डिजिटल बाढ़ के बीच प्रिंट की विश्वसनीयता बरकरार- अशोक चक्रधर-

हिंदी मासिक पत्रिका ‘कलरव’ के प्रकाशन के 20 वर्ष पूरे होने पर कांस्टीट्यूशन क्लब में समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर ‘प्रिंट का कालजयी स्वरूप’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि प्रो. अशोक चक्रधर ने की।
प्रो. चक्रधर ने कहा कि डिजिटल क्रांति और सोशल मीडिया के दौर में भी लघु पत्रिकाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। ‘कलरव’ जैसी पत्रिकाओं ने शब्दों और विचारों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान कायम की है। उन्होंने कहा कि मुद्रित शब्द केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों को स्थायित्व देने का सशक्त माध्यम है। प्रिंट और डिजिटल माध्यमों को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी मानकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
समारोह में वैश्विक हिंदी परिवार के संरक्षक अनिल शर्मा जोशी, व्यंग्यकार प्रो. आलोक पुराणिक, इतिहासविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. अश्विनी महाजन और वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी समेत अनेक साहित्यकार, पत्रकार और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। अनिल शर्मा जोशी ने कहा कि सूचनाओं की बाढ़ के दौर में भी लोगों का भरोसा प्रिंट माध्यम पर कायम है। उन्होंने लघु पत्रिका आंदोलन की भूमिका को भी रेखांकित किया।
‘कलरव’ के संपादक अनिल तिवारी ने पत्रिका की 20 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। प्रबंध संपादक विक्रम उपाध्याय ने कहा कि ‘कलरव’ का सफर केवल पत्रिका के प्रकाशन तक सीमित नहीं, बल्कि विचार और विमर्श को जन-जन तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास है। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह ने पत्रिका की निरंतरता को संघर्ष और समर्पण का उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में ‘कलरव’ के विशेषांक तथा ‘कलरव प्रकाशन’ से प्रकाशित ज्योतिष : जीवन पथ का विज्ञान और भारतीय नारी पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। पत्रिका से लंबे समय से जुड़े सहयोगियों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र तिवारी और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गौरी तिवारी ने किया। अंत में संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार राम शिरोमणि शुक्ल ने आभार जताया तथा राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।




