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लेखक-अमित सिंघल

मनमोहन सिंह सरकार की शुरुवात में, वर्ष 2004-05, भारत में सभी बैंको – सरकारी एवं निजी – में कुल 8,58,560 कर्मचारी थे। वर्ष 2014-15 में यह संख्या बढ़कर 11,80,069 हो गयी थी।

2014-15 के आंकड़े लिए है क्योकि RBI वेबसाइट पर पहला ऐसा आंकड़ा वर्ष 2004-05 के लिए उपलब्ध है। वैसे भी वर्ष 2014-15 वाली नियुक्ति की प्रक्रिया सोनिया काल में शुरू हुई होगी।

यानी कि मनमोहन सरकार काल के लगभग दस वर्षो के दौरान 3,21,509 कर्मचारियों की वृद्धि।

मोदी सरकार ने वर्ष 2014-15 में शुरुवात 11,80,069 बैंक कर्मचारियों से करी।

वर्ष 2023-24 में कुल 17,88,039 बैंक कर्मचारी हैं।

यानी कि 9 वर्षो के दौरान 6,07,970 कर्मचारियों की वृद्धि।

लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि इस दौरान निजी क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की संख्या तीन गुने से अधिक (8,45,841 + 27,527 + 1,51,100 + 7,556 = 10,32,024) हो गयी है; जबकि सरकारी बैंको में 7,56,015 कर्मी है। वर्ष 2014-15 में निजी क्षेत्र के बैंको में कुल 3,35,615 कर्मी थे।

महत्वपूर्ण यह हैं कि निजी क्षेत्र के बैंक सरकारी क्षेत्र के बैंको की तुलना में अधिक लोगो को नौकरी दे रहे हैं।

एक अन्य बात महत्वपूर्ण है। निजी क्षेत्र के बैंक में अधिकारियो की संख्या में अत्यधिक वृध्दि (तीन गुना) हुई है, जबकि क्लर्क एवं अन्य स्टाफ की संख्या कम हुई है।

यह दर्शाता है कि भारत knowledge economy या ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। साथ ही रूटीन कार्य (जैसे नोट गिनना; बैंक ड्राफ्ट क्लियर करना, इत्यादि) का ऑटोमेशन हो रहा है, डिजिटल लेन-देन (UPI) हो रहा हैं, जिससे क्लर्क की संख्या कम हो रही, जबकि निर्णय लेने और कठिन कार्य (जैसे कि लोन देना, निवेश करना, रिस्क असेसमेंट करना, इत्यादि) करने के लिए अधिकारियो की डिमांड बढ़ रही है।

सारे आंकड़े रिज़र्व बैंक से लिए गए है। RBI ने वर्ष 2023-24 की आंकड़े इसी 26 दिसंबर को रिलीज़ किया है।

(लेखक रिटायर्ड IRS ऑफिसर हैं)

By Mukesh Seth

Chief Editor

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