★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{4000 करोड़ का कर्जा! संपत्ति बेचने को मजबूर शपूरजी पलोनजी परिवार, टाटा सन्स में था अहम योगदान}
[शपूर जी समूह में 9 महीने में 2000 करोड़ की धनराशि डाल चुका है परिवार, अब सोलर पॉवर प्लान्ट व रोड परिसम्पत्तियों को बेचने की चल रही बात]
(मोदी सरकारी की सख़्ती के चलते कर्ज़ दबाए बैठे उधोपतियों को चुकाने पड़ रहे हैं परिसम्पत्तियों को बेचकर कर्ज़े)

♂÷किसी समय टाटा ग्रुप की जिम्मेदारी संभालने वाले इंसान के परिवार की कंपनी शपूरजी पलोनली समूह इन दिनों कर्ज में डूबी हुई है। कर्जा उतारने के लिए शपूरजी समूह ने अपने सोलर पावर प्लांट और रोड परिसंपत्तियों को बेचने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के अनुसार इस मामले से सीधे सम्बन्ध रखने वाले व्यक्ति का कहना है कि कंपनी पर लगभग 4000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
आपकों बता दें कि 154 साल पुराने इस बिजनेस ग्रुप का मालिकाना हक पलोनजी मिस्त्री और उनके परिवार के पास है। कंपनी सौदे के संबंध में निजी निवेशकों से बातचीत चल रही है। इस सौदे के अगले साल मार्च तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
कंपनी शपूरजी पलोनजी समूह की टाटा ग्रुप में 111 अरब डॉलर की हिस्सेदारी है। इस परिवार के साइरस मिस्त्री टाटा समूह के साल 2012-2016 के बीच चेयरमैन रह चुके हैं। साइरस के पास टाटा संस में 18.4 फीसदी की हिस्सेदारी है। साल 2016 में उन्हें वोटिंग के जरिये पद से हटा दिया गया था।
कंपनी शपूरजी पलोनजी समूह की परिसंपत्तियां बेचे जाने और समूह के कुल कर्ज से जुड़े सवाल पर कंपनी के प्रवक्ता ने कमेंट करने से मना कर दिया। समूह कंस्ट्रक्शन, वाटर प्यूरीफायर से लेकर बंदरगाहों के संचालन का काम करता है। कंपनी जिन सोलर पावर प्लांट और रोड परिसंपत्तियों के बेचने की तैयारी में है। उसमें एक प्लांट 298 मेगावाट बिजली पैदा कर रहा है जबकि और दूसरा प्लांट 900 मेगावाट की क्षमता का है।
आपकों बता दें कि कर्ज के कारण अपनी हिस्सेदारी बेचने वाली शपूरजी पलोनजी समूह एकमात्र बिजनेस ग्रुप नहीं है। बढ़ते कर्ज के कारण सुभाष चंद्रा के स्वामित्व वाली एसेल ग्रुप और अनिल अंबानी का रिलायंस ग्रुप भी अपनी परिसंपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने की तैयारी में जुटे हैं।
इस मामले के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि यह परिवार पिछले 9 महीने में समूह में 2000 करोड़ रुपये डाल चुका है। शपूरजी पलोनजी आने वाले समय में अपने बंदरगाह के बिजनेस को बढ़ाने के लिए भी निवेशकों की तलाश में हैं। कंपनी अभी दो बंदरगाहों का संचालन कर रही है।
इन बन्दरगाहों में से ओडिशा और मुंबई के पास है। इस कंपनी पश्चिमी गुजरात में भी एक अन्य बंदरगाह और गैस टर्मिनल फैसिलिटी का निर्माण कर रही है।
विदित हो कि मोदी सरकार ने सरकारी कर्ज़ को वापस करने के लिए बेहद सख़्त रुख अख्तियार किया हुआ है जिसके चलते तमाम कर्ज़मन्द उधोपतियों से अब तक कई लाख करोड़ की धनराशि अब तक सरकार वसूल चुकी है।






















