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योगीजी की चाह, नीतीश सुनें
लेखक~डॉ.के. विक्रम राव

♂÷शिवसेना और सोनिया—कांग्रेस के गठबंधन में विक्षोभ सर्जा है। तटवर्ती प्रदेशों में ऐसा आम होता रहता है। हालांकि यहां सियासत के भूगोल पर इतिहास हावी हो रहा है। मुख्यमंत्री उद्धव बाल ठाकरे की जिद ही सबब बनी है। मसला है पुराने निजामशाही क्षेत्र औरंगाबाद का नाम बदलने वाला। अर्थात योगीजी ही नया नामकरण नहीं कर रहे हैं। ठाकरे भी हैं।

जब दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम एपीजे अब्दुल कलाम पर रखा गया था तो शिवसेना ने भाजपा का समर्थन किया था। किन्तु महाराष्ट्र में भाजपा इसे शिवसेना का चुनावी हथकण्डा मान रही है। भाजपायी विपक्ष के नेता देवेन्द्र गंगाधर फडनवीस ने बताया कि चुनाव के वक्त शिवसेना औरंगाबाद का नाम शंभाजी (शिवाजी—पुत्र) पर रखने की मांग उठाती है। उधर वोटिंग खत्म होते ही मांग फिर अलमारी की आली की गर्त में दफन।

देश के पर्यटन—मानचित्र पर औरंगाबाद अत्यंत खास है। अजंता की गुफावाली चित्रकारी तथा एल्लोरा की शिल्पकला का संग्रह यहीं है। द्वादश ज्योतिर्लिंग के घूश्मेश्वर शंकर भी यहीं है। छठे मुगल बादशाह आलमगीर औरंगजेब के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है। इतिहासवेत्ता इसे खुजिस्तां—बुनियाद कहते हैं, अर्थात पवित्र नींव। इस्लाम का अत्याधिक प्रचार तभी हुआ था। बादशाह की मंशा थी कि समूचे भारतीय भूभाग को दारुल इस्लाम बना डालना चाहिए। अधूरा रहा। बादशाह शाहजहां द्वारा दक्षिण के गवर्नर नियुक्त हुये थे तृतीय पुत्र औरंगजेब। हिन्दू—बहुल औरंगाबाद से 16वीं लोकसभा (2019) में सदस्य मजलिसे इतिहादे मुसलमीन के सैय्यद इम्तियाज जलील है। उनके नेता हैं मियां असदुद्दीन ओवैसी।

गत माह से महाराष्ट्र में उथल—पुथल मची हुई है कि शिवाजी के राजकुमार मराठा महाराज शंभाजी के नाम पर औरंगाबाद कर दिया जाये। छत्रपति शंभाजी भोंसले द्वितीय सम्राट थे। उनकी हत्या कर दी गयी थी।

शिवसेना के संस्थापक कार्टूनिस्ट बाल केशव ठाकरे ने दशकों पूर्व औरंगाबाद का नाम परिवर्तन करने की मांग उठायी थी। तब कांग्रेस की सरकार थी। शिवसेना की सरकार कई बार बनी पर प्रस्ताव का क्रियान्वयन नहीं हुआ। पूर्व भाजपायी मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस का यही शिकवा है। केवल मतदान के मौसम में ठाकरे कुटुम्ब को यह मुद्दा याद आता है।

भाजपा से अधिक हानिजनक जिद तो सोनिया—कांग्रेस की है। अब मुस्लिम वोट के बहुतायत के कारण वह मराठवाड़ा (पूर्व निजामराज) और समीपस्थ निर्वाचन क्षेत्रों की उपेक्षा नहीं कर सकती। शिवसेना यहां हिन्दू कार्ड चलती रही है। अत: सत्तारुढ़ गठबंधन के इन दोनों घटक दलों में तालमेल या समझौता नहीं हुआ तो दलीय उथल—पुथल सरकार पलटा सकती है।

उद्धव ठाकरे के जेहन में निकटस्थ (500 किलोमीटर दूर) हैदराबाद नगर महापालिका के हाल के निर्वाचन की याद तो होगी ही। यहां भाजपा की केवल दो सीटें हुआ करती थीं। चुनाव के बाद पचास के करीब आ गयी। वहां भाजपा का नारा था कि, ”हैदराबाद का पुराना नाम भाग्यनगर वापस रखा जायेगा।” योगीजी की घोषणा थी। हिन्दुत्व समर्थक सक्रिय हो गये थे। कांग्रेस का बेड़ा गर्क हो गया। उसी चुनावी मुहिम से उद्धव ठाकरे सिहर उठे हैं। कहीं मराठवाड़ा भी, जो हैदराबाद से सदियों तक शासित रहा, ने करवट ली और वह भाजपायी भगुवा हो गया तो? ठाकरे की यही चिन्ता हैं।

नाम बदलने वाला अभियान योगी आदित्यनाथ जी ने व्यापक बनाया है। एक दैनिक के संपादक से बातचीत में वे बोले थे कि पड़ोसी बिहार में नालन्दा से सटा बख्तियारपुर शहर है जो अभी भी पुराने नाम के बोझ तले दबा हुआ है। परिवर्तन की मांग उठ रही है।

योगीजी की इस मांग में काफी दम है। नालन्दा विश्वविद्यालय मानव इतिहास में ज्ञान की अमूल्य धरोहर थी। कट्टर इस्लामी हमलावर ने उसे जला दिया। इतिहास साक्षी है कि बौद्ध शोध कार्य, धर्मइतिहास आदि की पुस्तकें नालन्दा संग्रहालय में अकूत थी। इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने सब नष्ट कर दिया। विक्रमशिला विश्वविद्यालय को भी इसी लुटेरे बख्तियार ने राख में बदल दिया था। चैतन्य महाप्रभु के नाम से ख्यात नवद्वीप के वृद्ध सम्राट लक्ष्मणसेन को भी इसी इस्लामी आक्रामक ने मारा था। बिहार पर पहला इस्लामी हमला (दिल्ली के पहले गुलामवंशी सुलतान कुतुबुद्दीन ऐबक के दास रहे) बख्तियार खिलजी ने किया था। यह घटना आठ सौ वर्ष पूर्व की है। हिन्दू बंगाल का धर्मांतरण भी इसी खिलजी हमलावर ने कराया था। दक्षिणी अफगानिस्तान से आये तुर्क नस्ल के इस खिलजी वंश ने दिल्ली को लूटा।

इस्लामी क्रूरता और असहिष्णुता के ऐसे बटमारों के नाम पर रखा गया है जेडीयू मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधानसभा क्षेत्र और कौटुम्बिक गांव। रेलवे स्टेशन अभी भी बख्तियारपुर जंक्शन कहलाता है। योगीजी ने याद दिलाया कि, ”पूर्वी यूपी का मुगलसराय स्टेशन अब पंडित दीपदयाल उपाध्याय जंक्शन कहलाता है।” यहीं इस भाजपा चिंतक की हत्या हुई थी। नीतीश कुमार ढाई दशकों से राज करते रहे पर मुस्लिम वोट के खातिर अपने क्षेत्र का नाम नहीं बदल सके। इसीलिये योगीजी ने राय दी।

नीतीश कुमार पेशे से इंजीनियर है। इतिहास के ज्ञाता भी होंगे। मगर उन्हें याद दिलाना होगा कि जब खलीफा के हमलावरों ने विश्व के पुरातन शिक्षा तथा अध्ययन के केन्द्र एलेक्सेंड्रिया (मिस्र) विश्वविद्यालय पर कब्जा करने के बाद पूछा था कि, ”इन अंसख्य पुस्तकों का क्या किया जाये?” खलीफा ने आदेश दिया: ”यदि ये पुस्तकें कुरान के विरुद्ध है तो उन्हें रखना कुफ्र होगा। अत: जला दो। यदि कुरान से सहमत हैं तो फिजूल है। तब भी भस्म कर दो।”

बताया जाता है कि इस जाहिलाना हरकत से मानव ज्ञान कई सदियों पीछे फिक गया।

÷लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व स्वतन्त्र पत्रकार/स्तम्भकार हैं÷

By Mukesh Seth

Chief Editor

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