★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{विश्व हिंदू परिषद के महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा कि राज्य सरकारों के साथ वार्ता करेंगे अगर क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट का भी खटखटाएंगे दरवाजा}
[विहिप महासचिव ने उठाया सवाल की केवल हिंदुओ के धार्मिक पूजा स्थलों को ही सरकारी नियंत्रण में क्यों लिया जा रहा है, ये न सिर्फ़ भेदभाव है बल्कि हिन्दू संस्कृति के खिलाफ भी है]
(केरल,तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में मंदिरों को राज्यसरकारों द्वारा नियंत्रण में लिया जा रहा है, जिसको लेकर लोगों में है गहरी नाराजगी कहा विहिप ने)
♂÷विहिप के मिलिंद परांडे ने कहा कि मठ मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने को लेकर विहिप अपने स्तर पर राज्य सरकारों के साथ वार्ता करेगी और अगर इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी तो हम उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) देश के मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाएगी। विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने बताया कि हम जनजागरुकता अभियान के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाएंगे कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रणों से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिलिंद परांडे ने कहा कि इस मामले को लेकर विहिप अपने स्तर पर राज्य सरकारों के साथ वार्ता करेगी और अगर इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी तो हम उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
विहिप महासचिव मिलिंद परांडे ने सवाल उठाया कि केवल हिन्दुओं के धार्मिक पूजा स्थलों को ही सरकारी नियंत्रण में क्यों लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि न सिर्फ यह भेदभाव है बल्कि हिन्दू संस्कृति के खिलाफ भी है।
रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि मंदिर से संबंधित जमीनों का इस्तेमाल तथाकथित ‘धर्मनिरपेक्ष’ उद्देश्यों को लिए किया जा रहा है। विहिप नेता ने कहा कि दानदाताओं ने जिस भाव से दिया था, वो धार्मिक और भगवान की सेवा के लिए था। उन्होंने कहा कि मंदिर के संसाधनों का इस्तेमाल केवल हिन्दू धर्म के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए किया जाना चाहिए।
विहिप नेता ने कहा कि केरल के अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मंदिरों को राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। जिसको लेकर गहरी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि तिरुपति और श्रीशैलम जैसे मंदिरों में दूसरों समुदाय के लोगों को नियुक्त किया गया है। जिससे हिन्दू समाज आहत है।
कुल मिलाकर आने वाले दिनों में विश्व हिंदू परिषद एक बड़ा भावनात्मक आंदोलन दक्षिण समेत देशभर में खड़ा करने की दिशा में बढ़ती दिख रही है।जिसका विरोध करने के लिए शायद ही कोई भी सेक्युलर पार्टी सामने आने से कतरा सकती है तो वहीं इस आंदोलन काV लाभ निश्चित रूप से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भगवा दल कमलदल को मिलेगा क्योंकि कभी कभार उनके अनुवांशिक संगठन के नेता भी ऐसी मांग उठाते रहे हैं।
जबकि देखा जा रहा है कि कुछ समय से देश के प्रख्यात सन्त व धार्मिक नेता भी मठ मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए सोशल मीडिया, मीडिया में अभियान शुरू कर माहौल बनाने लगे हैं।






















