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★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{विवादित अभिनेता दीप सिद्धू ने दी सफ़ाई की झंडा फ़हराते वक्त तिरँगा नही हटाया गया,निशान साहिब का झंडा फहराना विरोध का एक तरीका था}
[सिद्धू को देशविरोधी अभियान Sikhs For Justice(SFJ) से जुड़े रहने को लेकर एक हफ़्ते पूर्व जाँच एजेंसी NIA ने भेजा है पूछताछ के लिए समन]
(अभिनेता सनी देओल के बीजेपी के टिकट पर 2019 में गुरुदासपुर सीट से चुनाव लड़ने पर थे सहयोगी, सांसद सनी देओल ने बयान में कहा कि सिद्धू से नही कोई वास्ता)
[किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे योगेंद्र यादव ने कहा हमने सिद्धू को शुरू से ही अपने प्रदर्शन से दूर कर दिया था तो कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया अराजकता का स्वीकार नही कर सकते]
♂÷सिख फ़ॉर जस्टिस(SFJ) से जुड़ाव को लेकर NIA द्वारा पहले ही समन किये जाने को लेकर विवाद में आये पंजाबी फ़िल्म अभिनेता दीप सिद्धू के द्वारा बढ़ चढ़ कर किसान आंदोलन में अपने योगदान व गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव में लोगों को उकसाने व लालक़िले पर उपद्रवियों द्वारा झंडा फहराने के दौरान हुए वीडियो वायरल में उनकी भूमिका अराजक दिखने पर अभिनेता के ऊपर सरकारी एजेंसियों ने जाँच के घेरे में ले लिया है।

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उधर जहाँ विवादास्पद गतिविधियों के चलते लोगों के निशाने पर आए दीप सिद्धू ने अपना बचाव करते हुए कहा कि हमने तिरंगे को नही हटाया था,हा हम उस समय वहाँ मौजूद थे।लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने के आरोपों के बाद पंजाबी एक्‍टर दीप सिद्धू ने स्‍वीकार की ये बात।
पंजाबी एक्‍टर दीप सिद्धू पर आरोप है कि उन्‍होंने किसानों को लाल किले की तरफ मार्च करने के लिए उकसाया।
Sikhs For Justice (SFJ) के साथ कनेक्‍शन को लेकर एनआईए (NIA) ने पिछले हफ़्ते ही उनको समन भेजा था।
कल 26 जनवरी को  किसानों की ट्रैक्‍टर परेड के दौरान लाल किले पर एक धार्मिक झंडा फहराया गया जिसके बाद किसानों आंदोलन को लेकर हर तरफ से सवाल उठने लगे हैं। इसी मामले को लेकर पंजाबी फिल्‍मों के एक्‍टर दीप सिद्धू का भी भारी विरोध हो रहा है।उन पर आरोप लगे कि जब लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया गया, तब वो वहां मौजूद थे और उन्‍होंने लोगों का साथ दिया।
हर तरफ से घिरे दीप सिद्धू  ने भी अब ये स्‍वीकार किया है कि जब लाल किले पर ‘निशान साहिब’ का झंडा फहराया गया, तब वो वहां मौजूद थे।
अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दीप सिद्धू ने इस बात को स्‍वीकार किया कि झंडा फहराते वक्‍त वह वहां पर थे।

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हालांकि उन्‍होंने ये कहकर अपना बचाव भी किया कि उन्‍होंने या उनके समर्थकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे झंडे को वहां से हटाया नहीं था। सिद्धू ने कहा कि ‘निशान साहिब’ का झंडा फहराना विरोध का एक सांकेतिक तरीका था।
बता दें कि ‘निशान साहिब’ सिख धर्म का प्रतीक है और इस झंडे को सभी गुरुद्वारा परिसरों में लगाया जाता है।
दीप सिद्धू पर आरोप है कि उन्‍होंने किसानों को लाल किले की तरफ मार्च करने के लिए उकसाया, लेकिन गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर प्रदर्शनकारियों द्वारा धार्मिक झंडा फहराये जाने की घटना के दौरान मौजूद रहे। अभिनेता दीप सिद्धू ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों के कृत्य का यह कह कर बचाव किया कि उन लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज नहीं हटाया और केवल एक प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर ‘निशान साहिब’ को लगाया था।
सिद्धू ने फेसबुक पर पोस्ट किये गए एक वीडियो में दावा किया कि वह कोई योजनाबद्ध कदम नहीं था और उन्हें कोई साम्प्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए जैसा कट्टरपंथियों द्वारा किया जा रहा है।
सिद्धू ने कहा, ‘नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए, हमने ‘निशान साहिब’ और किसान झंडा लगाया और साथ ही किसान मजदूर एकता का नारा भी लगाया। ’ उन्होंने ‘निशान साहिब’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि झंडा देश की ‘विविधता में एकता’ का प्रतिनिधित्व करता है।उन्होंने कहा कि लालकिले पर ध्वज-स्तंभ से राष्ट्रीय ध्वज नहीं हटाया गया और किसी ने भी देश की एकता और अखंडता पर सवाल नहीं उठाया।
विभिन्न दलों के नेताओं ने लाल किले पर हिंसा की घटना की निंदा की है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने घटना का एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया कि वह शुरुआत से ही किसान प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं लेकिन अराजकता स्वीकार नहीं कर सकते।
पिछले कई महीनों से किसान आंदोलन से जुड़े सिद्धू ने कहा कि जब लोगों के वास्तविक अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है तो इस तरह के एक जन आंदोलन में ‘गुस्सा भड़क उठता है’। उन्होंने कहा, ‘आज की स्थिति में, वह गुस्सा भड़क गया।
सिद्धू, सांसद अभिनेता सनी देओल के सहयोगी थे जब देओल ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ा था।भाजपा सांसद सनी देओल ने पिछले साल दिसंबर में किसानों के आंदोलन में शामिल होने के बाद सिद्धू से दूरी बना ली थी।अब सिद्धू मामले पर बयान दिया है कि उनसे कोई वास्ता नही है।
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं में से एक एवं स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि ‘‘हमने सिद्धू को शुरू से ही अपने प्रदर्शन से दूर कर दिया था।’’

By Mukesh Seth

Chief Editor

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