★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{पश्चिम बंगाल में रहने वाला हर कोई है बंगाली=मिथुन चक्रवर्ती}
[बंगाल के ब्रिगेड मैदान में हुई विशाल रैली के दौरान पूर्व तृणमूल सांसद व फ़िल्म स्टार मिथुन चक्रवर्ती ने थामा कमलदल का झंडा कहा कोबरा हूँ गलत होने पर फन उठाकर खड़ा हो जाऊँगा]
(तृणमूल नेता व सीएम ममता बनर्जी ने पदयात्रा के दौरान कहा महंगाई बढ़ रही है और पीएम मोदी झूठ बोलकर लोगों को कर रहे गुमराह)

♂÷आज पश्चिम बंगाल के ब्रिगेड मैदान पर इलेक्शन डेट घोषित होने के पश्चात हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल रैली ने जहाँ सत्ताधारी दल तृणमूल काँग्रेस व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कम्युनिस्ट व काँग्रेस गठबंधन दलों को नए सिरे से चुनावी रणनीति बनाने को बाध्य कर देगी तो वहीं कभी”दीदी”के ख़ास माने जाने वाले “डिस्को डान्सर” मिथुन चक्रवर्ती आज भाजपा के मंच पर से ललकारते दिखे।
उन्होंने कहा कि बंगाल में रहने वाले सभी बंगाली हैं और किसी को कुछ हुआ तो वह कोबरा साँप की तरह फन उठाकर खड़े हो जाएंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने आज तक इतनी विशाल जनसँख्या वाली रैली को सम्बोधित नही किया था,इससे यह साबित हो रहा है कि जनता परिवर्तन के लिए बीजेपी को सत्ता सौपने का मन बना चुकी है।
उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती ऊर्जा देती है, आंदोलन को सशक्त करती है ऐसी धरती को मैं नमन करता हूँ,विशाल जनसंख्या दे रही परिवर्तन का संकेत।
उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंहगाई के विरोध में निकली पदयात्रा के दौरान लोगो को सचेत करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार में महंगाई बहुत बढ़ गयी है तो वहीं पीएम मोदी लोगों को झूठ बोलकर गुमराह करने में लगे हैं।

मालूम हो कि दो माह पूर्व तक तृणमूल से राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफ़ा देने वाले अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो फिल्मों से लेकर राजनीतिक जीवन में कई अहम किरदार निभा चुके हैं। कभी वामपंथी झुकाव वाले मिथुन चक्रवर्ती तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रहे हैं। अब उन्होंने कमलदल का झंडा उठा लिया है। ममता के बयान कि बंगाल से बाहर के लोग बाहरी है कि जवाब में उन्ही के बगलगीर रहे मिथुन ने मंच से उनको गहरा सन्देश देते हुए कहा कि बंगाल में रहने वाले सभी बंगाली हैं और वे उनके साथ खड़े हैं, भाजपा के लिए विधानसभा चुनावों में मददगार हो सकती है।
मिथुन भारतीय सिनेमा में बंगाल के सबसे सफल सितारों में एक हैं। वह गांव-गरीब और मजदूरों के हीरो माने जाते हैं। उनके ज्यादातर प्रशंसक छोटे शहरों और गांवों से जुड़े हैं। मिथुन के जरिये भाजपा बंगाल में गांव-गरीब और मजदूरों तक पहुंच बनाना चाहती है और आज की विशाल रैली यह साबित कर रही है कि बीजेपी के रणनीतिकारों ने बेहद सधे अंदाज में पश्चिम बंगाल फ़तेह करने को क़दम उठा रही है।अभिनेता के भाजपा में आने से पार्टी को काफी मजबूती मिली है, क्योंकि उसे पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े ऐसे विशिष्ट लोगों की जरूरत थी, जिससे वह खुद को बंगाली भद्रलोक में स्थापित कर सके। साथ ही वहां की जड़-जमीन के साथ अपना नाता स्थापित कर पाए। इस कड़ी में मिथुन का आना उसके लिए राजनीतिक रूप से लाभ का सौदा हो सकता है।
मालूम हो कि कुछ सप्ताह पूर्व मिथुन चक्रवर्ती ने RSS प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की तभी से उनके बीजेपी में जाने के कयास लगने शुरू हो गए थे किंतु उन्होंने तब कहा कि उनसे मेरी आध्यात्मिक मुलाकात रही है इसका दूसरा मतलब नही निकाला जाना चाहिए।उधर कल ही बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी के दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय रेल मन्त्री दिनेश त्रिवेदी को भी भगवा झंडा थमाकर ममता दीदी को जोरदार झटका देकर बंगाल में मजबूत हो रही है।
सितारों पर दांव की रणनीति नई नही है,मिथुन दादा के भाजपा में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह किस तरह से पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकते है। इसे समझने के लिए आपको ममता बनर्जी के टिकट गणित को समझना होगा। ममता ने इस बार के चुनाव में फिल्मी दुनिया से पांच अभिनेत्री और दो अभिनेताओं को उतारा है। चूंकि, मनोरंजन की दुनिया में मिथुन दा की जबरदस्त पैठ है। ऐसे में भाजपा ने बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। यह कितना असरदार साबित होगा, ये तो दो मई को जारी चुनावी परिणाम के बाद ही पता चलेगा।
दरअसल, मिथुन चक्रवर्ती के अभिनय के दीवाने तो करोड़ों हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक प्रतिभा के कद्रदान भी कम नहीं हैं। कॉलेज के दिनों में कम्युनिस्ट पार्टी के करीबी रहे मिथुन साल 2014 में ममता की पार्टी में शामिल हुए और राज्यसभा सांसद भी बने। दो साल बाद 2016 में राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा देने के बाद से मिथुन दा अवकाश पर चल रहे थे, लेकिन अब उनका ब्रेक खत्म हो गया है।






















