(संजय राय)
(नई दिल्ली)
संसाधनों को साझा करके समाज के भीतर सहयोग की मजबूत श्रृंखला तैयार करे भूमिहार ब्राह्मण समाज- डॉ. रतन शर्मा
बीबीपी ट्रस्ट का मकर संक्रांति स्नेह मिलन समारोह भव्य रूप से संपन्न
प्रयागराज से लोकसभा सांसद उज्जवल रमण सिंह ने कहा है कि भूमिहार ब्राह्मण समाज का समग्र विकास शिक्षा, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण से ही संभव है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि मकर संक्रांति जैसे पर्व पर आयोजित होने वाले स्नेह सम्मेलन जैसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और सकारात्मक संवाद के प्रभावी मंच होते हैं।
उज्जवल रमन सिंह ने रविवार को भूमिहार ब्राह्मण परिवार ट्रस्ट (बीबीपी ट्रस्ट), एनसीआर-गाजियाबाद द्वारा आयोजित मकर संक्रांति स्नेह मिलन समारोह में बोलते हुए बतौर मुख्य अतिथि ये उद्गार व्यक्त किये।
स्नेह मिलन समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 700 से अधिक भूमिहार समाज के बंधुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथिगण बालेश्वर त्यागी (पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार), केसी त्यागी (पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ राजनेता), अतुल कुमार राय (पूर्व सांसद, घोसी–मऊ), डॉ. संजय राय (प्रख्यात कोविड वैक्सीन विशेषज्ञ), अजीत सिंह (प्रधान संपादक, भोजपुरी संगम पत्रिका) एवं गोपाल राय (राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिंदू रक्षा परिषद) ने संयुक्त रूप से सामाजिक एकता एवं समरसता, शिक्षा के विस्तार, युवाओं के मार्गदर्शन, स्वास्थ्य जागरूकता, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और संगठित सामाजिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर भूमिहार ब्राह्मण परिवार ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. रतन शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, महिला सहभागिता, सामाजिक सहयोग और नैतिक मूल्यों का संतुलित विकास किया जाए। उन्होंने संसाधन साझा करने और समाज के भीतर सहयोग की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करने पर जोर दिया और कहा कि हमारी सामाजिक एकता भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी।

समारोह के दौरान मेधावी छात्रों एवं विशिष्ट जनों का सम्मान, संस्था की गतिविधियों का संक्षिप्त प्रतिवेदन तथा सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श भी किया गया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में ट्रस्ट के ट्रस्टी सदस्यों एच.एन. राय, उपेन्द्र राय, सुभाष राय, रमेश राय, श्रीराम राय, अभय राय, अनिल राय, आनंद बिहारी राय, आर. के. राय, रजनीश राय, भानू राय, पीके राय, दिनेश सिंह, अम्लेश राय, देवेश राय एवं अन्य सहयोगी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का समापन खिचड़ी चूड़ा एवं पारंपरिक
व्यंजनयुक्त भोजन के बाद किया गया।
