★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{ब्रिटिश दासता के दौर में बाल गंगाधर तिलक ने देशवासियों में राष्ट्रवाद व एकता की जागृति के लिए प्रारम्भ किया था वृहद रूप से गणेशोत्सव की परम्परा}
[11 दिनों तक चलने वाले गणपति पूजा के दौरान महाराष्ट्र भर में रहता हैं उत्सवी माहौल, मुम्बई पुणे के पंडालों व मूर्तियों के दर्शनों के लिए आते हैं लाखों लोग]
(गणेश विग्रह की प्राणप्रतिष्ठा के लिए है शुभ मुहूर्त दिन में 3.15 के पहले उसके बाद लग जायेगी भद्रा जो चलेंगी रात 1 बजकर 53 मिनट तक)

♂÷महाराष्ट्र का सबसे बड़ा धर्मोत्सव माने जाने वाला गणेशपूजा यानी एकदंत लंबोदर विघ्नहर्ता श्रीगणेश का जन्मदिवस 2 सितंबर को है,भारी धूमधाम से गणपति भक्तों द्वारा बेहद भव्य व आलीशान मण्डपों में गणपति बप्पा को लाकर स्थापित कर दिया गया है।
गणपति उत्सव के दिनों में यू तो देश भर में लम्बोदर की पूजा विधि विधान के साथ कि जाती है किंतु विशेष रूप से महाराष्ट्र में तो इस गणेशोत्सव की छटा अलग ही होती है।11 दिनों तक पूरे महाराष्ट्र व मुम्बई में उत्सवी माहौल रहता है। विघ्नहर्ता की पूजा स्तुतियों में हर खासोआम रमा रहता है क्या अमीर क्या गरीब क्या नेता क्या अभिनेता सभी बप्पा के चरणों मे श्रद्धासुमन अर्पित कर यथाशक्ति चरणवन्दना कर कृपाप्राप्ति की कामना करते हैं।
पूरे गणेशोत्सव के दौरान मुम्बई शहर के पंडालों में रात दिन भारी भीड़ देखी जाती है,सर्वाधिक भीड़ लालबाग़ के पंडाल में उमड़ती है।तमाम पंडालों को सजाने में लाखों ही नही करोड़ो खर्च कर दिए जाते है तो वही उनके बीमे भी करवाये जाते हैं।
गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र पुलिस बेहद चाक चौबंद रहती है।
गणेश पूजा को गणेशोत्सव में बदल देने का योगदान लोकमान्य तिलक जी को जाता है जिन्होंने देश की परतन्त्रता के दौरान उन्होंने पुणे से गणपति पूजा को बड़े सामूहिक रूप से उत्सव के सरीखे मनाने की शुरुआत कर लोगो को एकजुट करने का अद्वितीय क़दम उठाया था।
देवताओं में अग्रपूज्य रिद्धि-सिद्धी दाता गजानन की कृपा हम सब पर बनी रहे, इसलिए भाद्रपद शुक्लपक्ष की गणेश चतुर्थी पर गणेश झांकी लगाई जाती है पूजा अर्चना स्थापना की जाती है। विद्या अध्ययन की शुरूआत की जाती है।इस बार गणेश चतुर्थी पर श्रेष्ठ मुहूर्त के बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य पंडित अरुणेश कुमार शर्मा।
गणेश चतुर्थी को दिन में 3 बजकर 15 मिनट से पहले गणेश विग्रह की विधिवत स्थापना कर लें इसके उपरांत भद्रा लग जाएगी भद्रा रात्रि 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगी।
दोपहर में अभिजित मुहूर्त गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है इसका समय 11 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजकर 36 मिनट तक है,सपरिवार भगवान विनायक के विग्रह का षोडशोपचार से पूजन करें, मोदकों का भोग लगाएं पट्टी-पुस्तक का पूजन करें तत्पश्चात् सौभाग्यवती माताएं हरितालिका व्रत और गणेश चतुर्थी के व्रत को पूर्ण करें।
विनायक चतुर्थी भोर में 4 बजकर 56 मिनट पर आरंभ होकर रात्रि 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगी जो व्रती प्रत्येक विनायक और संकष्टी चतुर्थी के व्रत रखते हैं वे गणेश चतुर्थी का व्रत अगले दिन पूर्ण कर सकते हैं चंद्रदर्शन और पूजन इस दिन निषिद्ध रहता है। ऐसे में वे व्रत को दोपहर की पूजा के बाद भी पूर्ण कर सकते हैं।
यह एकमात्र ऐसी चतुर्थी होती है जिसमें चंद्रमा को अघ्र्य देने और दर्शन करने से बचा जाता है। गणेश चतुर्थी को चंद्रदर्शन अकारण के आरोप और आक्षेप लगने का कारक माना जाता है। जानबूझकर चंद्रदर्शन से बचें, भूलवश देख लें तो एक छोटी सी कंकरी उठाकर दूर फेंक दें इससे दोष का परिहार हो जाएगा।
सबसे कठिनव्रतों में से एक हरितालिका व्रत के अगले दिन गणेश चतुर्थी आती है श्रेष्ठ संतान और परिवार के सुख के लिए माताएं हरितालिका व्रत में निराहार निर्जला रहती हैं। रात्रि में जागरण और पार्वती-महादेव की पूजा करती हैं,ब्रह्म मुहूर्त में शिव-गौरी की आरती पूजन और विसर्जन कर गणेश पूजन की तैयारी करती हैं।






















