जीडीए और गाजियाबाद नगर निगम के संग साथ जैसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती है नोएडा में

जीडीए और गाजियाबाद नगर निगम के संग साथ जैसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती है नोएडा में

(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)

क्या नगरीय अथवा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को अपने द्वारा विकसित क्षेत्रों की नागरिक सुविधाओं तथा रखरखाव के कार्यों से मुक्त रहना चाहिए?
यहां एक प्रश्न और भी महत्वपूर्ण है कि जब सीमित राजतंत्र के साथ लोकतंत्र की व्यवस्था वाले कई देश भरपूर तरक्की कर सकते हैं तो नोएडा जैसे शहर में केवल राजतंत्र अर्थात प्राधिकरण को ही सभी कार्यों का नियंता बनाए रखने की क्या आवश्यकता है?
ये दोनों प्रश्न बीते तीन दिन में हुए दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से उत्पन्न हुए हैं।
गत 28 जनवरी को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने अपनी छः विकसित परियोजनाओं स्वर्णजयंतीपुरम,
कर्पूरीपुरम (बी-ब्लॉक),
भाऊराव देवरस (केए- ब्लॉक एवं केबी- ब्लॉक) प्रताप विहार,
गोविन्दपुरम (सी.पी. ब्लॉक),
राजनगर एक्सटेंशन मुख्य बंधा रोड,
तथा पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मधुबन बापूधाम स्थित 56 एम.एल.डी. क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को गाजियाबाद नगर निगम को विधिवत हस्तांतरित कर दिया। उधर बीते कल उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के गत 13 अगस्त 2025 को दिए गए आदेश के दृष्टिगत नोएडा में नगर निगम जैसी व्यवस्था बनाने पर विचार तो किया परंतु साथ ही साथ नोएडा के विशेष महत्व का कारण बताते हुए इस विचार को खारिज भी कर दिया। उत्तर प्रदेश के जीडीए समेत सभी नगरीय विकास प्राधिकरणों में यह व्यवस्था है कि उनके द्वारा कॉलोनी, सड़कों और ढांचागत सुविधाओं को विकसित करने के बाद स्थानीय नगर निगम या नगर पालिका को रखरखाव के लिए सौंप दिया जाता है। केवल औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को इस व्यवस्था से दूर रखा गया है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा एकीकृत औद्योगिक नगर का विकास किया जाता है। परंतु केवल इस कारण से औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को उनके द्वारा विकसित क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं को भी संचालित करने की दोहरी जिम्मेदारी देने की क्या आवश्यकता है? जीडीए उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल बताते हैं कि विकास प्राधिकरणों की विशिष्टता आवासीय, औद्योगिक, व्यवसायिक तथा संस्थागत परियोजनाओं को विकसित करने तथा ढांचागत सुविधाओं को स्थापित करने की होती है। नगर निगम या नगर पालिका जैसे स्थानीय निकाय नागरिक सुविधाएं प्रदान करने तथा उनके रखरखाव के लिए होते हैं। उन्होंने बताया कि शहरी सेवाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम उठाते हुए प्राधिकरण की विभिन्न विकसित आवासीय योजनाओं, प्रमुख मार्गों एवं आधारभूत ढांचा परियोजनाओं का विधिवत हस्तांतरण संबंधित निकाय को निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत किया गया है। इसके लिए बाकायदा नगर निगम गाजियाबाद को 66.32 करोड़ रुपए भी दिए जाएंगे जिसमें से आधी धनराशि परसों ही हस्तांतरित कर दी गई। अब जीडीए अपने द्वारा विकसित परियोजनाओं तथा ढांचागत सुविधाओं के संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी से मुक्त होकर नयी विकास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा। संपत्ति का स्वामित्व तब भी विकास प्राधिकरण के पास ही रहता है।इसके विपरीत नोएडा जैसे औद्योगिक विकास प्राधिकरण न विकास परियोजनाओं पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं और न नगरीय सुविधाओं पर।इसी जबरन ओढ़ कर रखी गई दोहरी जिम्मेदारियों के दुष्परिणाम के चलते सेक्टर 150 के एक भूखंड में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर युवराज की मौत हो जाती है।

Mukesh Seth

Chief Editor

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