लेखक :मनोज श्रीवास्तव
अखिलेश यादव सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जेपीएनआईसी को उत्तर प्रदेश सरकार ने किराये पर देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय लेने में यूपी सरकार ने 9 साल से ज्यादा गंवा दिया। यही करना था तो इसे 2017 में भी कर सकते थे। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसको लगभग एक हजार करोड़ में तैयार होने का खाका तैयार किया था। लगभग 850 करोड़ इस पर खर्च हो चुका था। उसी को बढ़ाते हुये इसमें 250 करोड़ स्वयं या निजी सहयोगियों के उपयोग कर लगवा कर इसका संचालन सुनिश्चित कर लेना था। अब तक राजधानी लखनऊ और उत्तर प्रदेश का व्यवसायिक स्तर और राजस्व दोनों में उन्नति का लाभ मिलता। दूसरी सरकार का जब कार्यकाल समाप्त होने को है तब सरकार और उसके नौकरशाह जागे हैं। राजनैतिक शत्रुता अपनी जगह लेकिन राज्य का विकास सबको नेक नियत से एकजुट होकर संचालित करना चाहिये। अब तक न जानें कितने रोजगार श्रजित हो चुके होते। राज कोष में भी वृध्दि हुई होती। चलो यह मान कर मन को समझाओ कि देर आये दुरुस्त आये।राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता बहुत गुस्से में हैं।
लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर को यूपी सरकार ने 30 साल के लिए लीज पर देने का फैसला लिया है। इसे लेकर सूबे में राजनीति भी तेज हो गई है और अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए तंज कसा कि भाजपा सरकार है या दुकानदार? उन्होंने लिखा, ‘अब उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है। ‘कमीशन’ भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और ‘निजीकरण’ उसका जुगाड़।
इस संस्थान को वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड एंड राकवुड होटल्स एंड रिजार्ट्स प्रालि को 30 साल की लीज पर दिया गया है। इसके एवज में कंपनी वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण को सालाना छह करोड़ रुपये देंगे और इसमें हर साल पांच प्रतिशत की वृद्धि होगी। इस तरह लीज पर देकर जेपी सेंटर का संचालन कराया जाएगा और उससे प्राधिकरण को एक निश्चित आय भी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। कंपनी से लीज पर देने के एवज में 10.11 करोड़ रुपये अपफ्रंट प्रीमियम और 25 करोड़ रुपये परफारमेंस गारंटी ली जाएगी।”
सुनने में आ रहा है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव आज इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। उनके साथ उनकी पत्नी व मैनपुरी की सांसद डिम्पल यादव भी रहेंगी। जंतर मंतर पर कॉकरोच पार्टी का आंदोलन हो या संसद में युवाओं बेरोजगारों की समस्या जिस तरह से समाजवादी पार्टी डिम्पल यादव को आगे कर रही है वह सपा की तरफ से भविष्य में प्रियंका गांधी, मायावती, बांसुरी स्वराज की विकल्प होंगीं।बहुत बड़ा वर्ग यह मानने लगा है कि अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिम्पल यादव को यूपी की कमान सौंपी स्वयं दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति करेंगे। डिम्पल यादव को पार्टी का चेहरा बनाना अभी भले ही जल्दबाजी लगे पर भविष्य में वह सपा नेतृत्व की प्रासंगिकता होगी। जेपीएनआईसी को किराये पर देने से अखिलेश यादव जितना गुस्सा दिखा रहे हैं यह बहुत ठीक नहीं है। यह चल गया इससे उन्हें खुशी होनी चाहिये। जानकारी के लिये बताना चाहता हूं कि उनके पिता जी ने 1991 में राज्य सरकार द्वारा संचालित निगम की तीन सीमेंट फैक्ट्रियों (चुर्क, डाला व चुनार) को डालमिया ग्रुप को बेंच दिये थे। जब मजदूरों व युवाओं ने इसका विरोध किया तो गोलियों से भुनवा दिये थे। अखिलेश यादव वहाँ जाकर माफी मांगते कोई फोटो जारी किये क्या? आपका नजरिया सरकारी संपत्ति को बेचने का क्या है किसी से छुपा है क्या? आप तो सरकारी संपत्ति बेचते भी हो और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होने पर जनरल डायर बन कर अपने लोगों को गोलियों से भून कर मार डालते हो। अच्छा है कि विकास पर सब मिल कर चलें।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)





