★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{शिवसेना नेता ठाकरे ने कहा कि भविष्य के सीएम के रूप में लोंगो ने किया स्वागत लेकिन जनता की इच्छा से ही बनूँगा मुख्यमंत्री}
[आदित्य ने कहा कि हमारा गठबंधन बना रहेगा, बीजेपी-शिवसेना को कितनी सीटे मिलेगी जल्द ही होगा सार्वजनिक ]
(आरे जंगल मुद्दे पर ठाकरे ने कहा कि पीएम मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाकर पर्यावरण के पक्ष में बोल रहे हैं सीएम को भी इस पर ध्यान देना चाहिए)

♂÷आदित्य ठाकरे ने कहा है कि शिवसेना-भाजपा में है कुछ मतभेद हैं, लेकिन इन मतभेदों को सुलझाया जा सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले शिवसेना के युवा प्रकोष्ठ के प्रमुख आदित्य ठाकरे ने शिवसेना और बीजेपी के मतभेदों को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच कुछ मामलों में मतभेद हैं लेकिन हम इसे आपस में सुलझा सकते हैं और होगा भी ऐसा ही।
ठाकरे ने कहा कि, “भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में जनता ने उनका स्वागत किया, लेकिन जब मैं मुख्यमंत्री बनूंगा तो महाराष्ट्र की जनता की इच्छा से ही बनूंगा। अब देवेंद्र फडणवीस हमारे मुख्यमंत्री हैं और मुझे आशा है कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो भी वादे किए थे, उन्हें पूरा करने का गौरव और सम्मान हासिल करेंगे।महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन बना रहेगा,सीटों के बंटवारे में भाजपा और शिवसेना को कितनी-कितनी सीटें मिलेंगी, यह जल्द ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
आरे जंगल के मामले पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर सही जानकारी नहीं दी गई है, यह तो मुद्दा ही नहीं है कि यह जंगल भूमि है या सरकार की जमीन है,यहां मामला आरे जंगल के इलाके में जो जीवन है, उससे जुड़ा हुआ है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्होंने आरे जंगल के मामले में एक प्रजेंटेशन तैयार किया है मुझे पूरी उम्मीद है कि सीएम इस मामले को लेकर अपनी धारणा बदलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाकर पर्यावरण के पक्ष में बात कर रहे हैं सीएम फडणवीस को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।
हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की माँग जोर पकड़ते जाने पर अपनी बेबाक राय रखते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि, मेरा विश्वास है कि देश में ऐसी कोई सक्षम भाषा नहीं है जिसका प्रयोग पूरे देश में भाषा के रूप में किया जा सके, एक भाषा विशेष की लोकप्रियता या महत्व अधिक हो सकता है, लेकिन उस भाषा का पूरे देश में प्रभुत्व हो, यह जरूरी नहीं है।
राजनीति में वंशवाद है लेकिन राजवंशों के राजकुमारों को भी जनता का आशीर्वाद पाना जरूरी है नहीं तो वे राजनीति में अदृश्य हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि, “मैं पार्टी के उतार-चढ़ाव का सामना कर यहां तक पहुंचा हूं मैं राजनीति में लंबे समय तक काम करने के लिए आया हूं।






















