(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
जुलाई 2025 में गोवा के एक होटल में नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी का वेस्ट टू एनर्जी मामले में डील करने को लेकर गोपनीय तरीके से बने कथित वीडियो मामले में उत्तरप्रदेश शासन द्वारा प्राधिकरण से मांगी गई जांच रिपोर्ट फिलहाल असली-नकली के फेर में फंस गई है। सूत्रों का दावा है कि प्राधिकरण ने एक फॉरेंसिक लैब में उक्त वीडियो भेजकर जांच कराई थी।उस फॉरेंसिक लैब ने वीडियो को नकली घोषित करते हुए अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेज दी थी। हालांकि बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी ने अपने प्रभाव का उपयोग कर वीडियो रिपोर्ट तैयार कराई थी।उस रिपोर्ट के आधार पर प्राधिकरण ने वीडियो में दिख रहे अधिकारी को आरोपमुक्त करते हुए जांच रिपोर्ट तैयार कर दी। परंतु फिर ऐसा क्या हुआ कि यह जांच रिपोर्ट अभी तक शासन को भेजी नहीं गई है। सूत्र बताते हैं कि जांच रिपोर्ट अनुमोदन के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष पेश की गई थी परंतु उन्होंने इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। बताया गया है कि इस मामले को उजागर करने वाले व्यक्ति को वीडियो को झूठा साबित करने वाली फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट की कहीं से भनक लग गई थी। उसने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को सूचित किया कि उसने भी उक्त वीडियो को हैदराबाद या चंडीगढ़ की सर्वमान्य फॉरेंसिक लैब से जांच कराई थी और वीडियो सच्ची होने की रिपोर्ट उसके पास सुरक्षित है। इसके बाद ही अधिकारी को क्लीन चिट देने वाली रिपोर्ट लखनऊ नहीं भेजी गई है।
सुधी पाठकों को स्मरण होगा कि गत 13 मई को मेरे द्वारा ‘नोएडा प्राधिकरण:कूड़े से एनर्जी के साथ था करोड़ों का खेल’ शीर्षक से पोस्ट प्रकाशित की गई थी जिसमें उपरोक्त वीडियो से संबंधित मामले को उजागर किया गया था। लखनऊ तक इस मामले को पहुंचने के बाद शासन ने इस संबंध में प्राधिकरण से जांच रिपोर्ट तलब की थी। बताया जा रहा है कि अब यह जांच रिपोर्ट फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।




