★मुकेश शर्मा★
★भोपाल★
{अवैध रेत एवं गिट्टी परिवहन को संरक्षण दे रहे हैं मौ थाना प्रभारी, माफियाओं के इशारे पर पत्रकारों के खिलाफ भी करते हैं मामले दर्ज}
♂÷भिंड ज़िले के मौ थाना क्षेत्र में बैठे थाना प्रभारी शिवसिंह यादव रेत माफिया और भू माफिया के इशारे पर काम करते हुए किसी के भी खिलाफ मामला दर्ज करने से नहीं चूकते हैं चर्चा है कि इसके एवज में शिवसिंह यादव को माफियाओं द्वारा मोटी रकम दी जाती है । रेत गिट्टी का अवैध परिवहन करने वाले माफियाओं के इशारे पर मौ थाना प्रभारी किसी भी फरियादी को अपराधी बनाने में देर नहीं करते । चाटुकारिता और दलाली की पराकाष्ठा को पार कर तलवे चाटने वाली प्रथा यहां बतौर उदाहरण देखने को मिलती है । थाना प्रभारियों द्वारा मजलूम मासूमों को फंसाकर किस प्रकार उन पर अपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि मध्यप्रदेश शासन में बैठे दर्जनों थाना प्रभारी इस श्रेणी में आ चुके हैं।इनके खिलाफ शासन के कानून मुख्यालय तक शिकायतों के पुलिंदे पहुंच चुके हैं लेकिन शीर्ष पदों पर बैठे आला अफसरों के साथ लेनदेन कर मामले रफा-दफा हो जाते हैं, किसी भी प्रकार की कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया जाता है। इन हालात में आम इंसान को इंसाफ कैसे मिलेगा क्या ऐसे थाना प्रभारियों एवं शीर्ष पदों पर बैठे अफसरों से न्याय की उम्मीद की जा सकती है यह बड़ा प्रश्न आमजनमानस के दिलोदिमाग को मथ रहा है।
उल्लेखनीय है कि मौ थाना क्षेत्र में खेरिया और अमायन मोड़ के बीच में अवैध रेत खनन एवं परिवहन को लेकर लंबे समय से ना केवल खबरें प्रकाशित की जा रही हैं बल्कि रेत माफिया पुलिस प्रशासन के गठजोड़ की शिकायतें भी शासन स्तर तक पहुंच चुकी हैं । अवैध वसूली प्राइवेट अपराधी किस्म के लोगो द्वारा करा रहे हैं। मौ थाना प्रभारी शिवसिंह यादव के संरक्षण में सुरेंद्र यादव एवं सोनू यादव मघन के द्वारा की जारही अवैध बसूली शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक की जा चुकी हैं । लेकिन इन पर कोई कार्य वाही नही हुई। थाना प्रभारी ने आते ही अपना संरक्षण दे दिया है । और धड्डले से रेत के अवैध खनन एवं परिवहन का कारोबार चल रहा है । इस कोराना काल में भी बसूली कारोबार प्रतिदिन संचालित हो रहा है जिसकी शिकायत किए जाने पर फरियादी को ही अपराधी बनाने की कोशिश की जा रही है । प्राप्त जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार उन्मूलन संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने रेत माफियाओं को लेकर दर्जनों शिकायतें ना केवल भिंड पुलिस अधीक्षक से की हैं बल्कि भोपाल में डीजीपी को जाकर स्वयं आवेदन प्रस्तुत कर प्रमाण प्रस्तुत करने का हवाला भी दे चुके हैं,बावजूद इसके मौ थाना प्रभारी अपनी हिटलर शाही को दिखाते मंदिर की जमीन एवं शासकीय हैंडपंप पर अवैध कब्जा करने की कोशिश करने वाले अपराधी शिवनारायण द्वारा द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा के खिलाफ अपराध दर्ज कर दवाब बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां आपको बतादें कि भू माफिया जिस मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहरहा है मुकेश शर्मा उस मंदिर के ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और थाना प्रभारी ने इस बात की जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई सूत्रों का कहना कि मामले में थाना प्रभारी ने मोटी रकम खाई है? थाना प्रभारी को यह संज्ञान होना जरूरी है कि किसी भी वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ सीधा अपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाता । मध्यप्रदेश शासन पत्रकार सुरक्षा अधिनियम 2010 के अनुसार किसी भी पत्रकार पर मामला दर्ज होने से पहले वरिष्ठ कानूनी अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जा कर जनसंपर्क विभाग को उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है उसके बाद जनसंपर्क विभाग बोर्ड की कमेटी उक्त पत्रकार पर मामला दर्ज करने का निर्णय लेती है एवं संबंधित पुलिस अधीक्षक को आदेश करती है लेकिन यहां हिटलर थाना प्रभारी ने बिना जानकारी के एवं बिना जांच के मामला दर्ज कैसे कर दिया और किसके इशारे पर यह बड़ा सवाल है।
भू माफिया को संरक्षण देने वाले तथाकथित थाना प्रभारी के खिलाफ फरियादी वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन भेज दिया है। अब देखना यह है कि मौ थाना प्रभारी के विरुद्ध वरिष्ठ अधिकारी कार्यवाही करते हैं या पूर्व में किए गए समझौतों की तरह मोटी रकम का लेनदेन कर मामले को रफा दफा कर देंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।






















