लेखक: मंगला मिश्रा
ममता बनर्जी बंगाल में अपनी राजनीति की कठिन लड़ाई लड़ रही हैं।
पहले फेज में 152 सीटों पर बंपर वोटिंग लोकतंत्र के नए युग का इशारा कर रही है।
फाइटर ममता बनर्जी धीरे-धीरे लोकतांत्रिक स्ट्रक्चर से ही लड़ने लगी, चुनाव के दिन ही बंगाल सहित संभवतः देश में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ पहली घटना है। आईपैक पर कलकत्ता में छापे के दिन ममता बनर्जी ने वहां पहुंचकर जो कुछ किया था, उस पर न केवल सुप्रीम कोर्ट नाराज है बल्कि बंगाल भी नाराज दिखाई पड़ रहा है। एक तरफ बंपर पोलिंग हो रही है दूसरी तरफ ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में ट्रोलिंग हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी मतदाता भूल नहीं सकेंगे, कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आचरण ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया है। उच्चतम न्यायालय का मानना है, ईडी की जांच में कोई बाधा नहीं डाल सकता है। आईपैक से ममता बनर्जी को लगे सेटबैक का नजारा चुनाव परिणाम में भी दिखाई पड़ सकता है, टीएमसी और बीजेपी सीधे मुकाबले में हैं। प्रथम चरण के चुनाव में बीजेपी का दबदबा माना जा रहा है जिस स्ट्रेटजी से ममता बनर्जी ने 15 साल पहले वामपंथी सरकार को हटाया था बीजेपी ने उसी स्ट्रेटजी को अपनाते हुए इस चुनाव में उतरी है।
कांग्रेस भी बंगाल में सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है हालांकि मुकाबले में कांग्रेस कहीं नहीं दिखाई पड़ती, लेकिन वहां प्रचार लोकसभा में नेता विपक्ष व कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपना एक वीडियो संदेश जारी किया है इस संदेश में वह कह रहे हैं, बंगाल में बीजेपी को घुसने का मौका ममता बनर्जी ने दिया है।ममता बनर्जी ने अगर साफ सुथरी सरकार चलाई होती, ध्रुवीकरण नहीं किया होता तो भारतीय जनता पार्टी को वहां मौका नहीं मिलता।
राजनीतिक गणितबाजों के अनुसार राहुल गांधी के इस वीडियो मैसेज से राहुल गांधी ऐसा मान रहे हैं कि जैसे उन्होंने बंगाल का परिणाम मान लिया है।वह ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का भी आरोप लगा रहे हैं। राहुल गांधी के इस मैसेज का बीजेपी भी समर्थन कर रही है, बीजेपी ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का पहले से ही आरोप लगाती रही है। मुस्लिम ध्रुवीकरण के खिलाफ हिंदुओं के ध्रुवीकरण पर बीजेपी की पूरी चुनावी रणनीति टिकी हुई है।
कांग्रेस का बंगाल में कोई भी जनाधार बचा नहीं है लेकिन राहुल गांधी ,चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।राहुल गांधी अब तक तो चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लिए ही फायदेमंद साबित हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी उनका वीडियो मैसेज यही बता रहा है कि बंगाल में बीजेपी जीत रही है।
राहुल गांधी की यह रणनीति दीर्घकाल के लिए है जो भी क्षेत्रीय नेता हैं, वह सब कांग्रेस पार्टी से ही निकले नेता हैं। कांग्रेस के जनाधार को ही कब्जाकर क्षेत्रीय दलों ने अपना अस्तित्व कायम किया है जब तक क्षेत्रीय दल सत्ता से दूर नहीं होगें तब तक बंगाल जैसे राज्यों में कांग्रेस को अपनी जड़ें जमाने का मौका नहीं मिलेगा।
बिहार में तेजस्वी यादव, यूपी में अखिलेश यादव, महाराष्ट्र में शरद पवार और बंगाल में ममता बनर्जी का राजनीतिक पतन ही कांग्रेस के उत्थान की बुनियाद बन सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी से मुकाबले के लिए भले ही कांग्रेस गठबंधन, का सहारा लेती हो लेकिन उसकी असली रणनीति तो यही है कि क्षेत्रीय दल कमजोर हो और उसे अपने पैर जमाने का मौका मिले उनका वीडियो मैसेज इसी रणनीति को स्थापित कर रहा है। घुसपैठियों का मुद्दा भी पोलेराइजेशन से ही जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस डीएमके साथ भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है, जब तक डीएमके कमजोर नहीं होगा तब तक कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़े होने का मौका नहीं मिलेगा।
नॉर्थ इंडिया में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, इस मुकाबले में कांग्रेस कभी भी टिक नहीं पाती है।भाजपा क्षेत्रीय दलों से ज्यादा कांग्रेस पर अटैक करती है क्योंकि बीजेपी यह जानती है कि अल्पसंख्यक वोटो पर कांग्रेस की नजर है। इसमें जितना विभाजन होगा वह बीजेपी के लिए फायदेमंद रहेगा।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस और टीएमसी का स्टैंड भी बंगाल चुनाव में बीजेपी का मुख्य मुद्दा बन गया है,पहले फेज की पोलिंग यही इशारा कर रही है कि बंगाल में कुछ बड़ा होने जा रहा है।
पहले फेज के चुनाव की अगर पिछले चुनाव से तुलना की जाएगी तो यह शांतिपूर्ण ही लगेगा बंगाल के चुनाव में तो हिंसा आम बात है।इस बार के चुनाव में चुनाव आयोग में भयमुक्त चुनाव करवाने को अपना मुख्य एजेंडा बनाया हुआ है और बीजेपी भी लगातार यही कह रही है।
यह चुनाव भय और भरोसे के बीच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले फेस के चुनाव में शांतिपूर्ण मतदान पर चुनाव आयोग को क्रेडिट दिया है।
दशकों तक सत्ता पर काबिज़ बामपंथी बंगाल में अपना अस्तित्व खो चुके हैं इस चुनाव में वह चर्चा में भी नहीं हैं,कांग्रेस की भी स्थिति कमोवेश ऐसी ही है।
कांग्रेस के दिग्गज़ नेता अधीर रंजन चौधरी विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।मुस्लिम इलाकों में मुस्लिम वोटबैंक पर टीएमसी, कांग्रेस और हुमायू कबीर की पार्टी कब्जा जमाने की कोशिश में लगी हुई है,मुस्लिम वोटो में विभाजन टीएमसी की चिंता का कारण है।आरएसएस भी बीजेपी के पक्ष में पूरी ताकत से बंगाल में काम कर रहा है। तमिलनाडु मे पोलिंग खत्म होने के बाद वहां लगे संघ के प्रचारक भी बंगाल कूच कर देंगे क्योंकि दूसरे चुनावी चरण में बीजेपी की चुनौती ज्यादा है। इस फेस की ज्यादातर सीटें टीएमसी के कब्जे वाली हैं। इस फेज में बीजेपी को अपनी स्ट्रेटजी को अधिक इफेक्टिव बनाने के लिए प्रयास करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट में ममता की ट्रोलिंग हो रही है,आईपैक अपना बैकअप कर चुकी है। एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस में सीनियर अफसरों पर चुनाव आयोग की तलवार लटकी है और टीएमसी के सिंडिकेट और गुंडागर्दी पर सेंट्रल एजेंसी की नजर लगी हुई है।
बंपर पोलिंग सुप्रीम कोर्ट की ट्रोलिंग और राहुल गांधी की वीडियो कॉलिंग से मतदाताओं की फीलिंग समझी जा सकती है। वास्तविक परिणाम तो चार मई को आएंगे, लेकिन टीएमसी के पांव और दांव उल्टे दिखाई पड़ रहे हैं।
(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं)




