★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{विधानसभा चुनावों के लिए बुलाई गई बैठक का गडकरी ने किया बहिष्कार,नज़र आ रहा महाराष्ट्र बीजेपी में दो फाड़ !}
[कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने अमित शाह के ख़ास फड़नवीस ने खुद को घोषित किया नेक्स्ट सीएम]
(लोकसभा नतीजों के पहले गडकरी को मोदी के विकल्प के रूप में प्रस्तुत होने व बयानों से नाराज़ मोदी-शाह की जोड़ी थामने में जुटी गडकरी के कद)

♂÷आरएसएस मुख्यालय नागपुर के दो कृपापात्रो बीजेपी के दिग्गजों में अब खुलकर तलवारें निकलती दिख रही है।कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से चूक जाने वाले पूर्व भाजपाध्यक्ष केन्द्रीय मन्त्री नितिन गडकरी व सूबे के मुखिया देवेन्द्र फड़नवीस के बीच की दूरी खुलकर सार्वजनिक रूप से पार्टी फोरम में सामने आ चुकी है। जिससे इतना तो तय है कि मोदीलहर व शाह की राजनैतिक कौशल के बूते बीजेपी के विजयरथ को विरोधियों द्वारा रोकना दुष्कर बन चुका है तो वही आगामी महीनों में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मोदी सरकार के सर्वाधिक कर्मठ व लोकप्रिय मन्त्री गडकरी व मुख्यमंत्री फड़नवीस की रार पार्टी के विजयरथ के पहिये महाराष्ट्र में हिचकोले न लेने लगे।
हालांकि दोंनो दिग्गजों ने किसी भी प्रकार के मतभेदों से इनकार कर सार्वजनिक रूप से पार्टी की किरकिरी कराने से बचते दिखे।

कुल मिलाकर बड़ा सवाल फ़िर भी लोगो के जेहन में चुभ रहे है कि क्या महाराष्ट्र बीजेपी में क्या दो फाड़ हो रहा है?
मुम्बई में बीजेपी ने विधानसभा चुनावों की रणनीति के लिए बुलाई गई बैठक का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बहिष्कार कर दिया वहीं कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद देवेंद्र फडणविस ने खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया है।
महाराष्ट्र बीजेपी में दोफाड़ नजर आ रहा है खासतौर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णविस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संबंधों में खटास नजर आने लगी है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि इसक असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के निवर्तमान अध्यक्ष अमित शाह के नजदीकी माने जाने वाले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णविस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। इस सार्वजनिक प्रदर्शन रविवार को उस समय हुआ जब बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई की मुंबई में हुई कार्यकारिणी की बैठक से नितिन गडकरी नदारद रहे। उन्होंने पहले से तय किसी कार्यक्रम का बहाना बना दिया और चुनावों की तैयारी के मद्देनज़र हुई इस बैठक से दूरी बना ली। इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णविस न सिर्फ मौजूद रहे बल्कि उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का ऐलान भी कर दिया।
इस बैठक से गडकरी की गैरमौजूदगी को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि बैठक में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा भी मौजूद थे और अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनका यह पहला महाराष्ट्र दौरा था। कहा जाता है कि बीजेपी आलाकमान द्वारा देवेंद्र फड़णविस को जरूरत से ज्यादा अहमियत दिए जाने से गडकरी नाराज हैं।
महाराष्ट्र के राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनावों से पहले हुई इस बैठक में नितिन गडकरी की गैरमौजूदगी ने पार्टी के उन दो धड़ों की आपसे मतभेद सामने रख दिए हैं जिनकी आरएसएस मुख्यालय नागपुर से नजदीकियां मानी जाती हैं। लेकिन गडकरी और फड़णविस खेमे, दोनों ने ही किसी भी मतभेद को खारिज किया है।
ज्ञातव्य हो कि लोकसभा चुनावों से पहले जिस तरह नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष हमले किए थे, उसे मोदी-शाह की जोड़ी भूली नहीं है।“23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान होने तक नितिन गडकरी को ही मोदी के विकल्प के तौर पर सामने रखा जा रहा था, इसीलिए अब उन्हें मोदी-शाह की शह पर ही महाराष्ट्र की राजनीति में हाशिए पर धकेला जा रहा है।”
गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों के दौरान कई मौकों पर नितिन गडकरी ने नरेंद्र मोदी की सरकार पर सवालिया निशान लगाए थे, इससे विपक्षी नेताओं और मोदी आलोचकों को भी हमले करने का मौका मिला था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गडकरी-फड़णविस शत्रुता में एक तीसरा कोण भी है जो अब दिल्ली तक पहुंच चुका है। इस पूरे मामले में दिल्ली दरबार की भूमिका को नजरंदाज़ नहीं किया जा सकता।
हालाँकि इन हालातों में बीजेपी के पितृ सन्गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका आने वाले दिनों में ताकतवर अभिवावक की तरह निर्णायक रहने वाली है क्योंकि नागपुर के आदेश निर्देश की अवहेलना करने की ताकत फ़िलहाल नागपुर निवासी दोनो दिग्गजों की नहीँ है।






















