श्री रामचरितमानस ऐसा महाकाव्य है जो हर युग में है प्रासंगिक: डॉ प्रदीप सिंघल
लेडी इरविन कॉलेज और संस्कृति संज्ञान संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जेन जी ने किया रामचरित मानस के दोहे-चौपाइयों का गायन
दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी इरविन कॉलेज और ‘संस्कृति संज्ञान’ संस्था के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को ‘मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस एवं श्रीरामचरितमानस दोहा वाचन प्रतियोगिता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कॉलेज के लाइब्रेरी रीडिंग रूम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में ‘संस्कृति संज्ञान’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंघल ने कहा कि श्रीरामचरितमानस ऐसा महाकाव्य है, जो हर युग में प्रासंगिक है। ऋषि-मुनियों से लेकर आज की जेन-जी पीढ़ी तक, सभी के लिए मानस औषधि के समान है। यह चरित्र निर्माण, शील और व्यक्तित्व विकास के साथ पारिवारिक व्यवस्था में समन्वय और प्रेम बनाए रखने के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि प्रात:काल मानस की दोहा-चौपाइयों का पाठ अथवा गायन दिनभर मानसिक ऊर्जा और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। मानस की समृद्ध शब्द-संपदा संचार कौशल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता लेडी इरविन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. नीलिमा अस्थाना ने की। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में भी रामचरितमानस की प्रासंगिकता बनी हुई है। मानस जीवन के अनेक प्रश्नों का उत्तर देती है और जीवन की आचार संहिता का मार्गदर्शन करती है। उन्होंने राम शलाका का भी उल्लेख किया। उन्होंने डॉ. सिंघल के रामचरितमानस के प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना की।
मुख्य अतिथि और अमर उजाला के एग्जीक्यूटिव एडिटर राज किशोर तिवारी ने कहा कि रामचरितमानस का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। मानस समाज का संविधान है और जीवन के विभिन्न कार्यों के लिए इससे मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन कम से कम छह मिनट रामचरितमानस का अध्ययन करने का आग्रह किया।
विशिष्ट अतिथि रीमा गौतम ने कहा कि रामचरितमानस ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने अपने परिवार में बचपन से होने वाले मानस के नियमित पठन-पाठन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी वातावरण से उन्हें भी मानस पढ़ने की प्रेरणा मिली।
विशिष्ट अतिथि और आज दैनिक के ब्यूरो चीफ संजय राय ने कहा कि वह आज जो कुछ हैं, उसमें रामचरितमानस की महत्वपूर्ण भूमिका है। मानस ने उनके जीवन को अत्यंत प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि मानस व्यक्ति को हृदय से सोचने का दृष्टिकोण देती है। इसे कहीं से भी पढ़ने पर जीवन के लिए कोई न कोई उपयोगी ज्ञान अवश्य मिलता है।
इस अवसर पर आयोजित श्रीरामचरितमानस दोहा वाचन प्रतियोगिता में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों के 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने मानस के दोहों और चौपाइयों का वाचन करने के साथ उनके संदेशों की व्याख्या की और बताया कि उन्हें जीवन में किस प्रकार आचरण में उतारा जा सकता है। प्रतियोगिता के दौरान पूरा लेडी इरविन कॉलेज परिसर रामचरितमानस के दोहों और चौपाइयों से गूंज उठा।








