★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा ने कहा कि जरूरत पड़ी तो क़ानून दोबारा बन सकता है}
[उन्नाव के बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि बिल तो बनते रहते हैं, बिगड़ते रहते हैं, वापस आ जाएंगे दोबारा आ जाएंगे कोई देर नही लगती]
(बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट कृषि बिल को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर सकती है)
♂÷प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद सम्भावना जताई जा रही है कि बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट इस बिल को वापस लेने की कार्रवाई कर सकती है तो वहीं राज्यपाल कलराज मिश्रा व बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि बिल किसानों के हित में था व इसे बिल तो बनते रहते हैं।
पीएम मोदी की विवादास्पद कृषि बिल की वापसी की घोषणा के कुछ दिनों बाद ही उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि जरूरत पड़ने पर कानूनों को फिर से लाया जा सकता है.
उत्तरप्रदेश के उन्नाव में मीडिया से बात करते हुए साक्षी महाराज ने कहा, ‘बिल तो बनते रहते हैं, बिगड़ते रहते हैं. वापस आ जाएंगे, दोबारा बन जाएंगे. कोई देर नहीं लगती है.’
महाराज ने कहा, ‘मैं मोदी जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाया और कानूनों के ऊपर राष्ट्र को चुना. जिनके इरादे गलत थे और जिन्होंने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए, उन्हें करारा जवाब मिला है.’ उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 और कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बीच कोई संबंध नहीं है.
बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी (403 सदस्यीय सीट) 300 से ज्यादा सीटें जीतेगी. उन्होंने कहा, ‘भारत में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोई रिप्लेसमेंट नहीं है.’
वहीं, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कानून दोबारा बन सकता है. मिश्र ने कहा, ‘केंद्र सरकार का निर्णय सराहनीय है. कृषि कानून किसानों के हित में था.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार ने किसानों को समझाने की लगातार कोशिश की. फिर भी किसान आंदोलनरत थे और अड़े थे कि कानून वापस लिया जाए. अंत में सरकार को यह लगा कि कानून वापस ले लिया जाए. फिर आगे इस संबंध में कानून बनाने की जरूरत पड़ी तो दोबारा बनाया जाएगा. फिलहाल इसे वापस लिया जा रहा है.’
तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान दिल्ली के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में करीब एक साल से प्रदर्शन कर रहे थे. इसकी शुरुआत दिल्ली और हरियाणा के बीच सिंघू सीमा पर प्रदर्शन से हुई थी. वहां से यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्थित गाजीपुर सीमा और अन्य जगहों तक फैल गया था.






















