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★मुकेश सेठ★
◆मुम्बई◆
{निडर सम्पादक,बेख़ौफ़ स्वतंत्रता सेनानी रामाराव कर चुके थे बेबाक लेखनी की वजह से जेल यात्राएँ }

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[अविभाजित भारत के करांची से 1919 में प्रारम्भ की क़लम को हथियार बनाने की अनथक यात्रा जो 1960 में आजाद भारत मे आत्मकथा के पश्चात ही थमी]
(भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रामाराव को वर्ष 1950 के बाद ही सम्मान हेतु पहुँचाया राज्यसभा)
♂÷फ़लक में अनगिनतसितारें टिमटिमाती रहते है किंतु “ध्रुव तारे” की जगमगाहट के सम्मुख सभी तारे अपनी अहमियत खोते से नज़र आते है और”ध्रुवतारा”अनंतकाल से लेकर अनन्तकाल तक लोगो को आकर्षित व प्रकाशित करता रहेगा।क्योंकि उसको स्वयँ सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने अपने प्रियभक्त ध्रुव को आशीर्वाद प्रदान की थी कि जब तक ब्रम्हाण्ड रहेगा लोग तेरे नाम के साथ तेरी चमकभरी खूबसूरती को भी स्मरण करते रहेंगे।
कुछ ऐसे ही देश दुनियां के पत्रकारिता जगत के “आसमाँ”पर अपनी बेख़ौफ़, बेबाक,बेलौस क़लम के योद्धा रहे गोलोकवासी कोटमराजू रामाराव भी है।

अविभाजित भारत से लेकर दो टुकड़े में बटकर आज़ाद भारत मे अपने क़लम की धार से ख़बरी दुनियां में एक सर्वाधिक बड़े हस्ताक्षरों में से एक रहे संपादक व जाने-माने स्वाधीनता सेनानी जिनको देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किसी सम्पादक/पत्रकार को 1952 में राज्यसभा सदस्य बनाकर उक्त पद को सम्मानित करने का कार्य किया था।

श्री कोटमराजू रामा राव अपने दौर के एक ऐसे अकेले पत्रकार थे जो 25 से अधिक समाचार पत्रों में कार्यशील रहे इन पत्र-पत्रिकाओं में अविभाजित भारत के लाहौर से प्रकाशित लाला लाजपत राय का”दी पीपुल”(1936),कराची का दैनिक “दी सिंध ऑब्जर्वर”(1921), मुंबई का”द टाइम्स ऑफ इंडिया” (1924),चेन्नई का”दी स्वराज्य”(1935),कोलकाता का “दी फ़्री इंडिया”(1934),नई दिल्ली का”दी हिंदुस्तान टाइम्स”(1938),इलाहाबाद के”दी लीडर”(1920),”दी पायोनियर”(1928),पटना का दैनिक”दी सर्चलाईट”(1950)थे। किंतु रामा राव जी को ऐतिहासिक प्रसिद्धि मिली जब उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के दैनिक समाचार पत्र नेशनल हेराल्ड वर्ष1938 से 1946 तक लखनऊ में संपादन किया। ढेर सारे अखबार बदलने पर रामा राव के साथी ने टिप्पणी की थी कि वे अपने जेब में संपादकीय की प्रति और दूसरे जेब में त्याग पत्र रखते थे।

चिराला आंध्र प्रदेश में 9 नवंबर वर्ष 1896 को जन्मे तेलुगू भाषी रामा राव ने मद्रास विश्वविद्यालय से 1917 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातक परीक्षा पास की और वहीं अंग्रेजी भाषा का अध्यापन भी किया।पत्रकारिता में उनका प्रवेश चेन्नई में ब्रह्म समाज की पत्रिका दी ह्यूमेनिटी से हुआ।फिर टी.एल.(साधू)वासवानी के “दी न्यू टाइम्स”(1919)में अखंड भारत के कराची में उन्होंने कार्य किया। अपने अग्रज संपादक के.पुन्नया के दैनिक “दि सिंध ऑब्जर्वर”में सहसंपादक बने।
चार दशक के अपने पत्रकारिता जीवन यात्रा में रामा राव ने दो विश्व युद्धों के दौर की घटनाएं, गांधी नेहरू युग का स्वाधीनता संघर्ष और स्वतंत्रयोत्तर भारत में आर्थिक नियोजन,निर्गुट विदेश नीति तथा मीडिया आधुनिकीकरण को देखा और उन पर लिखा।

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जेल की सजा♀
महात्मा गांधी के सानिध्य में रहकर वर्ष 1942 से 1945 तक रामा राव ने 2 दर्जन से ज्यादा भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों के विशेष संवाददाता के रूप में राष्ट्रीय आंदोलन की रपट भेजी।उन्होंने केंद्रीय विधानसभा,भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अधिवेशनों तथा क्रिकेट टेस्ट मैचों की रिपोर्टिंग भी की।उन्होंने बड़ी संख्या में युवा पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जिनमें शामलाल जो बाद में टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रधान संपादक,एच. वाई. शारदा प्रसाद इंदिरा गांधी के मीडिया सलाहकार और एम,चलपति राव जो नेशनल हेराल्ड में 13वें स्थान पर आए और बाद में संपादक बने। रामा राव के प्रशिक्षु का नाम था श्री बालकृष्ण मेमन जो संन्यास लेकर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती कहलाए।

सन 1942 में रामा राव को नेशनल हेराल्ड में जेल या जंगल संपादकीय लिखने पर ब्रिटिश हुकूमत ने 6 माह का कारावास और जुर्माने की सजा दी थी। संपादकीय में उन्होंने लखनऊ कैंप जेल में कांग्रेसी सत्याग्रही ऊपर हुए बर्बर अत्याचार की भर्त्सना की थी।
अवध चीफ कोर्ट के निर्णय को आधे घंटे में रेडियो बर्लिन ने प्रसारित कर दिया था।लखनऊ जेल के”क्रांतिकारी यार्ड”में रामाराव को नजरबंद रखा गया जहाँ उनके पूर्व मोतीलाल नेहरू,जवाहलाल नेहरू,आचार्य जेबी कृपलानी,आर.एस पण्डित(जवाहरलाल के बहनोई)आदि कैद थे।
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की यूरोप अफ्रीका और अमेरिका यात्रा (1949)में रामा राव दी हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप,इलाहाबाद के दी लीडर तथा पटना के दिन सर्चलाइट के विशेष प्रतिनिधि के रूप में गए।
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के अलावा रामा राव ने ब्रिटेन,फ्रांस,इटली, मिस्र,कनाडा,ब्राज़ील,ग्रीस(यूनान),स्विट्ज़रलैंड आदि देशों की यात्रा भी की।

विद्रोही माता♀
रामाराव प्रथम राज्य सभा(1952) के लिए अविभाजित मद्रास राज्य(आंध्र प्रांत)से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए।इनके नाम का प्रस्ताव विधायक के.कामराज तथा नीलम संजीव रेड्डी ने किया था जो बाद में कांग्रेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।भारत सरकार के प्रथम सलाहकार(1956)के नाते रामा राव ने पंचवर्षीय योजना के प्रचार-प्रसार का संचालन किया था।कई पुस्तकों के लेखक के. रामा राव ने अपनी आत्मकथा”The pen as my sword”लिखी।अखिल भारतीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन(ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एडिटर कान्फ्रेंस,1940) के सँस्थापको में रामाराव थे।

रामा राव के पिता श्री कोटमराजू नारायणराव संस्कृत में पाण्डित्य तथा स्कूल के हेड मास्टर(1898) थे।उनकी मां वेंकायम्मा ने ब्रिटिश कलेक्टर गुंटुर जनपद के विरूद्ध 1899 में असहयोग करने और टैक्स न देने हेतु ग्राम वासियों को संगठित किया था।उनके चचेरे भाई कोटमराजू”बोम्बू”रामैया आंध्र के प्रथम क्रांतिकारी थे, आंध्र के प्रथम क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1910 में कठेश्वर तेनाली में बम बनाया था

रामा राव ने अंग्रेजी भाषा की कवियत्री और ज्योतिषी सरस वाणी से सागर तट मछलीपट्टनम नगर आंध्र प्रदेश में 1922 में विवाह किया।इस पाणिग्रहण कार्य को संपन्न कराने वाले मछलीपट्टनम मिवासी बाद में कांग्रेस के अध्यक्ष व स्वतंत्रता सेनानी और मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे स्वर्गीय डॉ बी.पट्टाभिसीतारामैय्या ने संपन्न कराया था। श्री रामाराव के ससुर प्रोफेसर चोडवरपु जगन्नाथ राव टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल थे।रामा राव के चार पुत्रों में प्रथम भारतीय विदेश सेवा आईएफएससी रिटायर होने पर अमेरिका में बस गए दूसरे सुपुत्र नारायण भारती ऑडिट एवं अकाउंट सर्विस (आईए-एएस) अब नई दिल्ली में त्रैमासिक जनरल ऑफ एस्ट्रोलॉजी के संपादक हैं।तृतीय सुपुत्र के.विक्रम राव लखनऊ में श्रमजीवी पत्रकार है।अंतिम सुपुत्र सुभाष पूर्व बैंक मैनेजर थे।चार सुपुत्रियों में ज्येष्ठ बसन्त तथा कनिष्ठ हेमन्त अमेरिका में बस गयी द्वितीय शरद तथा तृतीय शिशिर भारतीय सेना के अधिकारियों से विवाह कर कानपुर तथा मंगलूर में बसी हैं।

राष्ट्रनायकों की नज़र में के रामाराव♀
♂महात्मा गांधी ने रामा राव को मेरा जुझारू संपादक कहा था। बापू ने दैनिक नेशनल हेराल्ड को ब्रिटिश राज द्वारा बंद करवा देने की हरकत को राष्ट्रीय आंदोलन की त्रासदी बताया था।
♂प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लिखा यह उनके लिए गौरवशाली बात थी कि”हेराल्ड के संपादक के रूप में रामा राव को जानने व मिलने का अवसर मुझे मिला,वह भारत की पत्रकारिता जगत के युगपुरुष थे।

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♂नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में गांधी नेहरू नेत्र से टकराव के बाद अपनी कानपुर यात्रा के समय कहा था कि”जवाहर के अखबार का यह संपादक मेरे प्रति निष्पक्ष तथा ईमानदार रहा। कांग्रेस अध्यक्ष पद के मतदान में नेताजी ने रामा राव के ममेरे भाई और गांधीजी के प्रत्याशी डॉ.बी. पट्टाभिसीतारमैय्या को हराया था। ♂गृहमंत्री सरदार पटेल ने बिहार शासन को अनुमति देने से इनकार कर दिया था कि रामा राव को नजरबंद किया जाए क्योंकि तब दैनिक सर्चलाइट पटना के संपादकीय में रामा राव ने नेहरू- लियाकत करार को पाकिस्तान का तुष्टिकरण बताया था,इस करार की आलोचना करने की प्रेस पर निषेधाज्ञा थी।
♂सी राजगोपालाचारी(भारत के प्रथम गवर्नर जनरल)ने रामा राव को मेरे निर्भीक संपादक कह कर संबोधित करते थे।

♂प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद तत्कालीन संविधान सभा के अध्यक्ष ने 1949 में घनश्याम दास बिड़ला को सुझाया था कि चेन्नई से रामा राव को पटना लाएं और अपने अखबार दैनिक सर्च लाइट का संपादक बनाएं ताकि लोकल गुटबाजी द्वेष और टकराव से बचें।
♂भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने राज्यसभा के अध्यक्ष के नाते रामा राव की श्लाघा में कहा कि वे अत्यन्त सक्रिय सदस्य थे और सदन में जानकारी, अनुभव तथा अधिकार के साथ चर्चा में भाग लेते थे।

♂राष्ट्रपति वीवी गिरी (तब वे केरल के राजपाल)ने रामाराव को एक उत्कृष्ट राष्ट्र भक्त बताया था। ♂भारत के अंग्रेज वायसराय जनरल आर्चिबाल्ड वेवल रामाराव से भेंट होने पर पूछा अच्छा उस अखबार(नेशनल हेरॉल्ड) के संपादक जिस पर कार्रवाई की गई थी?।तब अखिल भारतीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन की स्थाई समिति को 1945 में अपने निवास अब राष्ट्रपति भवन में चाय पर बुलाया था।

♂इंदिरा गांधी को स्मरण रहा था कि फिरोज गांधी के साथ उनके धार्मिक रामायण में सामाजिक परिवर्तन की खास घटना के रूप में पेश किया था। ♂भीमराव अंबेडकर ने राज्य सभा में कशमीर चर्चा(1953)के दौरान टिप्पणी की थी मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि सत्तारूढ़ कांग्रेस नव सभापति ने मुझे इतना महत्त्वपूर्ण समझा जो रामा राव जैसे प्रमुख सदस्य को मेरे भाषण का जवाब देने हेतु चुना।

♂सोशलिस्ट नेता जयप्रकाश नारायण तय किया(1949) की वे अपना वक्तव्य पटना के दैनिक सर्च लाइट को भेजा करेंगे क्योंकि अब समाचार पत्र के संपादक है। ♂पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने 1961 में राज्यसभा में रामाराव भारतीय पत्रकारिता का द्रोणाचार्य कहा क्योंकि अनगिनत युवाजनों को पत्रकारिता में उन्होंने दक्ष किया।

♂राम मनोहर लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष गोपाल नारायण सक्सेना(पालनजी)ने लखनऊ जेल में 1942 में रामा राव को हिंदी सिखाई थी।
♂कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रफी अहमद किदवई ने रामाराव को चेताया कि नेशनल हेराल्ड के संपादक बनने पर जेल यात्रा भी हो सकती है,रामा राव का जवाब था कि मैं पिकनिक के लिए तैयार हूं।

♂मानवाधिकार के आयोग के पूर्व अध्यक्ष तथा भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा ने कहा कि आजाद भारत अपनी मजबूत नींव के लिए स्व.रामा राव जैसे व्यक्तियों का सदैव ऋणी रहेगा। आधुनिक पेश की बाबत की रामा राव की राय थे की भारत आज स्वतंत्र राष्ट्र तो है मगर उसकी पत्रकारिता स्वतंत्र नहीं है पत्रकारिता जगत के सफर में रहे अथक अथक यात्री सरगी के रामा राव 1918 ब्रह्म समाज के साप्ताहिक की डीयू में नीति से पत्रकारिता में प्रवेश या चेन्नई 1919 मार्च उप संपादक व रिपोर्टर ज़ी न्यूज़ टाइम्स कराची 1919 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अमृतसर सम्मेलन में भाग लिया 5 जनवरी 1920 उप संपादक दैनिक लीडर इलाहाबाद 19 20 21 संपादक दैनिक एडवोकेट ऑफ इंडिया मुंबई 1921 से 1930 तक संयुक्त संपादक दैनिक सरवर कराची 1930 से 1927 तक संपादक टाइम्स ऑफ इंडिया ऑल द इवनिंग न्यूज ऑफ इंडिया मुंबई 1978 संपादक दैनिक 1930 से 1932 तक समाचार संपादक दैनिक इंडियन दिल्ली मुंबई 1932 से 1934 तक संपादक दैनिक विशेष संवाददाता दैनिक दिल्ली 1934 में ही संपादक जी फ्री इंडिया कोलकाता 1935 में संपादक चेन्नई 1936 में समाचार संपादक दैनिक द पीपुल लाला लाजपत राय का अखबार लाहौर 1936 से 1938 तक समाचार संपादक द हिंदुस्तान टाइम्स दिल्ली 1938 से 1946 तक संपादक दिन नेशनल हेराल्ड लखनऊ 1942 15 अगस्त स्वाधीनता आंदोलन के दौरान लखनऊ जेल में 6 माह का याद रहे 1943 से 1945 महात्मा गांधी के पास सेवाग्राम मुंबई शिमला पुणे महाबलेश्वर आदि स्थानों में देश विदेश के 25 समाचार पत्रों के स्तंभकार विशेष संवाददाता रहे 1947 से 1948 तक संपादक दैनिक दी इंडियन रिपब्लिक चेन्नई 1950 से 1950 तक संपादक दैनिक सर्च लाइट हिंदुस्तान टाइम्स पटना 1949 से 1954 तक अमेरिका यूरोप अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी राष्ट्रपति आगरा की 1950 से 1951 तक संपादक दैनिक दिंडी न्यूज़ क्रॉनिकल नई दिल्ली 1952 में साप्ताहिक गीत कांग्रे संदेश नई दिल्ली में संपादक रहे 1952 में ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अविभाजित मद्रास राज्य से किसी पत्रकार को प्रथम राज्यसभा सदस्य के रूप में जितवा कर नई दिल्ली भेजा 1955 में सलाहकार पंचवर्षीय योजना भारत सरकार 1960 में आत्मकथा दीपेंद्र रचना के उनका जन्म 9 नवंबर वर्ष 1896 में आंध्र प्रदेश के चिराला में हुआ तो माँ भारती के इस यशश्वी पुत्र ने गोलोकवासी बने 9 मार्च 1961 को पटना(बिहार)में।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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