【44 करोड़ डॉलर की कटौती कर अमेरिका ने दिया पाक को आर्थिक झटका】

【44 करोड़ डॉलर की कटौती कर अमेरिका ने दिया पाक को आर्थिक झटका】

★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{पाकिस्तान की ठुकराई गई कश्‍मीर पर खुली चर्चा की मांग UNSC में और अब अमेरिका कटौती कर देगा 4.1 अरब डॉलर}
[पाकिस्तान ने कहा कि विकासशील देशों को दी जाने वाली मदद को घटाने की ट्रम्प की रणनीति का है हिस्सा]
(ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तानी नेता अमेरिकी अधिकारियों को मूर्ख बनाते हुए आतंकियो को देते हैं सुरक्षित पनाह)

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♂÷जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटने के मुद्दे को अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर उठाने की पाकिस्‍तान की कोशिश नाकाम रही। इस मुद्दे पर खुली चर्चा की पाकिस्‍तान की मांग को संयुक्‍त राष्‍ट्र ने ठुकरा दिया है। दरहसल, आज भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे आर्टिकल 370 को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद चीन के आग्रह पर अनौपचारिक बैठक के लिए सहमत हुआ है उसमें बंद कमरे में गुप्‍त मंत्रणा होगी। लेकिन पाकिस्तान चाहता है कि इस मुद्दे पर संयुक्‍त राष्‍ट्र के खुले मंच पर चर्चा हो ताकि उसको अपने प्रोपैगेंडा को प्रचारित-प्रसारित करने का मौका मिले।
संयुक्‍त राष्‍ट्र ने पाकिस्तानन की इस मांग को ठुकरा दिया है। वही दूसरी और आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान को अमेरिका ने एक नया झटका दिया है। अमेरिका ने ‘केरी लूगर बर्मन एक्ट’ के तहत दी जाने वाली आर्थिक मदद में 44 करोड़ डॉलर की कटौती कर दी है। इस कटौती के बाद पाकिस्तान को 4.1 अरब डॉलर की धनराशि दी जाएगी।
पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक मदद में कटौती के फैसले के बारे में इस्लामाबाद को इमरान खान के अमेरिकी दौरे से तीन सप्ताह पहले ही आधिकारिक सूचना दे दी गई थी।
इस्लामाबाद अमेरिका से यह आर्थिक मदद ‘पाकिस्तान एन्हैंस पार्टनरशिप एग्रीमेंट 2010’ के जरिए हासिल करता है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, 90 करोड़ डॉलर की बची हुई अमेरिकी मदद पाने के लिए पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह ही पेपा की समयसीमा बढ़ा दी थी।
अक्टूबर 2009 में अमेरिकी कांग्रेस ने ‘केरी लूगर बर्मन ऐक्ट’ पास किया था और इसे लागू करने के लिए सितंबर 2010 में पेपा पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत पाकिस्तान को पांच साल की अवधि में 7.5 अरब डॉलर की मदद दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। इस अधिनियम को पाकिस्तान की आर्थिक संरचना में निवेश करने के मकसद से लाया गया था जिसके तहत देश के ऊर्जा और जल संकट को दूर किया जाना था।
हालांकि, पेपा समझौते के लागू होते ही पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते बिगड़ने शुरू हो गए थे। इसका असर अमेरिका की पाकिस्तान के लिए उसकी प्रतिबद्धताओं और आर्थिक मदद पर भी पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक मदद में कटौती से पहले 4.5 अरब डॉलर की धनराशि आवंटित की जानी थी जो अब घटकर 4.1 अरब डॉलर पर पहुंच गई है।
पाकिस्तान के अधिकारियों ने अमेरिका के फैसले पर कहा कि यूएस द्वारा दी जाने वाली धनराशि में कटौती केवल पाकिस्तान के लिए ही नहीं की गई है बल्कि यह डोनाल्ड ट्रंप विकासशील देशों को दी जाने वाली मदद को घटाने की रणनीति का ही हिस्सा है।
बता दे, यूएस-पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ सालों से तनावपूर्ण रहे हैं। जनवरी 2018 में ट्रंप ने एक ट्वीट में पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। ट्रंप ने ट्वीट किया था कि यूएस ने बेवकूफी करते हुए पाकिस्तान को करीब 33 अरब डॉलर की मदद मुहैया कराई और पाकिस्तानी नेता अमेरिकी अधिकारियों को मूर्ख बनाते हुए आतंकियों को सुरक्षित पनाह देते रहे। तीन दिनों बाद ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1.3 अरब डॉलर की सुरक्षा मदद भी रोक दी थी।

Mukesh Seth

Chief Editor

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