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★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{सोनिया से मिले अपमान को हथियार बना नेस्तनाबूद कर डाला जगन ने काँग्रेस को आन्ध्र प्रदेश मे}
[जगन ने इंदिरा गाँधी म्युनिसिपल स्टेडियम में 40 हज़ार की मौजूदगी में शपथ ले बने सूबे के नए युवा सीएम]

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{जगन के पिता मुख्यमंत्री रहे YSR की हुई थी हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत,इस मौत को भी लेकर उस दौरान थी चर्चाएं गर्म}
(विधवा विजयलक्ष्मी बेटी शर्मिला के साथ गयी थी सोनिया से मिलने वहाँ मिले अपमान से जगन ने कहा ख़त्म करेंगे सूबे में काँग्रेस)
♂÷कहते है अपमान वो ज़हर है जिसे वक़्त पर पी जाने वाला इन्सान अगर अपनी पर आ जाता है तो वो रावण की सोने की लँका भी जला सकता है,वो जगन रेड्डी बनकर सोनिया गाँधी व उनकी काँग्रेस को नेस्तनाबूद भी कर सकता है आन्ध्र प्रदेश में।

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वर्षो तक अपने हृदय में माँ-बहन के अपमान की ज्वाला को स्मरण करके आन्ध्र प्रदेश की राजनीति में ख़ुद को अनगिनत अवरोध-झंझावात व केंद्रीय सत्ता से टकराते जेल जाते रहने वाले जगन रेड्डी ने आज अपनी प्रतिज्ञा पूरी करते हुए काँग्रेस विहीन आन्ध्र प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। जगनमोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं उन्होंने 40 हजार लोगों की मौजूदगी में विजयवाड़ा के इंदिरा गांधी म्यूनिसिपल स्टेडियम में शपथ ली,उनकी ये जीत ऐतिहासिक है,साथ ही जगन के सियासी जीवन की कहानी भी बेहद उतार चढ़ाव से भरी है और पूरी फिल्मी सी लगती है जैसे कोई साउथ की मूवी।

जिस इंदिरा गाँधी के नाम वाले स्टेडियम में हजारों की भीड़ के सम्मुख शपथ लेकर जगन ने इंदिरा की बहू सोनिया गाँधी के द्वारा एक दौर में किये गए अपमान का भरपूर बदला लेने के गूढ़ सन्देश भी दिए है गाँधी परिवार व काँग्रेस को।
असल में इस जीत के साथ वाईएसआर कांग्रेस के जगन रेड्डी ने कांग्रेस पार्टी व उनकी प्रमुख रही यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मां-बहन के अपमान का बदला ले लिया है,2019 के विधानसभा व लोकसभा के रिजल्‍ट के साथ ही जगन रेड्डी की सौगंध भी पूरी हो गई है।

दरअसल, कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री वाईएसआर की हेलिकॉप्‍टर दुर्घटना में मौत हो गई थी, उनकी मौत के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने उनके परिवार से दूरी बना ली थी। इस बीच वर्ष 2010 के मध्‍य में जगनमोहन रेड्डी की मां विजयलक्ष्‍मी (विजयम्‍मा) अपनी बेटी शर्मिला रेड्डी के साथ सोनिया गांधी से मिलने के लिए 10 जनपद गईं।
वाईएसआर और दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच काफी घनिष्‍ठ संबंध थे, जिससे रेड्डी की विधवा विजयलक्ष्‍मी को उम्‍मीद थी कि काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उनके साथ भी काफी गर्मजोशी से मिलेंगी, लेकिन कांग्रेस की तत्‍कालीन अध्‍यक्ष से मिलने के लिए जब उन्‍हें इंतजार करना पड़ा और उनकी सारी उम्‍मीद चकनाचूर हो गई,जब सोनिया गांधी उनके पास आईं तो उनका व्‍यवहार सामान्‍य से हटकर कुछ कठोर व दम्भ भरे अपमानित करने सा लगा।

उस समय वाईएसआर की मौत के वियोग में कई लोगों ने आत्‍महत्‍याएं कर ली थींं और जगनमोहन रेड्डी आत्‍महत्‍याएं करने वाले लोगों के घर पहुंच रहे थे और उनके परिजनों से मिल रहे थे,जगमोहन रेड्डी ने इस यात्रा को ‘ओदारपू’ नाम दिया था।
काँग्रेस चीफ़ सोनिया गांधी ने विजयम्‍मा से मिलने के बाद रेड्डी को यह यात्रा रोकने के लिए कहा, सोनिया चाहती थीं कि जगनमोहन रेड्डी ये यात्रा तुरंत रोक दें।
हालांकि विजयम्‍मा ने उन्‍हें समझाने की कोशिश की लेकिन सोनिया अपनी कुर्सी से उठी और यात्रा रोकने के लिए कह अपमानित करने वाले अन्दाज में चली गयी।

मां और बहन के इस अपमान का बदला लेने के लिए जगहमोहन रेड्डी ने कसम खा ली, इसके बाद उन्‍होंने अपने परिजनों और करीबियों को यह संकेत दिया कि वे जल्‍द ही नई पार्टी का गठन करेंगे और वे एक दिन आंध्र प्रदेश से कांग्रेस को खत्‍म कर देंगे।
सितंबर 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाई एस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु हो गई और कांग्रेस आलाकमान सोनिया गाँधी ने दिवंगत मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के तौर पर के. रोसैया को चुना।जबकि जमीनी स्‍तर पर रोसैया का कोई जनाधार नहीं था, कांग्रेस हाईकमान ने जगनमोहन रेड्डी को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था, उस समय पार्टी में बगावती सुर भी उठने लगे थे।विरोध ज्‍यादा बढ़ने पर कांग्रेस ने किरण कुमार रेड्डी को प्रदेश का सीएम बना दिया।

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बेटे जगनमोहन रेड्डी को न तो वाईएसआर का उत्‍तराधिकार दिया गया और न ही कांग्रेस पार्टी में कोई पद दिया गया बल्कि उनको आंध्र प्रदेश की राजनीति में काँग्रेस आलाकमान के इशारे पर महत्वहीन करना शुरू कर दिया गया काँग्रेस में।
इसके बाद रेड्डी ने 2011 में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया,उनकी मां वाई विजयलक्ष्मी ने भी पुलिवेंदुला विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। YSRCP संस्थापक ने 2011 के उपचुनाव में कडप्पा से पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड 5.45 लाख बहुमत के साथ जीत हासिल की।
उस समय रेड्डी एक सफल बिजनेसमैन थे, लेकिन, उनपर कानूनी शिकंजा कसा जाने लगा। उनपर आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज होने लगे।

इस मामले में जगह रेड्डी 18 महीने तक जेल में भी रहे, फिर उन्‍हें जमानत मिली, जेल से निकलने के बाद रेड्डी ने जनाधार जुटाने के लिए खास रणनीति पर काम करना शुरू किया। उन्‍होंने राज्‍य में 3,600 किलोमीटर की पदयात्रा की और उन्‍हें जनता का अच्‍छा खासा समर्थन हासिल हुआ।

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लोकसभा व विधानसभा चुनाव में सपनीली सफलता हासिल करने वाले जगह मोहन रेड्डी ने ईसाई धर्म त्याग कर शंकराचार्य से सनातन धर्म हिन्दू में पुनः दीक्षित होते हुए घर वापसी कर ली है।
कहा जाता रहा है कि सोनिया गाँधी उन नेताओं को ज्यादे बढ़ाती थी जो ईसाई रहे या फ़िर धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन गए थे।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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