(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
CPM महासचिव एम ए बेबी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दिल्ली एनसीआर औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों के हालात पर व्यक्त की चिन्ता
सांसद जॉन विटास ने नोएडा में श्रमिकों पर पुलिस दमन और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों पर पुलिस कमिश्नर से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एम. ए. बेबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के संघर्ष और उन पर हो रहे दमन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
नोएडा दौरे के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि अत्यंत कठोर कामकाजी परिस्थितियों, बेहद कम मजदूरी और कार्यस्थल दुर्घटनाओं के कारण श्रमिकों में लंबे समय से आक्रोश व्याप्त है। पिछले एक महीने में गैस की कमी और तेजी से बढ़ती महंगाई ने उनकी सहनशक्ति को अंतिम सीमा तक पहुंचा दिया है।
गत 19 अप्रैल को ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल की तथ्यान्वेषी रिपोर्ट में सामने आया है कि 13 से 17 अप्रैल के बीच बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों, श्रमिकों, महिलाओं एवं नाबालिगों तक को सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और आवासीय क्षेत्रों से बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए उठाया गया। कसना में लगभग 350 नाबालिग और करीब 800 वयस्क हिरासत में हैं।
इसी आधार पर सांसद जॉन ब्रिटास ने आज पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखकर सभी गिरफ्तारियों की तत्काल समीक्षा, निराधार मामलों में रिहाई, FIR की प्रतियां उपलब्ध कराने और CITU कार्यालयों से सील हटाने की मांग की है। गत 9 अप्रैल से नज़रबंद कॉ. गंगेश्वर दत्त शर्मा का भी जिक्र उन्होंने किया हैं।
महासचिव ने पत्र के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराया है कि वर्तमान में घोषित न्यूनतम मासिक वेतन उत्तर प्रदेश में 11,314 रुपये से लेकर दिल्ली में 18,456 रुपये तक है, जो दिल्ली एनसीआर में जीवनयापन के लिए नाकाफी है।
शिकायतों का समाधान करने के बजाय उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों ने अभूतपूर्व पुलिस दमन का सहारा लिया है और गर्भवती महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया।
CITU के सेक्टर 8 नोएडा और भंगेल स्थित कार्यालय सील कर दिए गए हैं और कई पदाधिकारियों को नज़रबंद किया गया है।
दिल्ली एनसीआर में कम से कम 26,000 रुपये प्रति माह का एक समान न्यूनतम वेतन लागू किया जाए।
श्रमिकों और ट्रेड यूनियन नेताओं के उत्पीड़न, झूठे मुकदमों और बेबुनियाद आरोपों पर तुरंत रोक लगे।
सभी गिरफ्तारियों की समीक्षा कर निराधार मामलों में तुरंत रिहाई हो। नज़रबंदी और कार्यालयों की सील हटाई जाए।
गिरफ़्तारी के आधार की समय पर सूचना, वकील तक पहुंच और FIR की प्रतियां सुनिश्चित की जाएं।
नए श्रम कोड श्रमिकों के न्यूनतम अधिकारों को समाप्त कर देंगे, अतः इन्हें वापस लिया जाए।
उन्होंने कहा है कि पार्टी का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था की समस्या मानने के बजाय श्रम मुद्दे के रूप में देखकर त्रिपक्षीय वार्ता से हल निकालना चाहिए। ईमानदार संवाद और ठोस कदम ही औद्योगिक शांति बनाए रख सकते हैं।




