मस्जिदों को कट्टरपंथी गतिविधियों व नफ़रत फैलाने के केन्द्र न बनने दे=राष्ट्रपति

मस्जिदों को कट्टरपंथी गतिविधियों व नफ़रत फैलाने के केन्द्र न बनने दे=राष्ट्रपति

★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
[मस्जिदों में दी जा रही तकरीरों की कॉपी जमा करना होगा सरकार के पास=मैत्रीपाला]
{21 अप्रैल को श्रीलंका में आईएस आतंकी संगठन ने बम विस्फोटों के जरिये 258 लोगो की ली थी जान}
[श्रीलंका में पहले से ही बुर्के व चेहरे ढँकने पर लगे है प्रतिबंध, अब सरकार ने कहा कि वह किसी भी सूरत में नही पनपने देगें कट्टरपंथी]
( ईस्टर सन्डे पर सीरियल ब्लास्ट के बाद से देशभर में 10 हजार सैनिक जुटे है आतंकी ठिकानों पर छापेमारी कर कट्टरपंथियों को समाप्त करने के अभियान में)
{श्रीलंका में इस्लामी कट्टरपंथी ताकतों को ख़त्म करने में लगी है श्रीलंकाई सरकार,प्रेसिडेंट कर रहे आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग}

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♂÷श्रीलंका में पिछले महीने हुए सीरियल धमाकों के बाद सरकार देश की सुरक्षा व्यवस्था व मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है व कट्टरपंथी ताकतों व उनके समर्थकों को नेस्तनाबूद करने में जुटी हुई है। इसी क्रम में श्रीलंकाई सरकार ने शुक्रवार को दिए गए नए आदेश में कहा कि देश में मौजूद सभी मस्जिदों में जो तकरीरें सुनाए जाते हैं, उनकी एक कॉपी जमा कराना जरूरी है।
बताया जा रहा है कि दुर्दांत आतंकी संगठन आईएस के द्वारा गत 21 अप्रैल को बमविस्फोट में मारे गए 258 निरपराध लोगो की मौत की जिम्मेदारी लेते ही श्रीलंकाई सरकार ने तेज़ी के साथ देश मे मस्ज़िद, मदरसों के साथ ही अन्य उस सभी स्रोतों पर तगड़े प्रहार कर क़मर तोड़ने में लग गयी है जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा,एकता अखण्डता पर चोट पहुँच रही थी।
हमलोंकी जिम्मेदारी लेने के बाद से ही श्रीलंका में इस्लामी कट्टरपंथ खत्म करने के लिए ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं।
श्रीलंका के धर्म और सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि मस्जिदों का इस्तेमाल कट्टरपंथी विचार फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए। ऐसे में देश की स्थिति को देखते हुए सभी मस्जिदों के ट्रस्टियों को निर्देश दिए जाते हैं कि वह मस्जिद को कट्टरपंथी गतिविधि या नफरत फैलाने का केंद्र न बनने दें और श्रीलंका में पहले ही देश भर में चेहरा ढंकने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

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राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने 29 अप्रैल को आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए चेहरा ढंकने को प्रतिबंधित कर दिया था।
राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के मुताबिक प्रतिबंध का ताल्लुक देश की सुरक्षा से है,व्यक्ति का चेहरा ढंका होने से उसकी पहचान में मुश्किल होती है।
श्रीलंका में सीरियल ब्लास्ट के बाद से ही करीब 10 हजार सैनिक आतंकी ठिकानों की छापेमारी में जुटे थे व कट्टरपंथियों को देश मे समाप्त करने में श्रीलंका तेजी से जुटा हुआ है।। श्रीलंकाई पुलिस और सेना ने कहा था कि अब देश पूरी तरह सुरक्षित है। ईस्टर संडे पर हुए सिलसिलेवार धमाकों में शामिल आतंकी या तो गिरफ्तार किए जा चुके हैं या फिर उनकी मौत हो चुकी है।
विदित हो कि 21 अप्रैल को आतंकियों ने तीन चर्चों, होटलों और दो स्थानों को निशाना बनाते हुए भयानक बमविस्फोट कर दिया था जिसमे 258 लोग मारे गए थे।
इसके बाद से ही श्रीलंका ने एक बार फिर बेहद कठोर कदम उठा कट्टरपंथी ताकतों को नेस्तनाबूद करना शुरू कर दिया।

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