लेखक- प्रयाग पाण्डे
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का वाराणसी से आत्मीय लगाव था। 1902 से 1942 तक चार दशक के कालखंड में राष्ट्रपिता ने वाराणसी के 11बार दौरे किए थे। इस दौरान उन्होंने करीब सवा महीने तक काशी की पवित्र धरा पर विश्राम किया था। गाँधी जी का काशी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रेणता महामना मदनमोहन मालवीय जी एवं बीएचयू के साथ विशेष लगाव था। आत्मीयता थी।
राष्ट्रपिता गाँधी जी 22- 23 फ़रवरी,1902 में पहली बार काशी पधारे। तब वे काशी के एक पंडे के निवास स्थान में रुके। गाँधी जी ने गंगा स्नान किया। भगवान श्रीविश्वनाथ जी के दर्शन किए और एनी बेसेंट से भेंट की।
गाँधी जी ने काशी का दूसरा दौरा 1916 में किया। तब वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना समारोह में भाग लेने के लिए 3 फ़रवरी, 1916 को वाराणसी गए। गाँधी जी ने 3 फ़रवरी को भगवान श्री विश्वनाथ जी के दर्शन किए। 4 फ़रवरी,1916 को उन्होंने हिन्दू विश्वविद्यालय स्थापना समारोह में प्रतिभाग किया। वहाँ भाषण दिया। 5 फ़रवरी को काशी में नागरी- प्रचारिणी सभा में भाषण दिया। 8 फ़रवरी, 1916 तक गाँधी जी काशी में ही रहे। चार साल बाद 21 फ़रवरी, 1920 को गाँधी जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों की सभा में भाग लिया और विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित किया। इसी साल 30 मई, 1920 को गाँधी जी वाराणसी गए। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में भाग लिया। दो दिन तक वाराणसी में रहे। इसी वर्ष नवंबर के महीने में गाँधी जी पुनः वाराणसी गए। 25 से 27 नवंबर, 1920 तक यहीं रहे। इस दौरान उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों की सभा में भाग लिया और सार्वजनिक सभा को भी संबोधित किया।
9 फ़रवरी, 1921 को गाँधी जी ने वाराणसी के टाउन हॉल के मैदान में आयोजित सार्वजनिक सभा में भाषण दिया और अगले दिन 10 फ़रवरी, 1921 को काशी विद्यापीठ के शिलान्यास कार्यक्रम में शिरकत की।
गाँधी जी 17 अक्टूबर, 1925 को वाराणसी के दौरे पर गए। यह उनका सातवां काशी दौरा था। उन्होंने काशी विद्यापीठ की सभा में भाषण दिया। करीब डेढ़ साल बाद फ़रवरी, 1927 को गाँधी जी काशी गए। 7 एवं 8 फ़रवरी, 1927 को वहीं रहे। इस दौरान उन्होंने गाँधी आश्रम के वार्षिक समारोह में भाग लिया।
गाँधी जी का 1934 का वाराणसी दौरा सबसे अधिक दिनों का था। इस वर्ष वे 27 जुलाई से 2 अगस्त, 1934 तक वाराणसी में रहे। 28 फ़रवरी को गाँधी जी काशी विद्यापीठ गए। 29 फ़रवरी को उन्होंने जिलों के प्रतिनिधि मंडलों से भेंट की। गाँधी जी ने 30 जुलाई, 1934 को काशी में ‘मौन दिवस’ मनाया। अगले रोज सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। 1 अगस्त, 1934 को हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने गाँधी जी को मानपत्र भेंट किया। इसी दिन गाँधी जी ने कांग्रेस पार्टी की बैठक में भाग लिया। महिलाओं की सभा की। 2 अगस्त को गाँधी जी ने कबीर मठ का निरीक्षण किया। इसी दिन काशी की पंडित मंडली ने गाँधी जी को मानपत्र भेंट किया। अक्टूबर, 1936 में गाँधी जी ने वाराणसी में भारत माता मंदिर का उदघाटन किया। कला भवन का निरीक्षण भी किया।
जनवरी, 1942 में गाँधी जी पुनः वाराणसी दौरे पर गए। यह गाँधी जी की काशी की ग्यारहवीं यात्रा थी। 21 जनवरी, 1942 को उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की जयंती समारोह में प्रतिभाग किया। 22 जनवरी, 1942 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। गाँधी जी का वाराणसी, महामना मदनमोहन मालवीय जी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आजीवन विशेष लगाव रहा।

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं)




