★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{ममता बनर्जी ने बीते साल छठ पूजा पर दो दिवसीय राजकीय अवकाश कर की थी लुभाने की कोशिश,तो बीजेपी अपने हिंदी भाषी पार्टी होने का उठाना चाहती है लाभ}
[चुनावी प्रचार में मन्त्री द्वय राजनाथ सिंह-स्मृति ईरानी को उतारकर लगभग एक करोड़ प्रवासियों के दिलों में उतरना चाहती है बीजेपी]
(राजनीतिक समीक्षक सुबीर भौमिक कहते हैं कि बीजेपी ने 2019 के लोकसभा के चुनाव में ही हिंदीभाषियों पर बना ली थी पकड़,बनर्जी यह उम्मीद नहीं कर सकती कि हिंदी भाषी उनके लिए करेगा मतदान)
♂÷पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव आधा ही बचा है, लेकिन राजनीतिक दल लोगों तक अपनी पहुंच कम नहीं होने देना चाहते। वे लगातार राज्य में अलग-अलग समुदायों से संपर्क कर रहे हैं।
ऐसा ही एक समुदाय प्रवासियों का भी है, ये वो लोग हैं, जो काम या कारोबार की तलाश में कभी पश्चिम बंगाल आए थे और यहीं बस गए। राज्य में ऐसे प्रवासियों की संख्या एक करोड़ से कुछ कम है ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने इन लोगों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है।
हाल ही में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि हिंदी भाषी फैक्ट अहम है और ये बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं।कहा जाता है कि बीजेपी को कभी हिंदी बेल्ट की पार्टी कहा जाता था लेकिन अब इसे प्रवासी मतों से फायदा मिल सकता है, एक ओर टीएमसी लगातार बीजेपी को ‘बाहरी लोगों की’ पार्टी बता रही है। हालांकि, बीजेपी ने टीएमसी के इस दावे को नकारा है कि और कहा है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो ‘मिट्टी का सपूत’ ही मुख्यमंत्री बनेगा।
बड़ी सँख्या में प्रवासी दोनों दलों की बातों को सुन रहे हैं और शायद उन्होंने किसी एक पक्ष को चुन भी लिया है,यह वर्ग चुनाव के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इस धारणा के मुताबिक, हिंदी भाषी लोग बीजेपी के साथ जाएंगे। राज्य की सीएम ने खुद इस पर काम किया, बीते साल उन्होंने छठ पूजा पर 2 दिनों के राजकीय अवकाश की घोषणा की।उन्होंने तब कहा था ‘क्या किसी ने भी कभी यह किया है? किसी ने मुझसे नहीं किया, लेकिन मैंने किया, मैं यह भी चाहती हूं कि राज्य में क्षेत्रीय भाषाओं के अस्पताल आएं।’
बीजेपी भी इस वर्ग को लेकर शांत नहीं है केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा लगातार प्रवासियों तक पहुंचकर बता रहे हैं कि वे ‘बाहरी’ नहीं हैं। वे बता रहे हैं कि उन्होंने बंगाल की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है। पार्टी ने राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी जैसे केंद्रीय मंत्रियों को लोगों तक पहु्ंचने के लिए चुना है।
समीक्षक सुबीर भौमिक कहते हैं ‘बीजेपी ने पहले ही 2019 लोकसभा चुनाव में हिंदी भाषियों पर पकड़ बना ली थी और यह इस चुनाव में नहीं बदलेगा, वे (बनर्जी) यह उम्मीद नहीं कर सकती कि हिंदी भाषी उनके लिए मतदान करें।’
हालांकि, 2019 लोकसभा चुनाव के बाद और बीते साल भी बनर्जी ने हिंदी भाषी मतदाताओं के साथ मीटिंग की थी उस समय कहा जा रहा था कि पार्टी ने इस वर्ग के बड़े हिस्से में विश्वास खो दिया है। उस दौरान उन्होंने कसम खाई थी कि वे उन्हें घर जैसा एहसास दिलाने के लिए सभी प्रयास करेंगी हालांकि, कई लोग इस बात से सहमत नहीं हो पाए थे। 294 सीटों वाले राज्य में आठ चरणों में मतदान प्रक्रिया पूरी होगी और 2 मई को मतगणना होनी है।






















