(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
ACEO की गोपनीय रिपोर्ट पर CEO एनजी रवि कुमार ने उठाया कठोर कदम
अपने अधिसूचित क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों के निर्माण की भारी समस्या से जूझ रहे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस समस्या की जड़ बने फील्ड स्टॉफ के 83 कर्मचारियों को इधर से उधर कर दिया है। एसीईओ सुमित यादव की गोपनीय रिपोर्ट पर सीईओ एनजी रवि कुमार के आदेश पर आंतरिक तबादले की जद में आए फील्ड स्टॉफ में जहां भय का माहौल है वहीं राजनीतिक लोगों की सिफारिश से नौकरी हासिल कर प्राधिकरण की संपत्तियों को लुटवाने वाले इन कर्मचारियों ने अपने स्थान पर जमे रहने के लिए फिर जुगाड़ भिड़ाने शुरू कर दिये हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आज एक अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे परियोजना विभाग के 83 लोगों के आंतरिक तबादले कर दिए। इनमें एक सहायक प्रबंधक अनिल भाटी के अलावा सभी तकनीकी सुपरवाइजर हैं। ये सभी श्रमशक्ति आपूर्ति ठेकेदार एजेंसी द्वारा आपूर्ति किए गए लोग हैं।इनका तबादला करते हुए महाप्रबंधक सिविल आशीष कुमार सिंह ने संबंधित वरिष्ठ प्रबंधकों को तत्काल स्थानांतरित कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने और नये स्थान पर ज्वाइन कराने का आदेश दिया है। बताया गया है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में सुरसा के मुंह की भांति बढ़ते जा रहे अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई है।माना जाता है कि प्राधिकरण द्वारा अभी तक अधिग्रहित की गई कुल भूमि का आधे से अधिक हिस्सा अतिक्रमण और अवैध कब्जे में है।सूत्रों का दावा है कि अतिक्रमण पर कार्रवाई के प्रभारी अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने इस संबंध में सीईओ एनजी रवि कुमार को गोपनीय रिपोर्ट दी थी।माना जा रहा है कि श्री यादव ने सीईओ को अतिक्रमण और अवैध निर्माण में प्राधिकरण के ही फील्ड स्टॉफ की भूमिका को रेखांकित किया है। यह जगजाहिर भी है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण में प्राधिकरण के परियोजना विभाग के फील्ड स्टॉफ की भूमिका संदिग्ध रहती है। वर्षों से एक ही स्थान पर जमे होने से इनके भूमाफियाओं तथा अवैध कॉलोनाइजर्स के साथ गहरे रिश्ते बन गये हैं।इसी प्रकार यह स्टाफ अनुरक्षण के कार्यों में भी लापरवाही बरतता है। इतने बड़े स्तर पर तबादला कार्रवाई से फील्ड स्टॉफ में भय व्याप्त हो गया है, हालांकि उनमें से बहुत से लोग वापस पुराने स्थान पर जमे रहने के लिए अपने संरक्षण दाताओं की शरण में भी पहुंच गए हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें से बहुत से लोगों को भूमाफियाओं और अवैध कॉलोनाइजर्स की सिफारिशों से नौकरी हासिल हुई है। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने हाल ही में इसरो की एक संस्था से अतिक्रमण और अवैध निर्माण की आकाश से निगरानी करने का अनुबंध किया है। परंतु घर के विभिषणों के आगे इसरो की तकनीक भी मात खा रही है।




