★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{भारत ने कहा मुद्दे पर संतुलित बहस करने की बजाय झूठे दावे किए गए और दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र और उसके संगठनों पर मढ़े गए दोष}
[ब्रिटिश संसद में सोमवार को”प्रेस की आज़ादी”के मुद्दे पर हुई 90 मिनट की बहस,जिसमे सांसद मार्टिन डे ने कहा कि वॉटर कैनन,आँसू गैस के गोले,पुलिस और किसानों के बीच झड़प चिंता के विषय]
(लेबर पार्टी की सांसद जेरेमी कॉर्बिन ने कहा अभूतपूर्व प्रदर्शन ये सोचने के लिए मजबूर करते हैं कि इनमें इतने लोग आ रहे हैं, पत्रकारों की गिरफ्तारी चिंता का विषय)
♂÷भारत में चल रहे किसानों के आंदोलन पर और प्रेस की आजादी पर सोमवार को ब्रिटिश संसद में हुई एक बहस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश गवर्नमेंट से तीखा ऐतराज जताया है।
लंदन स्थित भारतीय दूतावास ने मामले पर बयान जारी करते हुए कहा है कि मुद्दे पर संतुलित बहस करने के बजाय झूठे दावे किए गए और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उसके संगठनों पर दोष मढ़े गए।
दूतावास ने कहा कि भारत में मीडिया की स्वतंत्रता में कमी का सवाल ही पैदा नहीं होता।
जेरेमी कॉर्बिन ने उठाया पत्रकारों की गिरफ्तारी का मुद्दाभारतीय दूतावास ने कहा- तथ्यों को सामने रखने की जरूरत थी,अफसोस कि संतुलित बहस नहीं की गई- दूतावास ने कहा कि क्या है कृषि कानूनों और किसान आंदोलन का पूरा मुद्दा?
सोमवार को ब्रिटिश संसद में भारत में ‘किसानों की सुरक्षा’ और ‘प्रेस की आजादी’ के मुद्दों पर 90 मिनट की बहस हुई थी। इसमें कई पार्टियों के सांसदों ने किसान आंदोलन के खिलाफ भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर चिंता जाहिर की।
बहस में स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद मार्टिन डे ने कहा, “वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले, पुलिस और किसानों के बीच लगातार झड़प और इंटरनेट कनेक्टिविटी में व्यवधान चिंता का विषय हैं। कई किसानों ने आत्महत्या की है।
बहस में किसानों के खिलाफ बल प्रयोग के साथ-साथ पत्रकारों की गिरफ्तारी पर भी चिंता जाहिर की गई।
लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कहा, “अभूतपूर्व प्रदर्शन ये सोचने पर मजबूर करते हैं कि इनमें इतने लोग क्यों आ रहे हैं। पत्रकारों की गिरफ्तारी चिंता का विषय है।”
सांसदों की इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन की बोरिस जॉनसन सरकार ने कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात के दौरान इन चिंताओं को उठाया जाएगा।
ब्रिटिश सांसदों की इस बहस पर बयान जारी करते हुए भारतीय दूतावास ने इस पर कड़ी टिप्पणी की।
अपने बयान में उसने कहा, “भारतीय दूतावास आमतौर पर माननीय सांसदों के एक छोटे समूह के बीच आंतरिक चर्चा पर टिप्पणी करने से बचता है। हालांकि जब भारत के प्रति प्यार और दोस्ती के दावों के बावजूद किसी के द्वारा भारत पर आरोप लगाए जाते हैं तो तथ्यों को सामने रखने की जरूरत है।”
दूतावास ने अपने बयान में आगे कहा, “हमें बहुत अफसोस है कि एक संतुलित बहस की बजाय बिना तथ्यों और उनकी पुष्टि के झूठे दावे किए गए और दुनिया के सबसे लोकतंत्र और इसके संगठनों पर संदेह व्यक्त किया गया।”
मीडिया की स्वतंत्रता पर दूतावास ने कहा, “ब्रिटिश मीडिया सहित तमाम विदेशी मीडिया भारत में मौजूद हैं और उन्होंने बहस के मुद्दे को खुद देखा है। भारत में मीडिया की स्वतंत्रता में कमी का सवाल ही पैदा नहीं होता है।”
बता दें कि भारत में किसान नवंबर से ही केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
इन कानूनों के जरिए सरकार ने कई बड़े कृषि सुधार किए हैं, हालांकि किसानों को सरकार पर भरोसा नहीं है और उनका कहना है कि सरकार इनके जरिए सरकारी मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था को खत्म करना चाहती है।
सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की असफल बैठकें भी हो चुकी हैं।






















