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★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{रतन टाटा व नुस्ली वाडिया मानहानि मामले में चीफ़ जस्टिस एस. अरविंद बोबड़े ने कहा आप लोग टॉप इंडस्ट्री लीडर है,जम कोई टिप्पणी नही करना चाहते क्या आज के समय आपको ऐसे मुकदमेबाजी की जरूरत है}
[नुस्ली वाडिया ने स्वतंत्र निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद 2016 में रतन टाटा व अन्य के खिलाफ मानहानि का केस कर मांगी है 3000 करोड़ की धनराशि]

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♂÷रतन टाटा और नुस्ली वाडिया मानहानि मामले में CJI जस्ट‍िस एस. अरविंद बोबडे ने कहा कि दोनों इंडस्ट्री के दिग्गज लीडर हैं और उन्हें इस मसले को बातचीत कर सुलझा लेना चाहिए।इस केस में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई,इस मामले में अब अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
नुस्ली वाडिया ने स्वतंत्र निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद रतन टाटा के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कराया था।वाडिया टाटा मोटर्स, टाटा स्‍टील और टाटा केमिकल्‍स के बोर्ड्स में इंडिपेंडेंट डायरेक्‍टर थे। 2016 में नुस्ली वाडिया ने रतन टाटा और अन्य के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कराया था।
वाडिया ने इस मामले में 3,000 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है, जुलाई 2019 ने बॉम्बे हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना को रदद् कर दिया था।
बॉम्बे हाइकोर्ट के फैसले को नुस्ली वाडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान नुस्ली वाडिया के वकील ने कहा कि उनका केस कंपनी के खिलाफ नहीं बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने मेरे क्लाइंट बारे में तमाम आरोप लगाकर एक विशेष प्रस्ताव सर्कुलेट किया और उसे मीडिया तक पहुंचाया।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, ‘आप दोनों वरिष्ठ इंडस्ट्री लीडर हो, क्या आप एक-दूसरे से बात कर मसला सुलझा नहीं सकते? हम कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्या आज के समय आपको ऐसे मुकदमेबाजी की जरूरत है, यदि आप मामले को खुद निपटा लें।
रतन टाटा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘कोर्ट इस बात को दर्ज कर सकता है कि हमारे क्लाइंट का किसी को मानहानि करने का कोई इरादा नहीं था,जो प्रस्ताव सर्कुलेट किया गया वह एक वैधानिक जरूरत थी।
इस पर CJI ने कहा, ‘हमने यह देखा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफतौर पर यह माना है कि इसमें मानहानि का कोई इरादा नहीं है, डॉ. सिंघवी भी कह रहे हैं कि मानहानि का कोई इरादा नहीं है और जो प्रस्ताव सर्कुलेट किया गया वह एक वैधानिक जरूरत थी।
नुस्ली वाडिया भी पारसी हैं और रतन टाटा बचपन के दोस्त हैं, वाडिया एक समय टाटा समूह के प्रमुख लोगों में शामिल थे।50 साल तक टाटा ग्रुप का नेतृत्व करने वाले जेआरडी टाटा को वाडिया अपना गुरु और मार्गदर्शक मानते थे. मीडिया के अनुसार, जेआरडी टाटा के बाद वाडिया टाटा ग्रुप के चेयरमैन बनने की दौड़ में सबसे आगे थे, लेकिन रतन टाटा के पक्ष में फैसला लेते हुए पीछे हट गए थे।
नुस्ली वाडिया स्पष्ट बोलने के लिए जाने जाते हैं रतन टाटा और उनके बीच दूरियां 2007 में शुरू हुई थीं. वाडिया टाटा स्टील द्वारा कोरस स्टील के अधिग्रहण से नाखुश थे।टाटा स्टील ने 12 अरब डॉलर में यूरोप की कोरस स्टील को खरीदा था। इसके बाद वाडिया ने घाटे के टाटा नैनो प्रोजेक्ट में निवेश का विरोध भी किया था,साइरस मिस्त्री को हटाने के मामले में टाटा से उनके मतभेद खुलकर सामने आ गए थे।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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