★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में बताया कि भारत मे प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 25000 कोविड मामले और 340 मौतें दर्ज है जो दुनियां में है सबसे कम}
[विश्व के 29 देशों में ओमिक्रोन वैरियंट के 373 केस सामने आए हैं जिसमें से देश मे दो मामले आये हैं बताया हेल्थ मिनिस्टर ने]
(मंडाविया ने कहा कि पिछली सरकारों ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी की,लेकिन हमने उन पर दोष मढ़ने की बजाय नतीजों के लिए किया काम)
♂÷भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि भारत में कोरोनावायरस बीमारी (कोविड -19) से संबंधित आंकड़े दुनिया में सबसे कम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 25,000 कोविड मामले और 340 मौतें दर्ज की गईं हैं, जो दुनिया में सबसे कम आंकड़ा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे बताया कि भारत में अब तक कोरोना के 3.46 करोड़ मामले सामने आए हैं, जिसमें से 4.6 लाख लोगों की मौत हुई है, जो कुल मामलों का 1.36% है।
मनसुख मंडाविया ने कहा कि पिछली सरकारों ने स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे की अनदेखी की। हालांकि नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार, उन पर दोष मढ़ने की जगह इसे मजबूत करने में जुटी हुई है। मंडाविया ने कहा, “पिछली सरकारों ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी की। लेकिन हम उनपर दोष नहीं मढ़कर इसकी जगह हमने नतीजों के लिए काम किया। पिछले दो सालों में पीएम मोदी के अगुआई में लिए गए फैसलों से पता चलता है कि यह सरकार इच्छाशक्ति से काम करती है न कि पावर (ताकत) से।”
मंडाविया ने कहा कि भारत में कोरोना का पहला मामला 13 जनवरी, 2020 को केरल में मिला था। लेकिन केंद्र की तरफ से गठित जॉइंट मॉनिटरिंग कमेटी की पहली बैठक 8 जनवरी को हुई थी। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि हम सतर्क थे। कोरोना का पहला मामला मिलने से पहले ही एक कमेटी बना दी गई थी और इसने काम करना भी शुरू कर दिया था।”
वैक्सीन और उससे जुड़े रिसर्च पर बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एक समय था जब किसी को वैक्सीन पर रिसर्च करने की मंजूरी लेने के लिए तीन साल लग जाते थे। उन्होंने कहा, “इसलिए, कोई भी रिसर्च नहीं करता था। हमने उन नियमों को खत्म कर दिया और एक साल के भीतर रिसर्च के बाद देश को वैक्सीन मिल गई। यह पीएम मोदी की अगुआई है।”
इससे पहले लोकसभा में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमीक्रॉन’ (Omicron Variant) को लेकर जानकारी देते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि इस वेरिएंट के भारत में दो मामले सामने आए हैं और खतरे की श्रेणी वाले देशों से आये 16 हजार यात्रियों का RT-PCR टेस्ट कराया गया है, जिसमें 18 लोग पॉजिटिव मिले है। इनके जीनोम सिक्वेंसिंग से यह पता लगाया जा रहा है कि इनमें से कितने इस नए वेरिएंट से संक्रमित हैं।
मांडविया ने कहा, “केंद्र ने राज्य सरकार को सभी सावधानियां बरतने को कहा है और उनके साथ कोऑर्डिनेशन बनाकर काम किया जा रहा है। जोखिम भरे अंतरराष्ट्रीय स्थानों से आने वाले सभी यात्रियों की आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है।” उन्होंने कहा कि अब तक विश्व के 29 देशों में सार्स-सीओवी-2 के “ओमीक्रॉन” वेरिएंट के 373 मामले सामने आए हैं।






















