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लेखक-डॉ. राजीव मिश्रा

नहीं, मैं फैमिली वैल्यूज सीखने के लिए यह फिल्म देखने नहीं गया था. ना ही मित्रों ने चर्चा की तो उनका दिल रखने के लिए देख आया. फिल्में मैं शुद्ध रूप से अपने सुख के लिए देखता हूं, और बिल्कुल उसी उद्देश्य से देखने गया था।

पहली बात, सवा तीन घंटे आसानी से कटे.. फिल्म सहज और मनोरंजक है. यह फिल्म देखने का मेरा पहला टेस्ट है, फिल्म देखते हुए नींद नहीं आई, उबासी तक नहीं ली..बीस बार घड़ी भी नहीं देखी।

दूसरा, सिनेमा के कॉम्पोनेंट बहुत ही सधे हुए हैं. फिल्म अपने जॉनर की सफल प्रस्तुति है. कुछ भी आंखों को खटकता नहीं है।

तीसरा पक्ष है कथानक… तो उसकी पहली बात यह समझनी है कि यह जिस जॉनर की फिल्म है उसके मूड में जाकर देखनी होगी. जैसे एक कॉमेडी फिल्म में हिस्टोरिकल एक्यूरेसी नहीं खोजी जाती, वैसे ही इस जॉनर की फिल्म में फिजिक्स के नियम नहीं पढ़े जाते. अतिरंजना, exaggeration, किस्सागोई की विधा की एक कला है और वह इस फिल्म के कथानक का अंग है. प्रश्न है कि इस फिल्म में अतिरंजना का प्रयोग सुरुचिपूर्ण रूप से हुआ है या नहीं? और मेरी दृष्टि में, इस टूल का उपयोग बहुत ही सफल तरीके से हुआ है. इस जोन में एक्टिंग करते हुए, इतने लाउड कैरेक्टर्स को विश्वसनीय तरीके से निभाना आसान नहीं था. अल्लू अर्जुन और रश्मिका, दोनों ने बहुत ही प्रभावी काम किया है. अर्जुन ने एक्टिंग की नई बाउंड्रीज डिफाइन की हैं।

आखिरी पक्ष है चरित्र… सभी पात्र अंत तक अपने चरित्र के अनुकूल व्यवहार करते हैं. कोई डिस्क्रिपेंसी नहीं है. सिर्फ एक दृश्य… जब श्रीवल्ली की प्रेग्नेंसी की खबर मिलती है, उसके बाद का सीक्वेंस थोड़ा अनावश्यक लंबा और आंखों में खटकने वाला लगा.. एक पुरुष को कोमल और संवेदनशील दिखाने के लिए उसको साड़ी पहनाना और रोते हुए दिखाना अनावश्यक लगा. इस चरित्र निरूपण के लिए बेहतर सिनेमैटिक टूल प्रयोग किए जा सकते थे. फिर भी, यह मेरी व्यक्तिगत पसंद है… निर्देशक ने दूसरा रास्ता चुना है, और उसको निपुणता से हैंडल करने में सफल हुआ है. बल्कि दृश्य संयोजन और एक्टिंग की दृष्टि से यह फिल्म का सबसे जटिल और सिनेमेटिकली एंबीशियस दृश्य था।

क्या हल्के फुल्के मनोरंजन के लिए बनी यह फिल्म इतनी गंभीर समालोचना डिजर्व करती है? नहीं, यह फिल्म क्लासिक बनने के लिए नहीं बनी है... लेकिन यह एक गंभीर फिल्मकार की गंभीर प्रस्तुति है जो सिनेमा के टूल्स का प्रयोग करने में प्रवीण है. और मैं स्वयं को सिनेमा का गंभीर स्टूडेंट मानता हूं, इस दृष्टि मुझे यह एक सफल फिल्म लगी. बाकी, आप इस रिव्यू को अनावश्यक समझ कर इग्नोर करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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(लेखक लंदन में चिकित्सक हैं)

By Mukesh Seth

Chief Editor

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