लेखक -मुनेश त्यागी
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी लूला डी सिल्वा, प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लेविया बोलसोनारो को हराकर, चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बन गए हैं। ब्राजील में वामपंथी नीतियों के शासन की शानदार और जन कल्याणकारी वामपंथी कामयाबियों से, राष्ट्रपति लूला ने जीत हासिल की है। इस जीत से खुश होकर ब्राजील के करोड़ों वामपंथी किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और खेतीहर मजदूर, ब्राजील की सड़कों पर खुशियां मना रहे हैं। इस शानदार और जरूरी जीत का जश्न, वामपंथी समाजवादी कार्यक्रम और नीतियों को जमीन पर उतार कर मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति लूला फिलिस्तीन की पीड़ित महिलाओं, बच्चों और जनता के बहुत बड़े हिम्मती रहें हैं। वे इजरायिली राष्ट्रपति और सरकार की नीतियों की कटु आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्धोन्मादी, वैश्विक प्रभुत्वकरी और आतंकवादी नीतियों और जालशाजियों का खुलकर जोरदार विरोध किया है और ट्रंप की नीतियों से, अपने को अलग रखा है। ब्राजील के चुनाव में राष्ट्रपति लूला की जीत वहां की संघर्षशील जनता की जीत है। ब्राजील की प्रगतिशील, वामपंथी और जनवादी ताकतों के लगातार संघर्षों ने, राष्ट्रपति लूला की इस महान जीत को संभव बनाया है। इस बहुत ही महत्वपूर्ण जीत ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि नफरत, बंटवारे, शोषणकारी और अन्यायी राजनीति और सरकार को, एकजुट जनता के संघर्ष से ही हटाया और हराया जा सकता है। आज पूरी दुनिया देख रही है कि वर्तमान में जो ताकतें जनता के अधिकारों, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए लड़ रही हैं, उनके लिए यह जीत आशा की बहुत बड़ी किरण है। यह जीत ब्राजील की जनता के उन संघर्षशील छात्रों, नौजवानों, किसानों और मजदूरों को और भी ज्यादा जोश से भरेगी, जो जनता के जनतंत्र को बचाने के लिए, वर्षों से जीवन मरण की लड़ाई लड़ रहे हैं। राष्ट्रपति लूला की इस जीत से पूरी दुनिया की वामपंथी समाजवादी ताकतों को, अपने संघर्षों को कामयाब बनाने के लिए, सड़कों पर उतरने की पूरी आशा और विश्वास हासिल होगा। यह जीत दुनिया की तमाम वामपंथी ताकतों को अपनी कमियों को दूर करने के लिए प्रेरित करेगा और गलतियां करने से बचाएगा, अनजाने में हुई गलतियों को सुधारने के लिए प्रेरित करेगा और उन्हें शोषण और अन्याय की व्यवस्था का खात्मा करने के लिए सड़कों पर और संघर्षों के मार्ग पर उतरने को प्रोत्साहित और मजबूत भी करेगा। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने महान त्यागी, बलिदानी और क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो की क्रांतिकारी मुहिम से सीख कर और उसे ताकत देकर, आगे बढ़ाया है। राष्ट्रपति लूला का लड़ाकू स्वभाव देखिए,,, जीत के बाद ब्राजील की जनता का आभार जताते हुए उन्होंने कहा है कि,,,, “या तो मातृभूमि आजाद रहेगी या हम ब्राजील के लिए मर मिटेंगे।” राष्ट्रपति लूला अपने शुरुआती दिनों में कारखाने में मजदूर थे, जहां वे मजदूर यूनियन में शामिल हुए। वे शोषणकारी मालिकों द्वारा मजदूरों के शोषण और अन्याय से पूर्ण परिचित हैं। उन्होंने मजदूरों के साथ हो रहे शोषण, जुल्मो-सितम और अन्याय को अपनी आंखों से देखा और भुगता है, इसलिए उन्होंने अपनी सरकार की मजदूर समर्थक नीतियों की लागू करके, मजदूरों की तमाम शोषणकारी अन्यायी नीतियों का खात्मा कर दिया, भूमिहीन मजदूरों को भूमि का मालिक बना दिया, सबके लिए मुफ्त शिक्षा की नीतियों को धरती पर उतारा और ब्राजील के प्राकृतिक संसाधनों को, देशी विदेशी शोषणकारी पूंजीपतियों की लूट और बर्बादी से बचाया। राष्ट्रपति लूला की यह जीत, दुनिया के तमाम शोषणकारी, अन्यायी, आतंकवादी, प्रभुत्वकारी और युध्दोन्मादी पूंजीपतियों की करारी हार है और मेहनतकशों की सरकार की वामपंथी समाजवादी नीतियों की सबसे बड़ी जीत है। राष्ट्रपति लूला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुखर आलोचक और विरोधी रहे हैं। ट्रंप अपने समर्थक दक्षिणपंथी फ्लोविया बोल्सोनारो को जीतना चाहते थे, मगर लूला की जनकल्याणकारी नीतियों की व्यवस्था और जनसमर्थन ने, उन्हें धराशाई कर दिया। ब्राजील की संघर्षशील जनता ने वहां पर वाम-विचारों को विजयी बनाया है। राष्ट्रपति लूला की इस महान जीत से दुनिया के वामपंथी विचारों के लोकतांत्रिक समर्थकों को, बहुत बड़ी ताकत हासिल हुई है। राष्ट्रपति लूला सत्ता या विपक्ष में हमेशा ब्राजील में सत्ता की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। वे अपनी जनसमर्थक राजनीति के दम पर, अपनी वर्कर्स पार्टी के झंडे तले, ब्राजील में चौथी बार राष्ट्रपति का चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं। “ब्रिक्स” संगठन में ब्राजील की सक्रियता, हमेशा ही अमेरिका की नजरों में खटकती रही हैं। इस सब को झेलते हुए, राष्ट्रपति लूला अपनी वामपंथी राजनीति की विचारधारा के साथ अडिग रहे। लूला हमेशा अमेरिका की एकाधिकारवादी और वर्चस्ववादी नीतियों के विरोधी रहे हैं। राष्ट्रपति लूला की इस जीत के मुख्य कारण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को जमीन देना, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार की नीतियां रही हैं। उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था को छात्रों के लिए फीस से मुक्त किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाएं। स्कूलों में बच्चों को मुक्त शिक्षा के साथ-साथ, खाना भी दिया। ब्राजील की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया, नए सरकारी अस्पताल बनाएं और स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट को लगातार बढ़ाते रहे। इन्हीं सब जनकल्याणकारी नीतियों को धरती पर उतारने की वजह से, राष्ट्रपति लूला चौथी बार, ब्राजील के राष्ट्रपति बनने में कामयाब हुए हैं। राष्ट्रपति लूला की यह चौथी जीत, ब्राजील के मेहनतकशों की सबसे बड़ी जीत है। आओ, हम सब दुनिया के सारे मेहनतकश, राष्ट्रपति लूला की जनसमर्थक क्रांतिकारी नीतियों और ब्राजील की संघर्षकारी जनता से सीख कर, शिक्षित, एकजुट और संघर्षशील होकर, जनकल्याण की क्रांतिकारी मशाल को और रोशन करें और देश दुनिया में आगे बढ़ाएं।

(लेखक वामपंथी विचारक हैं)



