लेखक: मनोज श्रीवास्तव
परिवारवाद को समाजवाद, विस्वासघात को चरखा, नरसंहार को को न्याय, हर नीति में हिंदुओं का अपमान, जंगलराज को मंगलराज बताने वाली समाजवादी पार्टी की सांस 2027 को लेकर अटक गयी है। इसका सबसे ताजा उदाहरण समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा यूपी भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े पर की गयी ताजा टिप्पणी है। बता दें कि पिछली बार लखनऊ आये विनोद तावड़े ने पत्रकारों को पीडीए का मतलब “पराया धन अपना” बताया था। उसके जवाब में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि मुंबई का पैसा लूट कर मुंबई भेजा जायेगा। तावड़े के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि विनोद तावड़े के विषय मे उससे पूछ लीजिये जो समाजवादी पार्टी की सरकार में उत्तर प्रदेश में लूट का पैसा इन्वेस्ट करने के लिये मुंबई ले जाने का आरोपी है। महाराष्ट्र से इतना नफरत मत करिये। वह भी भारत माता के भू भाग का हिस्सा है।यूपी की जनता से लूटी गयी काली कमाई को खपाने के एवज में एक महाराष्ट्रीयन को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। आरोप है कि महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी उसी को पट्टा कर दिया गया है।जब-जब यूपी में सपा की सरकार रही तब-तब यूपी की संपदा को उसी ने महाराष्ट्र में इन्वेस्टमेंट किया। तावड़े ने मुंबई के उस गुर्गे को बार-बार बुरी तरह पटका है। छत्रपति शिवाजी की माटी में राष्ट्रवाद की विचारधारा पर तप कर तावड़े पैदा हुये हैं। किसी खानदान में पैदा होकर जीते जी पिता की राजनैतिक विरासत की खारिज दाखिल कर, गद्दी छीन कर नेता नहीं बने हैं। 2026 में बिहार में जब आप राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन को जिताने गये थे तब आपके व इंडी गठबंधन खास कर राष्ट्रीय जनता दल की रणनीति को जिन्होंने धूल चटाया था उन्हीं का नाम है “विनोद तावड़े” है। यूपी की जनता जानती है कि 2017 से बंद हुई “सैफई नाइट” की तकलीफ मिटाने के लिये दिन-रात पार्टी कार्यालय में रील देख-देख कर आप टूट चुके हैं।रील में डूबे रहने का आपका क्रम अनवरत चलता रहे। बता दें कि 2024 में अखिलेश यादव जी हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनवाने गये थे।उसी चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी वहां जलेबी की फैक्ट्री लगवाने लगे थे। वहां कांग्रेस को करारी पराजय मिली। उसके बाद 2025 में अखिलेश यादव जी बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार में गये। वहाँ इन्होंने सार्वजनिक मंचों से बार-बार यह घोषणा किया था कि जो चुनाव परिणाम बिहार की जनता देगी वही चुनाव परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता देगी। अखिलेश यादव जी अपना भविष्यफल आपने स्वयं सीता माता की जन्मभूमि बिहार में घोषित किया है अब वह झूठी भी नहीं साबित हो सकती। चाहे जितना उत्तम या घटिया चाल चलें अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भगवान श्रीराम के जन्मभूमि पर उत्तर प्रदेश में आपकी पराजय टलने वाली नहीं है।
लोकसभा में सांसदों की दृष्टि से तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरियाणा के बाद बिहार में मिली हार के दर्द से उबर भी नहीं पाये थे कि 2026 में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में चले गये। लगातार तीन बार की मुख्यमंत्री रहीं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को चौथी बार जिताने के लिये। वहां भी मां काली के शरण में इन्होंने कहा कि जो चुनाव परिणाम बंगाल की जनता सुनायेगी वही चुनाव परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता भी सुनायेगी। काली माता तो छोड़ने वाली नहीं, अब भागे भी नहीं भाग पाओगे। 2027 में हारते ही दोनों चाचा एक ऊपर वाले जो गृहमंत्री अमितशाह को संसद के दरवाजे पर धीरे से पर्ची पकड़ाते कैमरे में कैद हो गये थे तथा दूसरे जो उत्तर प्रदेश की विधानसभा में सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर इंगित करते हुये स्वीकारें हैं कि तीन साल आपके भी संरक्षण में रहा हूँ। जिसके कारण परिवारवाद पर इतराने वाले अखिलेश यादव ने उन्हें उत्तर प्रदेश में नेता विरोधी दल नहीं बनाया। 2022 में मिली करारी हार के बाद बसपा को हड़पने की नीयत से आपने अवसरवादी पीडीए की कल्पना किया। अवसरवादी इस लिये कि व्यवहार में आप ब्राह्मण पत्रकार की जाति पूछोगे और मिश्रा सुनते ही पत्रकार को “मिश्रा….शर्म करो मिश्रा जी” कह कर अपनी खीझ बुझाते हो। जहां आप पीडीए और परिवारवाद को मजबूती से स्थापित कर सकते थे वहां आपने ब्राह्मण बैठा दिया। शिवपाल यादव की जगह माता प्रसाद पांडेय को नेता प्रतिपक्ष बना दिया जबकि आपके पास अनेक युवा मुस्लिम, दलित, महिला-पुरूष विधायक थे। तब आपको शिवपाल यादव को नीचा दिखाना था।
अभी भी अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी को मजबूत करने से ज्यादा बसपा के नेताओं को हड़पने और भाजपा में उसके नाराज नेताओं की खोज में समय गवां रहे हैं। भाजपा-बसपा के गद्दारों को एक बार भुना कर 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका अच्छा लाभ उठाया। जिन स्थानों भाजपा और बसपा से आया व्यक्ति सांसद बन गया है वहां समाजवादी पार्टी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की रोज फौजदारी आम बात हो गयी है। बाहर से आकर सांसद बने लोगों को आपके लोग लगातार सार्वजनिक बेज्जती कर रहे हैं जिसका खामियाजा 2027 के विधानसभा में मिलेगा। तभी आप द्वारा बिहार और बंगाल में जनता जनार्दन को दिया गया वचन पूरा होगा। फिर आपको बता दूं आप चाहे जितना पिंगल पढ़ लें विनोद तावड़े को नहीं जान पायेंगे। विनोद तावड़े विचारधारा की भट्ठी में तप कर कुंदन बने, तब राजनैतिक क्षितिज पर चमक रहे हैं। महाराष्ट्र में जो कार्यकर्ता आज मुख्यधारा के नेता बन कर उभरे हैं उनमें अधिकांश को विनोद तावड़े ने विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के रूप में तरासा है। विनोद तावड़े उन नेताओं में नहीं हैं जो कभी कमर के नीचे वार करें संकट में भी सिद्धांत नहीं मरने देते। लक्ष्य प्राप्त करने के लिये जमीर बेंच देने वाले उनसे कत्तई नहीं टकराते।अपनी ठसक में मस्त तावड़े पुरुषार्थ को राजनीति जीते हैं। महाराष्ट्र में भाजपा को बहुत बड़ी वैचारिक युवाओं की फौज सौंप कर राष्ट्रीय राजनीति में अपने परिश्रम से अपनी धमक बनाये हैं। जबकि अखिलेश जी आप पल-पल में पीडीए की परिभाषा ही बदलने में अपना समय व्यर्थ कर दे रहे हैं। संगठन की आवश्यकता के अनुसार तावड़े अभी तक तो केवल लखनऊ तक ही सीमित थे जल्द ही वह उत्तर प्रदेश के छह क्षेत्रों में भी जाने वाले हैं। उसके बाद जिले-जिले फिर आपके राजनैतिक दांव-पेंच, कील-कांटे कब उखड़ कर बिखरे पड़े मिलेंगे आपको अंदाजा भी नहीं होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)





