(संजय राय)
(नई दिल्ली)
झारखंड से जुड़े देश-विदेश के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों के संगठन झारखंड एकेडमिक फोरम (जेएएफ) ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया है। दिल्ली में आयोजित फोरम की बैठक में झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
फोरम के संस्थापक-अध्यक्ष एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर निरंजन कुमार ने कहा कि झारखंड राज्य की स्थापना युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के सपने के साथ हुई थी, लेकिन रोजगार और नियुक्ति प्रक्रियाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने उन उम्मीदों को कमजोर किया है।
उन्होंने कहा कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा गंभीर आरोपों के घेरे में रही, जिसके बाद राज्य सरकार को सीआईडी जांच के आदेश देने पड़े।
वहीं जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके अलावा उत्पाद सिपाही भर्ती की दौड़ के दौरान एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों की मौत और ओएमआर शीटों में कथित गड़बड़ियों की मीडिया रिपोर्टों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
फोरम का कहना है कि इन घटनाओं ने झारखंड के युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। संगठन ने कहा कि छात्र लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। झारखंड एकेडमिक फोरम ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के हितों की रक्षा और पारदर्शी व्यवस्था की मांग करना है।
फोरम ने सभी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, समयबद्ध एवं पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया तथा जेपीएससी और जेएसएससी में ढांचागत सुधार की मांग करते हुए देशभर के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से छात्र आंदोलन के समर्थन की अपील की।





