*शब्दांजलि -उपेंद्र सिंह राठौड़
वक्त भी बड़े कमाल का होता है…सबसे इंतजार करवा लेता है,लेकिन…खुद कभी किसी का इंतजार नहीं करता…!जीवन की इस कड़वी सच्चाई का आज एक बार फिर अत्यंत पीड़ादायक अहसास हुआ।हम सभी के लिए यह अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक समाचार है कि हमारे प्रिय साथी, सहज, सरल एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी श्री प्रवीण भाई बोथरा, बाड़मेर (आईएफडब्ल्यूजे अजमेर संभाग प्रभारी) अब हमारे बीच नहीं रहे।विश्वास ही नहीं हो रहा कि कल देर शाम जिस साथी से संगठन के स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर बातचीत हुई, जिन्होंने रात्रि आठ बजे ज़ूम मीटिंग की सूचना दी, वही साथी आज हमारे बीच नहीं हैं।रात्रि आठ बजे ही जानकारी मिली कि कार्यालय में बैठे-बैठे अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और परिजन उन्हें अस्पताल लेकर गए हैं। इसके बाद उनके पुत्र एवं बड़े भाई से दो बार बातचीत भी हुई। मन में यही विश्वास था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा और प्रवीण भाई पुनः हमारे बीच होंगे।*लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था…।*किसने सोचा था कि संगठन के स्थापना दिवस पर साथियों के साथ खड़े होने की तैयारियों के बीच प्रवीण भाई इस तरह हम सभी को हमेशा के लिए छोड़कर चले जाएंगे।उनका असमय चले जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे आईएफडब्ल्यूजे परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।आज शब्द कम पड़ रहे हैं और मन बार-बार यही सवाल कर रहा है कि *जिस साथी के साथ कल तक आने वाले कल की योजनाएं बना रहे थे, वह आज अचानक स्मृतियों का हिस्सा कैसे बन गया?ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।दुःख की इस घड़ी में सम्पूर्ण आईएफडब्ल्यूजे परिवार उनके परिजनों के साथ पूरी संवेदना एवं आत्मीयता से खड़ा है।प्रवीण भाई, आपका सहज स्वभाव, आत्मीय व्यवहार और साथियों के प्रति अपनापन सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा।**विनम्र श्रद्धांजलि।* 💐




