेश भी है किन्तु इन अफवाहों ने कभी सत्य का रूप नही ले पाया।
19 साल की उम्र में छोड़ा घर♀
साल 1967 में पिता की मौत के बाद नरेश गोयल के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।उस समय में नरेश गोयल की उम्र 19 वर्ष थी।गोयल ने पटियाला में परिवार को छोड़कर दिल्ली आने का फैसला किया।दिल्‍ली में गोयल ने रिश्‍तेदार की एक ट्रैवल एजेंसी ज्‍वाइन कर ली।इस नौकरी से उन्हें हर महीने करीब 300 रुपये मिल रहे थे।
ट्रैवल इंडस्ट्री को बनाया अपने सपनों की उड़ान का रास्ता
कॉमर्स में पढ़ाई करने वाले गोयल ने ट्रैवल इंडस्ट्री में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।ट्रैवल इंडस्ट्री में काम के दौरान गोयल की मित्रता विदेशी एयरलाइन कंपनियों में काम करने वाले कुछ लोगों से हुई।इसी दौरान गोयल ने एविएशन सेक्टर में कारोबार की बारीकियां को पूरी तरह से समझा।1973 में गोयल ने खुद की ट्रैवल एजेंसी खोलने का निर्णय लिया।गोयल ने ट्रैवल एजेंसी को नाम जेट एयर रखा। करीब 20 साल बाद नरेश गोयल ने 1993 में जेट की शुरुआत की। बता दें कि जेट का उद्घाटन जेआरडी टाटा ने किया था। 2002 में जेट एयरवेज को देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन कंपनी बनने का मौका मिला।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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