लेखक: सुभाषचन्द्र
पेपर लीक बिल यानी Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 संसद से बहुमत से पास हो जाएगा क्योंकि उसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता है और वह भाजपा के NDA गठबंधन के पास दोनों सदनों में है।
इस बिल में सजा और जुर्माने के प्रावधानों के अलावा यह भी प्रावधान किया गया कि सभी जांच प्रक्रिया 2 महीने यानी 60 दिन में पूरी की जाएगी – इसके अलावा Fast Track Courts स्थापित कर चार्जशीट दायर होने के बाद रोज सुनवाई करके 3 महीने में ट्रायल पूरा कर दिया जाएगा जिसका मतलब है, 3 महीने में सजा का ऐलान कर दिया जाएगा।
क्या भारत की अदालतों में 3 महीने में सुनवाई पूरी होना संभव है ।ट्रायल कोर्ट चार्जशीट दायर होने के बाद अभियुक्तों को कम से कम एक महीना का समय देकर “समन” जारी करता है जिसे अभियुक्त तुरंत सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में चुनौती देता है जहां जितनी मर्जी जल्दी हो, 3 -4 महीने लग ही जाते हैं , मतलब सेशन और हाई कोर्ट में , फिर भी बात न बने तो सुप्रीम कोर्ट जाता है जहां कोई समय सीमा नहीं रहती।
मैं इस लेटलतीफी के बारे में 3 किस्से बता रहा हूँ जबकि ऐसे मामलों की भरमार है।
अमित शाह को 2018 में “हत्यारा” कहने के लिए लिए राहुल गांधी पर सुल्तानपुर MP/MLA कोर्ट में 4 अगस्त, 2018 को केस दर्ज किया गया था जिस पर कोर्ट ने 5 साल बाद 27 नवंबर, 2023 को राहुल गांधी के खिलाफ “समन” जारी किए, मुकदमा अभी भी लंबित है।
बीआरओ के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव की शिकायत पर (जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर सेना का अपमान करने का आरोप लगाया था) लखनऊ के MP/MLA कोर्ट ने 11 फरवरी, 2025 को राहुल गांधी को “समन” जारी किए।
राहुल गांधी “समन” रद्द कराने इलाहाबाद हाई कोर्ट चला गया लेकिन हाई कोर्ट ने उसकी अपील ख़ारिज कर दी – राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट चला गया और सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त, 2025 को राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी। अगली तारीख 5 महीने बाद 22 अप्रैल, 2026 तय की – सुप्रीम कोर्ट के जज थे जस्टिस SR Sharma और जस्टिस MM Sundresh। सुंदरेश जी सबरीमाला मंदिर की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई की बेंच में शामिल थे अब भगवान ही जाने सुप्रीम कोर्ट क्या कर रहा है इस केस का;
केजरीवाल के 2014 के आपत्तिजनक भाषण पर सुल्तानपुर कोर्ट ने 6 सितंबर, 2014 को “समन” जारी किए। केजरीवाल ने कहा था “जो कांग्रेस को वोट देगा, वो देश के साथ गद्दारी करेगा और जो भाजपा को वोट देगा, उसे भगवान भी माफ़ नहीं करेगा”। Section 125 of the Representaion of People Act, 1951 में FIR दर्ज हुई थी- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने के लिए मना कर दिय। एक अन्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर, 2016 को केजरीवाल पर सड़क जाम कर ट्रैफिक में अवरोध करने के आरोप में “समन” पर रोक लगा दी लेकिन आगे कुछ नहीं किया जिसका मतलब है मामला ठंडे बस्ते में भेज दिया। 6 सितंबर, 2014 के ‘समन” के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी, 2023 को को स्टे कर दिया और उसके खिलाफ चल रही Criminal Proceedings को भी अगले आदेश तक स्टे कर दिया।
उसके बाद क्या हुआ किसी को कुछ पता नहीं, मतलब मामला 12 साल से चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तो वैसे भी स्टे कोर्ट और बेल कोर्ट बन चुका है,
इसलिए मेरा मानना है कि पेपर लीक पर सही मंशा से कानून बनाया जा रहा है लेकिन उसके प्रभावी होने पर मुझे संदेह है।

(लेखक उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं)





