★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बीजेपी को अपने नेताओं की बयानबाज़ी पर लगानी चाहिए रोक}
[एक्स सीएम व सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का दिल नही है साफ़ वह यूपी 2022 विधानसभा चुनावों के बाद फिर से लाएगी विधेयक]
(काँग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बजरिये ट्वीट कर कहा कि बीजेपी नेताओं के”चुनाव बाद कृषि क़ानूनो को वापस लाने” वाले बयान किसानों की आशंकाओं को ठहराते हैं सही)
♂÷प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जहाँ कृषि कानून को वापस लेने व कैबिनेट मीटिंग में भी कल बिल वापसी की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है तो वहीं बीजेपी के कुछ नेताओं के बयानों ने विपक्षी दलों को हमला करने का मौका दे दिया है।
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भाजपा नेताओं पर भड़क उठी हैं. मायावती ने कहा कि बीजेपी को अपने नेताओं की बयानबाजी पर लगाम लगानी चाहिए. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के कथित भड़काऊ बयानों पर रोक लगे.
बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लगभग एक वर्ष से आन्दोलनरत किसानों की तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग स्वीकार किये जाने के साथ-साथ उनकी कुछ अन्य जायज मांगों का भी सामयिक समाधान जरूरी है ताकि वे संतुष्ट होकर अपने-अपने घरों को लौटकर अपने कार्यों में फिर से पूरी तरह जुट सकें.’
मायावती ने ट्वीट में कहा, ‘‘साथ ही, कृषि कानूनों की वापसी की केन्द्र सरकार की खास घोषणा के प्रति किसानों में विश्वास पैदा करने के लिए जरूरी है कि भाजपा के नेताओं की बयानबाजी पर लगाम लगे जो प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद अपने भड़काऊ बयानों आदि से लोगों में संदेह पैदा करके माहौल को खराब कर रहे हैं.’
कल उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज ने पत्रकारों से कहा था, ‘‘विधेयक तो बनते-बिगड़ते रहते हैं, फिर वापस आ जाएंगे, दोबारा बन जाएंगे, कोई देर नहीं लगती.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं मोदी जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाया और विधेयक के बजाय राष्ट्र को चुना. जिनके इरादे गलत थे, जिन्होंने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए, उन्हें करारा जवाब मिला है.’’
ऐसे बयानों को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी सत्तारूढ़ भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए थे. सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा का दिल साफ नहीं है और वह उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद इस संबंध में फिर से विधेयक लाएगी. कांग्रेस ने भी भाजपा नेताओं के बयान का हवाला देकर कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान को छलावा करार दिया.
कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाद्रा ने एक ट्वीट में कहा था, ‘‘भाजपा नेताओं के ‘चुनाव बाद कृषि कानूनों को वापस लाने’ वाले बयान किसानों की आशंकाओं को सही ठहराते हैं. भाजपा ने भूमि अधिग्रहण कानून के मामले में भी यही छल किया था.’ उन्होंने कहा, ‘‘किसानों को चुनावों के समय कानून वापस लेने का छलावा नहीं, एमएसपी व फसल का हक लूटने वाले कानूनों का समूल नाश चाहिए.’
कुल मिलाकर कहना गलत नही होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व अपनी पार्टी के बड़बोले नेताओँ के बयानों पर लगाम नही लगा पा रही है जिसका खामियाजा उसको उठाना पड़ता है।






















