★मुकेश शर्मा★
★भोपाल★
{किसके संरक्षण में चल रहा अवैध रेत खनन कारोबार,सरकार को छुड़ा सबको पता है रेत माफियाओं का सरपरस्त,साझीदार}
[कुछ महीने पूर्व के मुकाबले पिछले माह से रेत खनन से मिला है ग्वालियर सम्भाग में 200% राजस्व,कसी जा रही है नकेल अवैध खनन पर कहा डीएम ग्वालियर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने]
(एमपी सेल्स कारपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर व पार्टनर आशुतोष माहेश्वरी ने बताया कि एक कुछ सप्ताह पूर्व तक हम लोगो के पास सरकारी ठेका होने के बाद भी माफियाओं के आगे खनन नही करवा पाते थे,अब कोई प्रशासन हमारी मदद कर रहा है)
[अवैध खनन में हिस्सेदारी को लेकर भिंड में मन्त्री के बंगले के गोलियां तक बरसा डाली है रेत खनन माफियाओं ने,सरकार किसी की भी रही हो नही टूट पा रही कमर अवैध खनन माफियाओं की]
♂÷मध्यप्रदेश राज्य के ग्वालियर चम्बल अंचल में सिंध नदी और चम्बल में बेलगाम हो रहे हैं,रेत के अवैध खनन व परिवहन पर लगाम लगाने में ग्वालियर व चम्बल प्रशासन बुरी तरह असफल नजर आरहा है। ग्वालियर जिले में करीब सभी रेत खदानों का ठेका एमपी सेल्स कारपोरेशन के चेयरमैन मनोज अग्रवाल निवासी मुरैना के पास है जिनमें करीब दो दर्जन खदान अवैध रूप से संचालित हैं । महत्वपूर्ण बात यह है कि खनिज अधिकारी जिला प्रशासन के मुखिया पुलिस अधीक्षक एवं राजस्व अधिकारियों के पास दर्जनों शिकायतें लगी होने के बावजूद इंटेक माफिया पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है । इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो जिला प्रशासन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने में असफल साबित हो रहा है या अवैध खनन के कारोबार का एक मोटा हिस्सा इन आला अफसरों की जेब में भी जा रहा है शायद यही वजह है कि रेत के अवैध कारोबारियों पर सरकारी अफसर शिकंजा नहीं कस पा रही हैं ।
उधर अभी एक हफ़्ते पूर्व ही मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान के इक़बाल की धज्जी उड़ाते हुए चार रेत माफ़िया ने राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया के बंगले के ऊपर गोलियां दागी थी।
जिसमें चर्चा रही कि जिन रेत माफियाओं ने ऐसा दुस्साहसिक काण्ड किया था उनके नज़दीकी सम्बन्ध मन्त्री से थे और अवैध रेत खनन में हिस्सेदारी के विवाद को लेकर उनके गुर्गों ने उनके ही बंगले पर गोलियां की बौछार कर दी थी।हालांकि सरकार की सख़्ती से चारों नामज़द आरोपी गिरफ्तार कर लाइट गए किन्तु लाख टके का सवाल आज भी मौंजू है कि अवैध रेत खनन के धंधे में नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग कहीं न कहीं सरकारी ख़ज़ाने को चूना लगाते हुए अपनी तिजोरी भरने में लगे हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक एमपी सेल्स कारपोरेशन की चेयरमैन मनोज अग्रवाल के पार्टनर आशुतोष महेश्वरी बताए जा रहे हैं जिनके परिवार से रसूखदार न्यायाधीश हैं,अब न्यायाधीश हैं तो……? एमपी सेल्स कारपोरेशन के चेयरमैन मनोज अग्रवाल के साथ कुछ तथाकथित सत्ताधारी नेता बाहुबली भी रेत के इस अवैध कारोबार में शामिल है जिसके चलते प्रशासनिक मुखिया चुप्पी साधे बैठे हैं । सवाल यह है कि शिकवा शिकायतों की फेहरिस्त इतनी लंबी होने के बावजूद प्रदेश के मुखिया जिला प्रशासन के आला अफसर राजस्व अधिकारी एसडीएम, पुलिस अधीक्षक एवं खनन मंत्री चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं। अभी कुछ रोज पहले भितरवार के अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी शिकायती पत्र दिया गया लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई।
भिण्ड में भी रेतमाफ़िया और नेता का गठजोड़ किसी से छुपा नही है, अंचल में खाकी-खादी और खतागार का गठजोड़ नदियों का सीना तो छलनी कर ही रहा साथ ही राजस्व को चूना लगा रहा है। अवैध रूप से ओवरलोड से रेत परिवहन करती गाड़ियों ने चारों तरफ सड़कमार्ग क्षतिग्रस्त कर दिए हैं,जिससे जनमानस को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।भिण्ड जिले में विभिन्न क्षेत्रों में रेतमाफ़िया द्वारा किसानों की जमीन कब्जा करने , मारपीट व गोलीबारी की घटनायें आये दिन सामने आती रहती है।
अंचल में चल रहे रेतमाफ़िया के बेलगाम काले कारोबार को आखिर किसका संरक्षण है ? क्यों प्रदेश के मुखिया इन पर कार्यवाही नही करवा पा रहे हैं।
अभी कुछ हफ़्ते पूर्व एमपी सेल्स कारपोरेशन के पार्टनर जो कि खुद बेहद रसूखदार न्यायाधीश के भतीज़े हैं ने एक वीडियो वायरल कर सरकार व पुलिस प्रशासन पर उँगली उठाते हुए कहा था कि भिंड ज़िले के पिछोर थानाध्यक्ष ख़ुद अवैध रेत खनन अपनी टीम बनाकर करवा रहे हैं, और तो और सारा काम छोड़कर ख़ुद रेत से भरे वाहनों को पास कराने का काम करते हैं।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद कुछ दिनों पूर्व उक्त भ्रष्ट पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण कर दूसरे को पिछोर थानाध्यक्ष बना दिया गया है।इस सन्दर्भ में जब आशुतोष माहेश्वरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एक महीने पहले तक पूर्व थानाध्यक्ष के रहते बुरी तरह से उनके द्वारा अवैध खनन करवाया जा रहा था,किन्तु ट्रांसफर के बाद अब स्थित सुधरी है, हम लोग की कम्पनी टेंडर लेकर सरकारी मानक के अनुसार रेत खनन करवाती है।
उधर ग्वालियर के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि अब ग्वालियर सम्भाग में अवैध रेत खनन के धंधे पर नकेल लगा दी गयी है एक महीनें के दौरान रेत खनन से प्राप्त राजस्व में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं जो यह बताने के लिए काफ़ी है कि ग्वालियर प्रशासन रेत माफियाओं की कमर तोड़ने में सफ़ल हो रही है।
करोड़ो रूपये के रेत खनन का सरकारी ठेका लेने वाली कम्पनी एमपी सेल्स कारपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज अग्रवाल जो कि कुछेक माह पूर्व टेंडर लेने के बाद भी रेत माफियाओं के आगे बिल्कुल असहाय पड़े हुए ऊपर से नीचे तक गुहार लगा रहे थे अब इनका कहना है कि इस समय अब इनको आजकी तारीख में मुझे प्रशासन से कोई दिक्कत नहीं है,प्रशासन तो हमारी दिल खोलकर मदद कर रहा है पहले परेशानियां थी,लेकिन रेत की बिक्री न होने से हम परेशान हैं।
उधर एसपी भिंड मनोज कुमार सिंह व डीएसपी मोतीलाल कुशवाहा एसडीएम अश्वनी कुमार रावत की फ़ोन की घण्टी बजती रही किन्तु उन्होंने फ़ोन नही उठाया जिससे उनका महत्वपूर्ण पक्ष नही जाना जा सका।
कुल मिलाकर यह कहने में गुरेज़ नही है कि चाहे वह काँग्रेस की सरकार रही हो या फ़िर भाजपा की अवैध रेत खनन के धन्धे की कमर तोड़ पाने में कोई भी सरकार सफ़ल होती नही दिखी है।
चम्बल व ग्वालियर सम्भाग में सरकार में शामिल सफेदपोशों,व सत्ता के गलियारों में टहलने वाले ताक़तवर लोगों ने रेत माफियाओं के साथ ऐसा नेक्सस तैयार कर लिया है कि सरकार किसी की भी हो,नदियों का सीना छलनी कर अवैध रेत खनन के धंधे को बंद करा पाने में कामयाब नही हो पा रही है।






















