फिल्म घूसखोर पंडत पर कोर्ट की रोक का सनातनी संगठनों ने किया स्वागत

फिल्म घूसखोर पंडत पर कोर्ट की रोक का सनातनी संगठनों ने किया स्वागत

(आलोक तिवारी)
(मथुरा)

एडवोकेट विनीत जिन्दल की याचिका पर दिल्ली की अदालत के द्वारा रोक लगाए जाने पर आंदोलनकारियों ने जताया हर्ष

सरकार के निर्देश पर फिल्म निर्माता समेत कई लोगों पर हुआ लखनऊ में केस दर्ज

विवादित फिल्म घूसखोर पंडत पर दिल्ली की अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के निर्णय का अखिल भारत हिन्दू महासभा, श्री वामन भगवान महोत्सव समिति, भगवान परशुराम शोभा यात्रा समिति सहित विभिन्न सनातनी संगठनों ने स्वागत किया है। संगठनों का कहना है कि फिल्म का शीर्षक ब्राह्मण समाज की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला था, जिससे समाज में वैमनस्य और विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो रही थी।
अखिल भारत हिन्दू महासभा के उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित संजय हरियाणा ने कहा कि नीरज पांडे द्वारा निर्देशित यह फिल्म समाज को तोड़ने वाली मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म के शीर्षक के माध्यम से ब्राह्मण समाज को जानबूझकर अपमानित किया गया है, जिसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि अखिल भारत हिन्दू महासभा के साथ-साथ अखिल भारत परशुराम शोभा यात्रा समिति (रजिस्टर्ड), श्री वामन भगवान महोत्सव समिति, अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा एवं अखिल भारतवर्षीय दुष्यंत संगठन द्वारा इस फिल्म का लगातार विरोध किया जा रहा था तथा न्यायालय से इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
पंडित संजय हरियाणा ने यह भी बताया कि मथुरा में सभी संगठनों द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम प्रस्तावित था, किंतु न्यायालय द्वारा फिल्म पर रोक लगाए जाने के बाद उक्त कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इसी शीर्षक के साथ फिल्म को रिलीज करने का प्रयास किया गया तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मथुरा में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
गौरतलब है कि फिल्म पर रोक लगाने के लिए एडवोकेट विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि ‘घूसखोर पंडत’ शीर्षक ब्राह्मण समाज की भावनाओं, गरिमा और प्रतिष्ठा को आहत करने वाला है तथा इसे जानबूझकर अपमानजनक उद्देश्य से रखा गया है। अदालत ने सुनवाई के उपरांत फिल्म के नाम तथा इससे जुड़ी समस्त प्रचार सामग्री को ओटीटी प्लेटफॉर्म सहित सभी माध्यमों से हटाने के आदेश जारी किए हैं। सभी संगठनों ने याचिकाकर्ता का आभार व्यक्त किया है।
भगवान परशुराम शोभा यात्रा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल शर्मा (एडवोकेट) ने कहा कि फिल्म का शीर्षक समाज को बाँटने और विद्वेष फैलाने वाला है। दिल्ली की अदालत का निर्णय स्वागत योग्य है और यह समाज की भावनाओं की रक्षा करने वाला है।
वहीं श्री वामन भगवान महोत्सव समिति के संस्थापक श्याम शर्मा ने कहा कि सनातन संस्कृति सद्भाव और मर्यादा पर आधारित है। फिल्म के शीर्षक से समाज में गलत संदेश जा रहा था। न्यायालय का निर्णय सनातन मूल्यों की रक्षा करने वाला है। उन्होंने कहा कि परशुराम वंशज ब्राह्मण समाज को अपमानित करने वाले किसी भी कृत्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष दुष्यंत सारस्वत ने कहा कि ब्राह्मण समाज को लक्षित कर इस प्रकार का अपमानजनक शीर्षक रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। न्यायालय का आदेश पूरे समाज के आत्मसम्मान की जीत है।
उधर प्रदेश सरकार के निर्देश पर लखनऊ में फ़िल्म निर्माता समेत कुछ लोगों के ऊपर कोतवाली में पुलिस ने कैसे दर्ज किया है।
कुल मिलाकर एक जाति विशेष को नीचा दिखाने वाले फ़िल्म के नाम से उत्पन्न विवाद और उसको लिए सड़को पर उतरे लोगों के आक्रोश को देखते हुए यह तय है कि सरकारी इस मामले में कठोर कदम उठाने से नहीं चुकेगी।
वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा अपनी राजनीतिक रोटी सेकने की लिए बयानबाजियों का दौर शुरू कर दिया गया है।

Mukesh Seth

Chief Editor

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